पराली पर तत्काल सुनवाई से SC का इन्कार, कहा-कुछ मामलों पर अदालतें गौर कर सकती हैं और कुछ पर नहीं

Supreme Court, Article 370, Jammu Kashmir, Ladakh, PM Modi,

फाइल फोटो

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सुप्रीम कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर में बिगड़ते वायु प्रदूषण के उपायों और पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमा कोहली और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि ये न्यायपालिका के दायरे में आने वाले मुद्दे नहीं हैं। पीठ ने कहा, “तो क्या प्रतिबंध से इसमें मदद मिलेगी? कुछ मामलों पर अदालतें गौर कर सकती हैं और कुछ पर नहीं, क्योंकि वे न्यायिक रूप से उत्तरदायी नहीं हैं।”

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सुनवाई के दौरान पीठ की टिप्पणी तब आई जब अधिवक्ता शशांक शेखर झा ने तत्काल सुनवाई के लिए उनकी याचिका का उल्लेख किया। इससे पहले एक अलग पीठ ने मामले की सुनवाई 10 नवंबर को तय की थी। याचिका में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को तलब करने और कहीं भी पराली जलाने के किसी भी मामले की व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी लेने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसने पराली जलाने के संबंध में सभी राज्यों को नए दिशा-निर्देश जारी करने के लिए निर्देश देने की मांग की।

पेश याचिका में प्रत्येक राज्य को प्रदूषण को कम करने के लिए आवश्यक उपाय करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है, जिसमें स्मॉग टावरों की स्थापना, वृक्षारोपण अभियान, किफायती सार्वजनिक परिवहन आदि शामिल हैं। याचिका में कहा गया कि “बड़े पैमाने पर जनता प्रदूषित हवा और स्मॉग से भरी ऑक्सीजन में सांस लेने के लिए मजबूर है। न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद कि पराली जलाने और वायु प्रदूषण पैदा करने वाले निर्माण को रोकने के लिए, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और अन्य स्थानों में बड़े पैमाने पर प्रदूषण हो रहा है जिससे यह मुश्किल हो रहा है। ”याचिका में कहा गया है कि स्थिति बड़े पैमाने पर लोगों के जीवन के अधिकार के खिलाफ है।

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याचिका में यह भी बताया गया कि 3 नवंबर को एक्यूआई का स्तर दिल्ली भर में 440 से 460 के बीच रहा है जो विभिन्न स्रोतों के अनुसार “स्वस्थ लोगों को प्रभावित करता है और मौजूदा बीमारियों वाले लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है”। इसमें कहा गया है कि 400 या उससे अधिक का एक्यूआई “गंभीर” माना जाता है और यह स्वस्थ लोगों और पहले से ही बीमार लोगों दोनों को प्रभावित कर सकता है।

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Amit Kasana

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अमित कसाना: पत्रकारिता की दुनिया में एक सिद्धहस्त कहानीकार अमित कसाना सिर्फ खबरें नहीं लिखते बल्कि उन्हें बारीकी से संवारते हैं ताकि पाठकों तक सटीक, ताजा और प्रभावी जानकारी पहुंचे. News 24 में न्यूज एडिटर के रूप में उनकी भूमिका समाचारों को प्रस्तुत करने से कहीं अधिक है, वह उन्हें संदर्भ और दृष्टिकोण के साथ गढ़ते हैं. 2008 में 'दैनिक जागरण' से अपनी यात्रा शुरू करने वाले अमित ने 'दैनिक भास्कर' और 'हिंदुस्तान' जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों में भी अपनी पहचान बनाई. 17 वर्षों के लंबे अनुभव के साथ उन्होंने पत्रकारिता के हर पहलू को बारीकी से समझा, चाहे वह प्रिंट, टेलीविजन या डिजिटल मीडिया हो. राजनीति, अपराध, खेल, मनोरंजन, कानून, ऑटोमोबाइल, लाइफस्टाइल और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग में उनकी गहरी पकड़ है. ब्रेकिंग न्यूज की रोमांचक दुनिया, खोजी पत्रकारिता की गहराई और तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग का संयोजन अमित की कार्यशैली की पहचान है. News 24 में उनका लक्ष्य स्पष्ट है समाचारों को त्वरितता और सटीकता के साथ प्रस्तुत करना ताकि पाठकों को भरोसेमंद और सार्थक जानकारी मिल सके.
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