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दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखेंगी भारत की ‘नई आंखें’, पाक-ड्रैगन नहीं चल पाएंगे नापाक चाल, ISRO रचने जा रहा इतिहास

ISRO PSLV C62 Mission Launch: आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन- इसरो (ISRO) इतिहास रचने जा रहा है.  सुबह 10.17 बजे सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC), श्रीहरिकोटा से PSLV-C62 रॉकेट लॉन्च किया जाएगा. इसमें क्या खास है, पढ़िए इस रिपोर्ट में.

Author Written By: Varsha Sikri Updated: Jan 12, 2026 08:59
ISRO PSLV C62 Mission Launch
Credit: Social Media

चीन और पाकिस्तान के एक बार फिर पसीने छूटने वाले हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन- इसरो (ISRO) एक ऐसा रॉकेट लॉन्च करने वाला है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में होगी. 12 जनवरी को सुबह 10.17 बजे सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC), श्रीहरिकोटा से PSLV-C62 रॉकेट लॉन्च किया जाएगा, जिसे भारत की दिव्य दृष्टि कहा गया है. ये 2026 की पहली रॉकेट लॉन्चिंग होगी. इसके साथ ही भारत अंतरिक्ष में सैटेलाइट रिफ्यूलिंग तकनीक हासिल करने वाला दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा. इस तकनीक पर चीन ने सबसे पहले सफलता हासिल की थी. यूरोप और अमेरिका जैसे देश भी अभी इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाए हैं, लेकिन भारत ने ये कर दिखाया. आज PSLV-C62 रॉकेट अपनी 64वीं उड़ान भरेगा.

14 सैटेलाइट्स भी होंगे लॉन्च

14 सैटेलाइट्स भी होंगे लॉन्च

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भारत की दिव्य दृष्टि कहे जाने वाले PSLV-C62 रॉकेट को थाईलैंड और ब्रिटेन की मिलीजुली टेक्नोलिजी से बनाया गया है. PSLV-C62 रॉकेट के अलावा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के जरिए 14 सैटेलाइट और लॉन्च किए जाएंगे. इस पूरे मिशन में 2 घंटे का वक्त लगेगा. ये मिशन सन सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSO) में सैटेलाइट्स को तैनात करेगा. इस मिशन में अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (EOS-N1) अन्वेषा काफी अहम है, जिसे करीब 600 किलोमीटर ऊपर पोलर सन-सिंक्रोनस पोलर आर्बिट (SSO) में स्थापित किया जाएगा. इसके अलावा और बाकी 14 उपग्रह रखे जाएंगे. एक KID कैप्सूल को री-एंट्री ट्रैजेक्टरी में भेजा जाएगा. इस पूरे मिशन का लाइव टेलीकास्ट ISRO के यूट्यूब चैनल पर सुबह 9.48 बजे किया जाएगा.

लॉन्च से पहले तिरुपति में की पूजा-अर्चना

मिशन का काउंटडाउन 11 जनवरी को दोपहर 12.18 बजे शुरू हो चुका है. इसरो चेयरमैन वी. नारायणन ने परंपरा को बनाए रखते हुए लॉन्च से पहले तिरुपति मंदिर में पूजा-अर्चना की. दरअसल पिछले साल मई में PSLV मिशन फेल हो गया था, जिसके बाद इसरो आज होने वाले लॉन्च को कमबैक के तौर पर देख रहा है. बेंगलुरु की स्टार्टअप ऑर्बिटएड का 25 किलोग्राम वजनी आयुलसैट इस मिशन का अहम किरदार है. ये सैटेलाइट PSLV-C62 के लॉन्च के चार घंटे के भीतर अंतरिक्ष में पहली बार इंटरनल रीफ्यूलिंग करेगा. आने वाले समय में ये अलग-अलग स्पेसक्राफ्ट के बीच फ्यूल ट्रांसफर के तरीके ढूंढेगा.

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अन्वेषा सैटेलाइट क्यों है खास?

अन्वेषा एड्वांस इमेजिंग क्षमताओं से लैस एक स्पाई सैटेलाइट है. ये धरती से कई सौ किलोमीटर ऊपर होने के बावजूद भी दुश्मन के ठिकानों की साफ इमेज क्लिक कर सकती है. ये भारत की सुरक्षा में काफी अहम कड़ी साबित होगी. अन्वेषा सैटेलाइट हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग (HRS) के जरिए रोशनी के ज्यादा स्पेक्ट्रम का पता लगाती है. ये किसी भी चीज को उसकी चमक से पहचान लेती है. अन्वेषा बारीक से बारीक कलर डिटेक्ट कर लेती है.

First published on: Jan 12, 2026 08:10 AM

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