Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

देश

CJI ने चुनाव निकाय नियुक्तियों के मामले से खुद को किया अलग, सामने आई ये वजह

मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन निर्देश दिया था. इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश शामिल होने थे.

Author
Written By: Akarsh Shukla Updated: Mar 20, 2026 17:52

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक सीजेआई ने हितों के टकराव की आशंका जताते हुए यह फैसला लिया, जो चुनाव प्रक्रिया की स्वतंत्रता पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं से संबंधित है. यह घटनाक्रम शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में घटा, जब जया ठाकुर बनाम भारत संघ (यूनियन ऑफ इंडिया) मामले की सुनवाई होनी थी.

क्या है पूरा विवाद?


मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन निर्देश दिया था. इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश शामिल होने थे. इस फैसले का मकसद चुनाव आयोग को सरकार के दबाव से मुक्त रखना था. लेकिन उसी साल बाद में केंद्र सरकार ने नया कानून लाकर मुख्य न्यायाधीश को इस समिति से हटा दिया. उनकी जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्रिमंडल मंत्री को शामिल किया गया.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: खाना मंगाना हुआ महंगा, Zomato ने बढ़ाई फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म की फीस

विपक्ष ने उठाया था सवाल


इस फैसले का विरोध करते हुए विपक्ष और कई संगठनों ने इसे सरकार के पक्ष में झुकाव वाला कदम बताया, क्योंकि इससे कार्यपालिका का वर्चस्व बढ़ जाता है. इसी नए कानून को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं. याचिका में दलील दी गई है कि मुख्य न्यायाधीश को बाहर रखना संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है और इससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता खतरे में पड़ सकती है. शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ज्योमल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पांचोली की बेंच के समक्ष सूचीबद्ध थी.

---विज्ञापन---

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?


सुनवाई शुरू होते ही चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बेंच में अपनी मौजूदगी पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, ‘क्या मुझे इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए? हो सकता है कि कल कोई मुझ पर हितों के टकराव का आरोप लगा दे.’ याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने भले ही कहा कि कोई ऐसा आरोप नहीं लगाएगा, लेकिन सुझाव दिया कि बेहतर होगा अगर मामला ऐसी बेंच के समक्ष रखा जाए जिसमें भावी मुख्य न्यायाधीश न हों.

यह भी पढ़ें: केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को मिली जान से मारने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां हुईं अलर्ट

चीफ जस्टिस ने इस सुझाव को स्वीकार कर लिया और स्पष्ट किया कि हितों के संभावित टकराव से बचने के लिए वे खुद को अलग कर रहे हैं. उन्होंने निर्देश दिया कि याचिकाओं को ऐसी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए जिसमें कोई भावी सीजेआई न हो. इस निर्देश पर प्रशांत भूषण ने भी सहमति जताई. इस मामले की सुनवाई 7 अप्रैल को नई बेंच करेगी.

इनपुट: संजीव त्रिवेदी

First published on: Mar 20, 2026 05:43 PM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.