भारत की अगली जनगणना का इंतजार अब खत्म होने वाला है. केंद्र सरकार ने इसके लिए तारीखों का औपचारिक ऐलान कर दिया है. यह जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है, क्योंकि यह न केवल पूरी तरह डिजिटल होगी, बल्कि आजादी के बाद पहली बार इसमें जातिगत आंकड़े भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज किए जाएंगे. हर 10 साल पर जनगणना की जाती है. 2021 में होने वाली जनगणना को कोरोना महामारी की वजह से स्थगित कर दिया गया था. इस बार जनगणना दो चरणों में होगी.
दो चरणों में प्रक्रिया
पहला चरण (अप्रैल से सितंबर 2026): इसे ‘हाउस लिस्टिंग’ कहा जाता है. इसमें देशभर के मकानों, दुकानों और इमारतों की गिनती होगी.
दूसरा चरण (फरवरी 2027): इस चरण में ‘जनसंख्या गणना’ की जाएगी, जिसमें हर व्यक्ति की निजी जानकारी ली जाएगी.
घर बैठे खुद भी दे सकेंगे जानकारी
इस बार सरकार ने नागरिकों को ‘स्व-गणना’ की सुविधा दी है. घर-घर सर्वे शुरू होने से 15 दिन पहले एक ऑनलाइन पोर्टल खोला जाएगा. लोग खुद मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए अपने परिवार की जानकारी भर सकेंगे. इसके बाद, अगले 30 दिनों में गणनाकर्मी घर-घर आकर बाकी की जानकारी डिजिटल तरीके से मोबाइल ऐप में दर्ज करेंगे.
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95 साल बाद होगी व्यापक जातिगत गणना
आजादी के बाद यह पहली बार है जब जनगणना में जाति से जुड़े आंकड़े भी जुटाए जाएंगे. इससे पहले 1931 में अंग्रेजों के शासनकाल में आखिरी बार जातिगत गणना हुई थी. पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ने पिछले साल ही इस पर मुहर लगा दी थी. यह सारा डेटा एंड्रॉइड और आईओएस ऐप के जरिए सुरक्षित सर्वर पर अपलोड होगा, जिससे त्रुटियों की संभावना कम होगी.
किन चीजों का रखा जाएगा रिकॉर्ड?
पहले चरण में गणनाकर्मी यह देखेंगे कि मकान कच्चा है या पक्का. साथ ही घर में बिजली, पीने का पानी, शौचालय, और खाना पकाने के ईंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं का रिकॉर्ड लिया जाएगा. इसके अलावा, लोगों के जीवन स्तर को समझने के लिए घर में मौजूद स्मार्टफोन, इंटरनेट, टीवी, फ्रिज और वाहनों की जानकारी भी जुटाई जाएगी.
देशभर में करीब 30 लाख कर्मचारियों को इस काम के लिए लगाया जाएगा. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी लगभग 121 करोड़ थी, जिसके अब काफी बढ़ने का अनुमान है.










