हिंदी न्यूज़/देश/बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जीवनभर नहीं लेंगे दक्षिणा, अखिलेश यादव की बात पर रखीं 2 शर्तें
देश
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जीवनभर नहीं लेंगे दक्षिणा, अखिलेश यादव की बात पर रखीं 2 शर्तें
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने जीवनभर दक्षिणा न लेने के लिए दो शर्तें रखीं हैं। पूरा मामला अखिलेश यादव की बात से शुरू हुआ था। पढ़िए पूरी बात।
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री दक्षिणा ने लेने के लिए बताईं दो शर्तें।
Share :
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक इंटरव्यू में बड़ा दावा किया है। उन्होंने जीवनभर दक्षिणा न लेने की सौगंध खाई है। इसके लिए उन्होंने 2 शर्तें रखीं हैं। शास्त्री ने कहा कि पूरे देश से कोई व्यक्ति हमारे कैंसर हॉस्पिटल का खर्चा और अन्नपूर्णा भंडारा संभाल लें तो वह जीवनभर दक्षिणा नहीं लेंगे। पूरा मामला सपा नेता अखिलेश यादव की बात से शुरू हुआ। इंटरव्यू में शास्त्री से कहा गया कि अखिलेश यादव ने कहा था कि अगर बाबा बागेश्वर की कथा करानी है तो 50 लाख रुपये खर्च करने होंगे। गरीब आदमी की तो हैसियत ही नहीं उनकी कथा कराने की। इसी बात पर धीरेंद्र शास्त्री ने दावा ठोका।
'हमारे पिता मुख्यमंत्री नहीं थे'
बागेश्वर के बाबा ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारे पिता कोई मुख्यमंत्री तो थे नहीं। अन्नपूर्णा भंडारे की व्यवस्था चलानी है तो दक्षिता तो लगेगी। कहा कि कोई श्रद्धापूर्वक दे जाता है तो मना नहीं करते हैं। कहा कि यदि पूरे भारत में कोई इतना अमीर दिल का हो, जिसका जमीर जागे। हमारे कैंसर हॉस्पिटल और अन्नपूर्णा की सेवा का संकल्प ले ले और करने को तैयार तो ताल ठोक कर हनुमान जी की कसम खाकर कहते हैं कि जब तक जिएंगें एक रुपया अपनी जेब में नहीं लेंगे। उसको (जो सकंल्प लेगा) ही देंगे। बस ये शर्त वो पूरी कर दे हमें कोई अपेक्षा नहीं है।
धीरेंद्र शास्त्री ने अखिलेश की बात पर तंज कसते हुए कहा कि दक्षिणा हम लेते हैं इसमें कोई संदेह नहीं, पर जितनी उन्होंने (अखिलेश यादव) कही है उतनी अभी तक नहीं मिली। इसके बाद कहा कि (उनको) अखिलेश यादव से निवेदन करवाना चाहते हैं कि अगर उनकी श्रद्धा जगे तो हमारी कथा कराएं। उनके गांव या जहां वो कहेंगे, हम आएंगे। टेंट भी अपना लाएंगे, साउंड भी अपना लाएंगे। बस जजमान उनको बनना पड़ेगा। 1 रुपये दक्षिणा नहीं लेंगे और कथा सुनाकर जाएंगे।
दक्षिणा को बताया मजबूरी
इंटरव्यू में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि दक्षिणा लेना उनकी मजबूरी है। पहली कैंसर हॉस्पिटल और दूसरी मजबूरी अन्नपूर्णा भंडारा है। कहा कि हमारा क्षेत्र बहुत पिछड़ा है। वहां बहुत गरीबी है, लोग आस्था के नामपर धर्मातंरण करते हैं। तो हम चाहते हैं कि मंदिर बनाकर नहीं जीते जी अस्पताल बनाकर मरें।
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक इंटरव्यू में बड़ा दावा किया है। उन्होंने जीवनभर दक्षिणा न लेने की सौगंध खाई है। इसके लिए उन्होंने 2 शर्तें रखीं हैं। शास्त्री ने कहा कि पूरे देश से कोई व्यक्ति हमारे कैंसर हॉस्पिटल का खर्चा और अन्नपूर्णा भंडारा संभाल लें तो वह जीवनभर दक्षिणा नहीं लेंगे। पूरा मामला सपा नेता अखिलेश यादव की बात से शुरू हुआ। इंटरव्यू में शास्त्री से कहा गया कि अखिलेश यादव ने कहा था कि अगर बाबा बागेश्वर की कथा करानी है तो 50 लाख रुपये खर्च करने होंगे। गरीब आदमी की तो हैसियत ही नहीं उनकी कथा कराने की। इसी बात पर धीरेंद्र शास्त्री ने दावा ठोका।
---विज्ञापन---
‘हमारे पिता मुख्यमंत्री नहीं थे’
बागेश्वर के बाबा ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि हमारे पिता कोई मुख्यमंत्री तो थे नहीं। अन्नपूर्णा भंडारे की व्यवस्था चलानी है तो दक्षिता तो लगेगी। कहा कि कोई श्रद्धापूर्वक दे जाता है तो मना नहीं करते हैं। कहा कि यदि पूरे भारत में कोई इतना अमीर दिल का हो, जिसका जमीर जागे। हमारे कैंसर हॉस्पिटल और अन्नपूर्णा की सेवा का संकल्प ले ले और करने को तैयार तो ताल ठोक कर हनुमान जी की कसम खाकर कहते हैं कि जब तक जिएंगें एक रुपया अपनी जेब में नहीं लेंगे। उसको (जो सकंल्प लेगा) ही देंगे। बस ये शर्त वो पूरी कर दे हमें कोई अपेक्षा नहीं है।
धीरेंद्र शास्त्री ने अखिलेश की बात पर तंज कसते हुए कहा कि दक्षिणा हम लेते हैं इसमें कोई संदेह नहीं, पर जितनी उन्होंने (अखिलेश यादव) कही है उतनी अभी तक नहीं मिली। इसके बाद कहा कि (उनको) अखिलेश यादव से निवेदन करवाना चाहते हैं कि अगर उनकी श्रद्धा जगे तो हमारी कथा कराएं। उनके गांव या जहां वो कहेंगे, हम आएंगे। टेंट भी अपना लाएंगे, साउंड भी अपना लाएंगे। बस जजमान उनको बनना पड़ेगा। 1 रुपये दक्षिणा नहीं लेंगे और कथा सुनाकर जाएंगे।
दक्षिणा को बताया मजबूरी
इंटरव्यू में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि दक्षिणा लेना उनकी मजबूरी है। पहली कैंसर हॉस्पिटल और दूसरी मजबूरी अन्नपूर्णा भंडारा है। कहा कि हमारा क्षेत्र बहुत पिछड़ा है। वहां बहुत गरीबी है, लोग आस्था के नामपर धर्मातंरण करते हैं। तो हम चाहते हैं कि मंदिर बनाकर नहीं जीते जी अस्पताल बनाकर मरें।