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AI बनेगा पांचवीं औद्योगिक क्रांति का आधार – केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत की रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तकनीक के लोकतंत्रीकरण के दृष्टिकोण को दिखाती है. उन्होंने कहा कि कई देशों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता संसाधन कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित हैं, जबकि भारत ने इसे व्यापक जनसमूह तक पहुंचाने का प्रयास किया है.

Author Written By: Kumar Gaurav Updated: Feb 17, 2026 21:26

नई दिल्ली में चल रहे एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दूसरे दिन केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्षमता को लेकर बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा 38 हजार ग्राफिक्स प्रसंस्करण इकाइयों के अतिरिक्त अगले कुछ सप्ताह में 20 हजार और इकाइयां जोड़ी जाएंगी. यह कदम आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा. मंत्री ने कहा कि यह भारत की एआई रणनीति का अगला चरण है, जिसमें संगणन क्षमता के विस्तार के साथ जिम्मेदार उपयोग पर विशेष जोर रहेगा. उनका कहना था कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लाभ केवल चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों में व्यापक रूप से पहुंचे, ताकि आम नागरिक को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके.

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत की रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तकनीक के लोकतंत्रीकरण के दृष्टिकोण को दिखाती है. उन्होंने कहा कि कई देशों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता संसाधन कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित हैं, जबकि भारत ने इसे व्यापक जनसमूह तक पहुंचाने का प्रयास किया है.

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शिखर सम्मेलन में वैश्विक भागीदारी को रेखांकित करते हुए मंत्री ने बताया कि शीर्ष प्रौद्योगिकी कंपनियों के अधिकारी विभिन्न सत्रों में भाग ले रहे . उन्होंने अनुमान जताया कि अगले दो वर्षों में 200 अरब डॉलर से अधिक का निवेश भारत में आ सकता है. उद्यम पूंजी निवेशक गहन प्रौद्योगिकी आधारित नवप्रवर्तन कंपनियों में निवेश के लिए प्रतिबद्ध हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ढांचे की विभिन्न परतों में बड़े समाधान विकसित किए जा रहे हैं.

कौशल विकास को लेकर मंत्री ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र भारत की प्रमुख ताकत है और तकनीकी बदलाव को उद्योग, शिक्षाविदों और सरकार के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है. मौजूदा कार्यबल को नए कौशल सिखाने, नई प्रतिभा तैयार करने और भविष्य की पीढ़ी को उभरती तकनीकों के अनुरूप बनाने पर समानांतर रूप से काम हो रहा है.

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ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की स्थिति को मजबूत बताते हुए उन्होंने कहा कि देश की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता का लगभग 51 प्रतिशत हिस्सा स्वच्छ स्रोतों से आता है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता डाटा केंद्रों के लिए बड़ा लाभ है. साथ ही ऊर्जा और जल खपत को कम करने के लिए अनुसंधान जारी है, जिससे आधारभूत संरचना को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके.

स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल के बारे में मंत्री ने कहा कि कई भारतीय मॉडल वैश्विक मानकों पर परखे गए हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रणालियों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि वैश्विक आकलन में भारत को शीर्ष तीन कृत्रिम बुद्धिमत्ता देशों में स्थान दिया गया है.

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संभावित दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए मंत्री ने तकनीकी और विधिक ढांचे के समन्वय की आवश्यकता बताई. भारत का कृत्रिम बुद्धिमत्ता सुरक्षा संस्थान विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर ऐसे समाधान विकसित कर रहा है, जो दुरुपयोग की आशंका को कम कर सकें.

मंत्री ने कहा कि एआई पांचवीं औद्योगिक क्रांति का आधार बन रही है और यह अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र को प्रभावित करेगी. स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता और सुलभ बनाने से लेकर शिक्षा में व्यक्तिगत सीखने की व्यवस्था तक, इसके व्यापक प्रभाव दिखाई दे रहे हैं.

First published on: Feb 17, 2026 09:15 PM

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