Om Pratap
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नई दिल्ली: राज्यपाल आरएन रवि को शांति के लिए खतरा बताते हुए तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी द्रमुक ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को लोगों की सेवा करने से रोकने के लिए उन्हें हटाने की मांग की गई है। द्रमुक ने आरोप लगाया है कि वे (राज्यपाल) सांप्रदायिक घृणा को भड़काते हैं।
द्रमुक ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपे गए बयान में कहा, “राज्यपाल आरएन रवि ने संविधान और कानून के संरक्षण, रक्षा और बचाव की शपथ का उल्लंघन किया है।” आरोप लगाया कि वे विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने में अनावश्यक देरी करते हैं।
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मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली पार्टी ने आरएन रवि को संवैधानिक पद के लिए अयोग्य करार देते हुए कहा कि कुछ लोग उनके बयानों को देशद्रोही मान सकते हैं क्योंकि उनके बयान सरकार के प्रति असंतोष को भड़काने का प्रयास करते हैं। वे बर्खास्त होने के योग्य है। उधर, राज्यपाल आरएन रवि ने इस पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है।
द्रमुक ने इस महीने की शुरुआत में “समान विचारधारा वाले सभी सांसदों” को पत्र लिखकर आरएन रवि को हटाने के प्रस्ताव का समर्थन करने का आग्रह किया था। तमिलनाडु में 20 विधेयकों को राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार है।
कानून कहता है कि राज्यपाल को राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त या हटाया जा सकता है। यदि कोई विधेयक राज्य मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृति के लिए भेजा जाता है, तो राज्यपाल उसे एक बार वापस भेज सकता है। यदि कैबिनेट विधेयक को राज्यपाल को दोबारा भेजता है, तो वे उसे वापस नहीं भेज सकते।
बता दें कि तमिलनाडु के अलावा दो दक्षिणी राज्यों केरल और तेलंगाना में भी राज्यपाल और सत्तारूढ़ दल के बीच टकराव है। राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं ने इन राज्यपालों पर “केंद्र की कठपुतली” की तरह काम करने का आरोप लगाया है।
द्रमुक ने तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन पर आरोप लगाया है, जो सत्ता संभालने से पहले तमिलनाडु में भाजपा की एक वरिष्ठ नेता थीं, उन्होंने राज्य की राजनीति में हस्तक्षेप किया है। राज्य के विश्वविद्यालयों में भर्तियों को लेकर मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की टीआरएस से तेलंगाना में सुंदरराजन भी निशाने पर हैं।
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डीएमके के मुखपत्र मुरासोली ने राज्यपाल सुंदरराजन की इस टिप्पणी का जवाब दिया कि पार्टी के शीर्ष राजनीतिक परिवार की जड़ें तेलुगु हैं। उसने कहा, “तेलंगाना के राज्यपाल को तमिलनाडु में राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह उनका काम नहीं है। उन्हें इस्तीफा देने दें और तमिलनाडु में राजनीति करें।”
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