Tarique Rahman’s India Visit Cancelled: बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान 23 अगस्त से 3 दिन के लिए नई दिल्ली के विजिट पर आने वाले थे, लेकिन अब ये दौरा टाल दिया गया है. ये बदलाव भारत-बांग्लादेश रिश्तो के लिहाज से एक नाजुक वक्त पर हुआ है, क्योंकि ढाका में हाल ही में लिए गए कई फैसलों ने दोनों देशों के संबंधों की भविष्य की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अगर बांग्लादेश भारत के साथ प्रैक्टिकल कॉर्पोरेशन पर रणनीतिक चिंताओं और घरेलू राजनीतिक दबाव को हावी होने देता है, तो इस यात्रा के रद्द होने का नुकसान उठाना पड़ सकता है.
ढाका का बढ़ता रणनीतिक झुकाव
इस विजिट से पहल तारिक रहमान के एक सहयोगी ने कथित तौर पर ‘इस्लामिक नाटो’ के विचार का समर्थन किया, जबकि बांग्लादेश ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की भी मांग की. आलोचकों का तर्क है कि ऐसे कदम दोनों पड़ोसियों के बीच भरोसा बहाल करने की कोशिशों को मुश्किल बना सकते हैं. 1971 में अपनी आजादी के बाद से ही भारत के बांग्लादेश के साथ करीबी रिश्ते रहे हैं, जिसमें एनर्जी सप्लाई, फूड सप्लाई, हेल्थकेयर और बुनियादी ढांचे से जुड़ा सहयोग शामिल है.
चीन के साथ नजदीकियां
भारत दौरे से पहले बीजिंग के साथ रहमान की नजदीकियों ने भी ध्यान खींचा है. खबरों के मुताबिक, बांग्लादेश ने लंबे वक्त से लंबित तीस्ता जल-बंटवारा प्रोजेक्ट में चीन की भागीदारी की मांग की और म्यांमार के रास्ते चीन के युन्नान प्रांत और बांग्लादेश के बीच संभावित रोड कनकेक्टिविटी पर चर्चा की. हालांकि बांग्लादेश में चीन का निवेश काफी है, लेकिन भारत के भौगोलिक और आर्थिक अहमियत को देखते हुए बीजिंग पर ज्यादा स्ट्रैटेजिक डिपेंडेंसी ढाका के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है.
सुरक्षा चिंताओं से बढ़ा दबाव
बांग्लादेश को इस्लामी राजनीतिक और चरमपंथी समूहों से भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. चरमपंथी नेटवर्क से जुड़े संगठनों से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं और देश की दक्षिण-पूर्वी सीमा पर अस्थिरता ने भारत-बांग्लादेश के रिश्तों के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं. आलोचकों का तर्क है कि खास तौर से भारत पर फोकस करने के बजाय, ढाका को अपनी सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने और चरमपंथी ग्रुप्स को ज्यादा असर जमाने से रोकने की जरूरत है.
बातचीत का एक मौका
ये विजिट ऐसे वक्त में कैंसिल हुई है जब बांग्लादेश आगामी इंटरनेशनल डिप्लोमेटिक प्रोग्राम्स में अपनी भागीदारी पर विचार कर रहा है. भारतीय लीडरशिप के साथ डायरेक्ट मीटिंग से बिजनेस, बिजली, परिवहन और काउंटर टेररिज्म कोऑपरेशन पर चर्चा करने का मौका मिल सकता था. ढाका के लिए, भारत के साथ कंस्ट्रक्टिव रिलेशन बनाए रखना रणनीतिक रूप से अहम है. उनकी भौगोलिक स्थिति और गहरे आर्थिक रिश्तों को देखते हुए, लंबे समय तक राजनयिक तनाव आखिरकार भारत की तुलना में बांग्लादेश को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है.
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