साइकिल चलाने वाला चांद पर कैसे पहुंचा? ISRO चीफ ने अपनी आत्मकथा में खोले निजी जिंदगी के राज

ISRO Chief Autobiography: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष S. सोमनाथ ने देश के युवाओं के लिए आत्मकथा लिखी है, जिसमें उनकी जिंदगी से जुड़े राज लिखे हैं।

ISRO Chief S. Somnath

ISRO Chief S. Somnath

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ISRO Chief S. Somnath Autobiography: देश को चांद पर पहुंचाने वाले शख्स के नाम से सभी वाकिफ हैं, लेकिन क्या आप उनके बारे में, उनकी निजी जिंदगी के बारे में जानते हैं? शायद नहीं, लेकिन अब जान जाएंगे। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष S. सोमनाथ पूरी दुनिया में एक जाना पहचाना नाम है। इस शख्स ने करोड़ों-अरबों के प्रोजेक्ट चंद्रयान को सफल बनाकर इतिहास में देश का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखवाया है, जबकि वे कभी खुद टूटे फूटे मकान में रहते थे। कॉलेज तक जाने के लिए जेब में पैसे तक नहीं होते थे, इन बातों का खुलासा उन्होंने अपनी आत्मकथा में किया है, जो जल्दी ही लोगों को पढ़ने के लिए मिलेगी। उन्होंने आत्मकथा लिखी, ताकि नौजवान उनके जीवन से प्रेरणा ले सकें।

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नौजवानों को प्रेरित करने को लिखी आत्मकथा

इसरो चीफ ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी कई बातें आत्मकथा में लिखी हैं। वे बातें, जिनके बारे में अब तक उनके अलावा कोई नहीं जानता। उनके दिल के करीब उन 4 लोगों का जिक्र भी है, जिन्होंने उन्हें इसरो चीफ बनाया। आत्मकथा मलयालम में लिखी गई है, जिसका नाम है ‘निलावु कुदिचा सिम्हांगल’, जो इसरो चीफ के संघर्षों, हिम्मत और जज्बे की कहानी है कि कैसे एक छोटे से गांव में, टूटे फूटे घर में तंगहाली में जीवन बिताने वाला शख्स पहले इंजीनियर, फिर इसरो चीफ और चंद्रयान प्रोजेक्ट का इंचार्ज बन दुनियाभर में कामयाब हुआ। चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता ने उन्हें आत्मकथा लिखने के लिए प्रेरित किया, ताकि नौजवानों को उनके जीवन से प्रेरणा मिले और वे भी एक मुकाम पर पहुंचकर देशसेवा में अपना योगदान दे सकें।

4 करीबी लोगों का आत्मकथा में खास जिक्र

केरल में लिपि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इसरो चीफ की आत्मकथा नवंबर में रिलीज होगी और उसके बाद मार्केट में बिक्री के लिए उपलब्ध होगी। ISRO चीफ ने इसमें लिखा कि एक समय ऐसा था, जब रहने के लिए उनके पास ढंग का मकान नहीं था। वे हॉस्टल की फीस और दूसरे खर्चे जुटाने के लिए बस की बजाय खटारा साइकिल से कॉलेज आया-जाया करते थे। PTI को दिए इंटरव्यू में सोमनाथ ने बताया कि उनकी आत्मकथा वास्तव में एक साधारण से युवक की कहानी है, जो गांव में रहता था। जिसे रास्ता दिखाने वाला नहीं था। भला हो एक शख्स जिसने इंजीनियरिंग कोर्स का फार्म लाकर दे दिया, जिसे उन्होंने भर दिया और किस्मत से दाखिला भी मिल गया। इसरो चीफ के करीबी 4 लोगों का जिक्र इस आत्मकथा में किया गया है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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