मुंबई में गणेशोत्सव की शुरुआत से पहले शहर के दूसरे सबसे पुराने सार्वजनिक गणपति उत्सव 'चिंचपोकली चा चिंतामणि' ने अपने भव्य आगमन समारोह का आयोजन किया है. इस वर्ष यह प्रतिष्ठित उत्सव अपने 107वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है. लालबाग, परेल और गिरणगांव की सड़कों पर ढोल-ताशों की गूंज और 'चिंचपोकली चिंतामणि चा विजय असो' के नारों के बीच बप्पा का स्वागत किया गया.
दक्षिण भारतीय मंदिरों की तर्ज पर सजावट
हर साल अपनी अनूठी थीम के लिए पहचाने जाने वाले इस मंडल ने इस बार श्रद्धालुओं को दक्षिण भारतीय वास्तुकला और आध्यात्मिकता का अनूठा अनुभव कराने की तैयारी की है. चिंतामणि गणपति की मूर्ति को तिरुमला तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर बालाजी के स्वरूप से प्रेरित होकर सजाया गया है. इसमें गरुड़, कीर्तिमुख, शंख, चक्र और कपूर का तिलक जैसे पारंपरिक धार्मिक प्रतीक शामिल किए गए हैं.
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इसके अलावा, हैदराबाद और भुवनगिरि स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर की तर्ज पर भव्य पंडाल का निर्माण किया गया है, जिसमें ऊंचे गोपुरम,दीपस्तंभ और व्याल जैसी पारंपरिक शिल्प कला देखने को मिलेगी.
मंडळ के अध्यक्ष राजेंद्र डिचोलकर के मुताबिक, आधुनिक तकनीक और कुशल कलाकारों की मदद से तैयार की गई यह प्रस्तुति बप्पा के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को एक अलौकिक और आनंददायक अनुभव देगी.
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ऐतिहासिक विरासत
साल 1920 में मुंबई के कपड़ा उद्योग क्षेत्र में स्थापित यह मंडल शहर की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का एक मजबूत प्रतीक है. इसके आगमन समारोह में हर साल देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं. इस वर्ष के गणेशोत्सव आयोजन में अदाणी समूह मंडल का आधिकारिक सहयोगी है.
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