अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी ने इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) के वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल के आर्थिक और सांस्कृतिक सामर्थ्य की जमकर सराहना की. कोलकाता में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने घोषणा की कि अडाणी समूह अगले एक दशक में पश्चिम बंगाल में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगा. अपने संबोधन में उन्होंने बंगाल को देश के विकास का नया केंद्र बताते हुए कहा कि जैसे पश्चिम में मुंद्रा उनकी पहली कर्मभूमि बना, वैसे ही पूर्व में बंगाल उनकी दूसरी कर्मभूमि बने. गौतम अडाणी ने राज्य की बौद्धिक परंपरा, ऐतिहासिक योगदान और भारतीय उद्यमशीलता पर खुलकर बात की. उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कोलकाता के विचारशील विमर्श की संस्कृति की तारीफ करते हुए कहा कि इस शहर की कल्पनाशीलता और बौद्धिक गहराई का कोई सानी नहीं है.
“एक कप चाय और 3 ‘बाबू मोशाय’
कोलकाता की मशहूर ‘अड्डा’ संस्कृति और प्रबुद्ध चर्चाओं का जिक्र करते हुए गौतम अडाणी ने कहा:
“मुझसे कहा गया है कि कोलकाता में एक कप चाय के साथ तीन ‘बाबू मोशाय’ बैठ जाएं तो दूसरी चुस्की लेते-लेते वे होर्मुज के रास्ते वैश्विक समुद्री व्यापार का मार्ग बदल चुके होंगे, स्वेज नहर का आपूर्ति-श्रृंखला संकट हल कर चुके होंगे और यह भी सटीक समझा चुके होंगे कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व से ब्याज दरों पर कहाँ चूक हुई.”
उन्होंने कहा कि बंगाल का यह स्वभाव स्वाभाविक है क्योंकि भारत के कुल 12 नोबेल पुरस्कार विजेताओं में से 6 का गहरा संबंध इसी पावन भूमि से रहा है.
न्यू टाउन में 2,000 बेड का ‘अडाणी आरोग्य मंदिर’
गौतम अडाणी ने कहा कि विकास को सिर्फ टन, मेगावाट या टेराबाइट में नहीं मापा जा सकता, उसका मानवीय चेहरा होना आवश्यक है. इसी दिशा में उन्होंने न्यू टाउन में 2,000 बिस्तरों वाले विश्वस्तरीय चिकित्सा संस्थान ‘अडाणी आरोग्य मंदिर’ की स्थापना का ऐलान किया. इस सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल के 50 फीसदी (आधे) बेड उन गरीब व जरूरतमंद परिवारों के लिए आरक्षित रहेंगे जो महंगे इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ हैं.
इसके अतिरिक्त, बंगाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को सहेजने के लिए समूह ने कुमारटुली घाट का जीर्णोद्धार, दुर्गा पूजा और स्थानीय कलाकारों को वैश्विक पहचान दिलाने का कार्यक्रम तथा ऐतिहासिक ‘राइटर्स बिल्डिंग’ के संरक्षण में सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई.
इन सेक्टर्स में होगा ₹1 लाख करोड़ का निवेश
अडाणी समूह द्वारा आगामी 10 वर्षों में किया जाने वाला 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रमुख रूप से इन क्षेत्रों में केंद्रित होगा:
- अत्याधुनिक बंदरगाह और एकीकृत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क
- विद्युत उत्पादन, पारेषण एवं वितरण
- सड़कें, रणनीतिक पुल और रोपवे नेटवर्क
- पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन सीमेंट विनिर्माण
- हाइपरस्केल एआई डेटा सेंटर्स
विवेकानंद की भूमि ने भारत को सिर उठाकर जीना सिखाया”
अडाणी ने भारत के वैचारिक और सांस्कृतिक उत्थान में बंगाल के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी अन्य स्थान ने भारत की कल्पना शक्ति को इतना समृद्ध नहीं किया जितना बंगाल ने किया है. स्वामी विवेकानंद ने पूरे राष्ट्र को दुनिया के सामने सिर उठाकर गर्व से खड़े होने का असीम आत्मविश्वास दिया. मानवीय चेतना को झकझोरना, असंभव की सीमाओं को चुनौती देना और पूरे देश को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना बंगाल की सबसे बड़ी ताकत रही है.
“विकसित भारत के लिए ‘पूर्व’ का उदय जरूरी”
उद्योगपतियों और नीति-निर्माताओं को संबोधित करते हुए गौतम अडाणी ने कहा कि बीते दशकों में देश की आर्थिक प्रगति का मुख्य केंद्र पश्चिमी और दक्षिणी गलियारा रहा है. भारत को अगले ट्रिलियन डॉलर की वृद्धि हासिल करने और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने के लिए पूर्वी भारत का सशक्त होना अनिवार्य है. उन्होंने रणनीतिक स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि बंगाल के पश्चिम में ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के खनिज व औद्योगिक क्षेत्र हैं. उत्तर-पूर्व की ओर यह पूर्वोत्तर राज्यों का प्रवेश द्वार है. बंगाल की खाड़ी के जरिए यह दक्षिण-पूर्व एशिया और इंडो-पैसिफिक के उन बाजारों से जुड़ता है जो वैश्विक जीडीपी के 60% और विश्व आबादी के 65% का प्रतिनिधित्व करते हैं.
मुंद्रा, खावड़ा और हाइफा पोर्ट के अनुभवों का किया जिक्र
अपने व्यापारिक निर्णयों और जोखिम लेने की क्षमता पर चर्चा करते हुए उन्होंने तीन प्रमुख वैश्विक पहलों के उदाहरण दिए:
- एआई डेटा सेंटर्स: 2020 में ही डिजिटल व एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के संगम को पहचान कर तैयारी शुरू की गई, जिससे आज समूह देश के सबसे बड़े हाइपरस्केल डेटा सेंटर ऑर्डर बुक का संचालन कर रहा है.
- इजराइल का हाइफा पोर्ट: 2022 में अब्राहम समझौते के दौर में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप को जोड़ने वाले रणनीतिक मूल्य को भांपकर हाइफा बंदरगाह हासिल किया, जिसे बाद में G20 के IMEC कॉरिडोर से मजबूती मिली.
- एकीकृत लॉजिस्टिक्स (मुंद्रा और खावड़ा): उन्होंने कहा कि ‘Scale creates size, networks create strength’ (पैमाना आकार देता है, लेकिन नेटवर्क ताकत पैदा करता है). मुंद्रा पोर्ट 40,000 एकड़ में फैला ऐसा ही एकीकृत मॉडल बना. वहीं कच्छ के खावड़ा में 538 वर्ग किमी में 30 गीगावाट का दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क ऊर्जा के साथ-साथ नए औद्योगिक भूगोल को तैयार कर रहा है.
“जोखिम खत्म होने का इंतजार किया, तो अवसर भी खो जाएंगे”
उद्यमशीलता की मूल भावना पर जोर देते हुए गौतम अदाणी ने कहा कि वर्तमान दौर में हर पुरानी धारणा बदल रही है. उन्होंने उद्योग जगत को संबोधित करते हुए कहा:
“हममें से अधिकांश लोग उद्यमशीलता की प्रकृति को भली-भाँति समझते हैं. यदि हम हर जोखिम के समाप्त होने की प्रतीक्षा करेंगे, तो हम तब तक इंतजार करते रह जाएँगे जब तक कि हर अवसर भी समाप्त न हो जाए. हम सबकी व्यावसायिक यात्रा एक ऐसे भविष्य पर विश्वास करने के निर्णय से शुरू हुई थी, जिसे उस समय का वर्तमान उचित नहीं ठहरा रहा था.”
बौद्धिक विरासत और गुरुदेव टैगोर की प्रार्थना से किया समापन
संबोधन के शुरुआती हिस्से में उन्होंने बंगाल की समृद्ध बौद्धिक परंपरा, नोबेल पुरस्कारों के इतिहास और स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस व जगदीश चंद्र बोस के योगदान को याद किया. भाषण के समापन पर उन्होंने गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रसिद्ध कविता की पंक्तियों के माध्यम से राष्ट्र के प्रति अपनी भावना व्यक्त की:
“जहां मन भय से मुक्त हो और मस्तक गर्व से ऊंचा रहे,
जहां ज्ञान की ज्योति हर मन में स्वतंत्र होकर बहे.
जहां विवेक की निर्मल धारा हमें सत्य की राह दिखाए,
उस स्वाधीनता के स्वर्ग में हे प्रभु मेरा भारत जाग जाए.”