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Justice Varma Case में सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, अतिरिक्त समय देने की मांग भी खारिज

supreme court verdict on justice Yashwant varma case: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट ने अपने खिलाफ चल रही महाभियोग (impeachment) की कार्यवाही के लिए गठित संसदीय समिति की वैधता को चुनौती दी है. अदालत ने फिलहाल जस्टिस वर्मा को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है.

Author Edited By : Vijay Jain
Updated: Jan 8, 2026 20:34
Justice Varma Case

supreme court verdict on justice Yashwant varma case: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही संसदीय समिति की वैधता को चुनौती दी है. पिछले साल उनके आधिकारिक आवास से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने से जुड़ा है. कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की ओर से संसदीय पैनल के समक्ष जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग भी खारिज कर दी. पैनल को जवाब 12 जनवरी तक जमा करना है.

समिति की वैधता पर विचार किया जाएगा

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने जस्टिस वर्मा की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित समिति की वैधता पर विचार किया जाएगा, लेकिन अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती. इससे पहले जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि लोकसभा अध्यक्ष ने जांच समिति का गठन “एकतरफा” किया, जबकि महाभियोग के नोटिस दोनों सदनों में एक ही दिन दिए गए थे. उनके अनुसार, जब तक दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार न हो जाए, तब तक संयुक्त समिति ही बन सकती है. उनके मामले में राज्यसभा के उपसभापति ने प्रस्ताव खारिज कर दिया था, इसलिए लोकसभा अध्यक्ष द्वारा अकेले समिति गठित करना अवैध है.

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जस्टिस वर्मा के आवास से बरामद हुई थी नकदी

यह विवाद पिछले साल 14 मार्च की घटना से शुरू हुआ, जब जस्टिस वर्मा (तत्कालीन दिल्ली हाईकोर्ट जज) के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास में आग लगी और बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई. बाद में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया. तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने इन-हाउस जांच के लिए तीन सदस्यीय पैनल गठित किया, जिसने 4 मई को रिपोर्ट सौंपकर जस्टिस वर्मा को कदाचार का दोषी ठहराया. सीजेआई ने उन्हें इस्तीफा देने या महाभियोग का सामना करने को कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी गई.

समिति के समक्ष निर्धारित प्रक्रिया जारी रहेगी

सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त को इन-हाउस जांच रिपोर्ट को चुनौती देने वाली जस्टिस वर्मा की याचिका खारिज कर दी. इसके बाद 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अलग से तीन सदस्यीय संसदीय समिति गठित की. दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने इस समिति की वैधता की जांच करने पर सहमति जताई थी. जस्टिस वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला दिया और कहा कि समिति का गठन लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति मिलकर ही कर सकते हैं. कोर्ट ने हालांकि समय विस्तार की मांग ठुकरा दी और कहा कि समिति के समक्ष निर्धारित प्रक्रिया जारी रहेगी.
यह मामला न्यायपालिका की गरिमा और महाभियोग प्रक्रिया की संवैधानिकता से जुड़ा है, इसलिए फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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First published on: Jan 08, 2026 08:33 PM

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