Cash for Query Case: पहले भी हुआ था एक कांड, 11 लोकसभा सदस्यों पर गिरी थी Ethics Committee की गाज

Mahua Moitra Cash For Query: महुआ मोइत्रा विवाद ने उस कैश फॉर क्वेरी केस की याद दिला दी, जो 18 साल पहले हुआ था और जिसने 11 सांसदों की लोकसभा-राज्यसभा सदस्यता रद्द करा दी थी। जानिए क्या हुआ था…

Mahua Moitra

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2005 Cash For Query Case: कैश फॉर क्वेरी केस में एक्शन लेते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने आज Mahua Moitra की लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी। उन पर एक बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी ने पैसे लेकर सवाल पूछने का आरोप लगाया और लोकसभा स्पीकर को शिकायत दी। शिकायत Ethics Committee के पास पहुंची और कमेटी ने आज लोकसभा में अपनी जांच रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट के आधार पर एक्शन लिया गया और Mahua Moitra को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया। इस मामले में काफी बवाल हुआ। Mahua Moitra ने एथिक्स कमेटी पर दुर्व्यवहार के आरोप तक लगाए, लेकिन इस पूरे विवाद ने उस कैश फॉर क्वेरी केस की याद दिला दी, जो 18 साल पहले हुआ था और जिसने 11 सांसदों की लोकसभा-राज्यसभा सदस्यता रद्द करा दी थी। जानिए क्या हुआ था…

 

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एक वेब पोर्टल ने किया था स्टिंग ऑपरेशन

2005 के कैश फॉर क्वेरी केस ने न सिर्फ 11 सांसदों की सदस्यता रद्द हुई थी, बल्कि उन्हें क्रिमिनल केस का सामना भी करना पड़ा था। उस समय केंद्र में कांग्रेस नेता डॉक्टर मनमोहन सिंह की UPA सरकार थी। 12 दिसंबर 2005 को एक निजी चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन में सांसदों को सवाल पूछने के बदले पैसे लेते हुए दिखाया। कुछ पत्रकारों ने प्लानिंग के तहत फर्जी संस्था बनाकर सांसदों से मुलाकात की और संस्था की ओर सवाल पूछने का ऑफर सांसदों को दिया। सांसदों ने सवाल पूछने के बदले पैसे मांगे और पत्रकारों ने उन्हें पैसे लेते हुए अपने कैमरे में कैद कर लिया। सबसे कम 15 हजार रुपये भाजपा के छत्रपाल सिंह लोढ़ा को ऑफर हुए थे। सबसे ज्यादा एक लाख 10 हजार रुपये RJD सांसद मनोज कुमार को ऑफर हुए थे।

 

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स्टिंग करने वाले पत्रकारों पर दर्ज हुआ था केस

24 दिसंबर 2005 को एथिक्स कमेटी ने रिपोर्ट पेश की। उसी दिन संसद में वोटिंग कराई गई। प्रणब मुखर्जी ने निष्कासन का प्रस्ताव रखा था। राज्यसभा ने पूर्व PM मनमोहन सिंह ने एक सांसद को निष्कासित करने का प्रस्ताव रखा। वोटिंग के बाद भाजपा ने वाकॅआउट किया। विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि सांसद बेशक भ्रष्टाचारी हैं, लेकिन निष्कासन बहुत कठोर सजा है। निष्कासन का विवाद सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, जिसका फैसला जनवरी 2007 में आया। सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों के निष्कासन को सही ठहराया। 2007 में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को इस मामले में केस दर्ज का आदेश दिया। स्टिंग ऑपरेशन करने वाले 2 पत्रकारों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था।

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6 भाजपा, 3 बसपा, 2 कांग्रेस सांसद हुए निष्कासित

  • वाई जी महाजन (BJP)
  • छत्रपाल सिंह लोढ़ा (BJP)
  • अन्ना साहेब एमके पाटिल (BJP)
  • मनोज कुमार (RJD)
  • चंद्र प्रताप सिंह (BJP)
  • राम सेवक सिंह (कांग्रेस)
  • नरेंद्र कुमार कुशवाहा (BSP)
  • प्रदीप गांधी (BJP)
  • सुरेश चंदेल (BJP)
  • लाल चंद्र कोल (BSP)
  • राजा राम पाल (BSP)

(Alprazolam)

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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