Nashik Kumbh Mela: नासिक में होने वाले कुंभ मेले की तैयारियां राज्य सरकार जोर शोर से कर रही है. 31 अक्टूबर, 2026 को झंडा फहराने के साथ कुंभ पर्व शुरू होगा. इस कुंभ मेले के लिए पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव है. इस पर शिवसेना UBT के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने पार्टी के मुखपत्र सामना के रोक ठोक के जरिए ने सरकार की आलोचना की है. सामना में लिखा गया है कि कुंभ मेले के साधुग्राम के लिए दो हजार से ज्यादा पेड़ काटे जा रहे हैं. सड़क चौड़ी करने के नाम पर स्थानीय भूमिपुत्रों के घरों और दुकानों पर बुलडोजर चलाए गए. रोकठोक में आलोचना करते हुए कहा गया कि इसमें श्री राम की दया, सच्चाई और धैर्य कहीं नहीं दिखता.
नासिक कुंभ मेले का 25000 करोड़ का बजट
शिवसेना के मुखपत्र सामना के रोकठोक में नासिक कुंभ मेले की आलोचना की गई. यह विवाद तीन मुख्य मुद्दों से रंगा हुआ है: 25 हजार करोड़ रुपये का बजट, साधुग्राम के लिए पेड़ों की संभावित कटाई और स्थानीय भूमिपुत्रों के घरों पर बुलडोजर चलना. महाराष्ट्र सरकार ने नासिक कुंभ मेले के लिए 25,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट मंजूर किया है. नासिक कुंभ मेले के लिए मंजूर किया गया यह सारा पैसा आखिर में महाराष्ट्र के लोकल लोगों के बजाय गुजरात के कॉन्ट्रैक्टरों को जाएगा. सामना से दावा किया गया है कि प्रयागराज में भी गुजरात के कॉन्ट्रैक्टरों को ही काम मिला है.
कितना था प्रयागराज कुंभ मेले का बजट?
महाराष्ट्र सरकार ने नासिक कुंभ मेले के लिए 25,000 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है. प्रयागराज कुंभ मेले का बजट 20,000 करोड़ रुपये था. यह सड़क, साफ-सफाई, नदी में नाव, सिक्योरिटी, साधुओं के इंतज़ाम और भक्तों के इंतज़ाम पर खर्च होता है. प्रयागराज में इन सभी कामों के कॉन्ट्रैक्ट गुजरात के लोगों को दिए गए थे. उत्तर प्रदेश एडमिनिस्ट्रेशन पर दबाव था कि ये कॉन्ट्रैक्ट गुजरात के लोगों को ही दिए जाएं. अब नासिक कुंभ मेले के सूत्रधार मंत्री गिरीश महाजन हैं. कुंभ मेले के 25,000 करोड़ रुपये उनकी जेब में हैं. फिलहाल, नासिक में भी गुजरात के कॉन्ट्रैक्टरों की गतिविधियां बढ़ गई हैं. इसका मतलब है कि नासिक कुंभ मेले के ज़्यादातर कॉन्ट्रैक्ट गुजरात के लोगों को दिए जाएंगे. महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन और उनके लोग इन कॉन्ट्रैक्ट से बहुत बड़ा हिस्सा वसूलेंगे. सामना में आरोप लगाया गया है कि नासिक में कुंभ मेले का बजट महाराष्ट्र सरकार का है, लेकिन यह सारा पैसा आखिर में गुजरात के कॉन्ट्रैक्टर ले जाएंगे.
काटे जाएंगे 2000 पेड़
कुंभ मेले की तैयारी के लिए नासिक के तपोवन इलाके में दो हजार पेड़ काटे जाने वाले हैं. इन पेड़ों को काटकर वहां साधुग्राम बनाने का प्लान है. पर्यावरणविद इन पेड़ों को काटने का विरोध कर रहे हैं. कुंभ मेला आएगा और जाएगा. साधु आएंगे और जाएंगे. इसके लिए नासिक को इतना उजाड़ क्यों किया जा रहा है? यह सवाल भी सामना में उठाया गया है.
नासिक-त्र्यंबकेश्वर रोड को चौड़ा करने का काम शुरू
चौड़ीकरण के नाम पर इस सरकार ने नासिक-त्र्यंबकेश्वर रोड को चौड़ा करने का काम शुरू किया है. रोड डिवाइडर से दोनों तरफ 50 मीटर चौड़ा किया जाएगा. इस फैलाव में पिंपलगांव, बहुला, बेलगांव धागा, महिरावणी, तलेगांव, अंजनेरी, खंबाले, पेगलवाड़ी जैसे गांवों के लोगों के घर और बिजनेस तबाह हो रहे हैं. सिंहस्थ कुंभ मेला नासिक के लोगों के लिए एक संकट बन गया है. नासिक के आम लोगों को इस तरह से बेबस और बेरोजगार बनाकर कुंभ मेले का कौन सा धार्मिक मकसद पूरा होगा?










