भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ और ट्रेड डील को लेकर खींचतान जारी है. इस बीच अमेरिका की तरफ से ऐसा बयान आया है जो बेहद अटपटा है. अमेरिका ने ट्रेड डील पूरी ना होने का जिम्मेदार भारत को ठहरा दिया. उसका आरोप है कि पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोई कॉल नहीं किया, जिसकी वजह से ट्रेड डील नहीं हो पाई. भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के इस दावे का मुंहतोड़ जवाब दिया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि मोदी और ट्रंप के बीच 2025 में 8 बार फोन पर बात हुई है. आइए अब समझते हैं कि दो देशों के बीच पर फोन पर कैसे बात होती है और इसका प्रोटोकॉल क्या है?
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कैसे होती है फोन पर बात ?
अगर राष्ट्रपति ट्रंप पीएम मोदी से फोन पर बात करना चाहते हैं, तो इसकी जानकारी व्हाइट हाउस अमेरिका में मौजूद भारतीय दूतावास को देता है. इंडियन एंबेसी ये मैसेज दिल्ली में विदेश मंत्रालय को ट्रांसफर करती है. उसके बाद MEA प्रधानमंत्री ऑफिस से बात करता है. इसके बाद दोनों देशों के नेताओं की सुविधा के मुताबिक तारीख और समय तय किया जाता है.
किन बातों का रखा जाता है ध्यान?
जानकारी के मुताबिक ये कॉल एन्क्रिपेटेड होती है. ये आम कॉल की तरह नहीं होती, इसमें गोपनीयता और सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाता है. दोनों देशों के नेताओं की बातचीत के दौरान और भी अधिकारी मौजूद होते हैं, जो नोट्स बनाते हैं. ये जरूरी नहीं है कि हमेशा बातचीत के लिए पूरा प्रोटोकॉल फॉलो किया जाए. कभी-कभी इमरजेंसी के वक्त राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA), विशेष दूत या उनके जैसे अधिकारी डायरेक्ट आपस में बात करके जल्दी से कॉल शेड्यूल करवा सकते हैं. इस बातचीत में भाषा भी अहम रोल निभाती है. कई बार ट्रांसलेटर की भी मदद ली जाती है ताकि बातचीत में किसी तरह की बाधा ना आए.
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