आज के समय में महिलाओं को कई प्रकार की हार्मोनल बीमारियां होती हैं, जिनमें पीसीओएस और पीसीओडी शामिल है। इन बीमारियों की वजह से महिलाएं कई समस्याओं से जूझती हैं, जिनमें इंफर्टिलिटी भी शामिल है। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) एक कॉमन हार्मोनल डिसऑर्डर है जो रिप्रोडक्टिव एज ग्रुप की महिलाओं को प्रभावित करता है। यह अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, मुंहासे, अत्यधिक बालों का बढ़ना और इंफर्टिलिटी का कारण बन सकता है। PCOS का निदान करने के लिए डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री, फिजिकल टेस्ट और कुछ स्पेशल जांचों का उपयोग करते हैं। इन जांचों से हार्मोनल इंबैलेंस, मेटाबोलिक हेल्थ और यूट्रस की कार्यक्षमता का मूल्यांकन किया जाता है। महिलाओं में प्रेग्नेंसी के बाद भी पीसीओएस के लक्षण बने रहते हैं। ऐसे में अगर ये महिलाएं प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं, तो इस गलती को कभी न करें। डॉक्टर अजय शाह बताते हैं कि पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को गर्भ धारण से पहले इन टेस्ट को जरूर करवाना चाहिए।
क्या बोले एक्सपर्ट?
मुंबई न्यूबर्ग अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर अजय शाह (Doctor.Ajay Shah) बताते हैं कि पीसीओएस हार्मोन रोग है, जो फैमिली हिस्ट्री में भी पाया जाता है। ऐसे में अगर आप फैमिली प्लानिंग कर रही हैं, तो उससे पहले कुछ टेस्ट जरूर करवा लें क्योंकि इससे आप अपनी प्रेग्नेंसी को सेफ और हेल्दी तरीके से प्लान कर सकेंगी।
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क्यों जरूरी है टेस्ट?
यह सभी टेस्ट PCOS का निदान करने और अन्य स्थितियों को अलग करने में मदद करते हैं। एक बार जब PCOS की पुष्टि हो जाती है, तो डॉक्टर लक्षणों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए उपचार करते हैं, जैसे कि जीवनशैली में बदलाव, दवाएं और हार्मोनल ट्रीटमेंट्स।
ये हैं 4 जरूरी टेस्ट
1. हार्मोनल ब्लड टेस्ट (HORMONAL BLOOD TEST)
PCOS मुख्य रूप से एक हार्मोनल प्रॉब्लम है, इसलिए डॉक्टर कई हार्मोन के लेवल्स की जांच करते हैं। इस टेस्ट की मदद से हार्मोन्स का स्तर मापा जाता है। यह जांच LH और FSH का अनुपात बताती है, जो PCOS का एक सामान्य लक्षण होता है।
2. ब्लड शुगर और इंसुलिन टेस्टिंग (BLOOD SUGAR AND INSULIN TEST)
PCOS में इंसुलिन रेजिस्टेंस आम होता है, जो डायबिटीज का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए, इन्हें फास्टिंग ब्लड शुगर (FBS) और HbA1c शुगर की जांच करवानी चाहिए। फास्टिंग इंसुलिन टेस्ट भी जरूरी शुगर की जांच है, जो इन्हें करवानी चाहिए।

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3. लिपिड प्रोफाइल (LIPID PROFILE)
PCOS का दिल की बीमारियों का रिस्क रहता है। लिपिड प्रोफाइल में ये जांचें इन्हें जरूर करवानी चाहिए।
टोटल कोलेस्ट्रॉल, LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल), HDL (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स। ये कार्डियोवास्कुलर रिस्क का मूल्यांकन करने के लिए भी जरूरी हैं।
4. पेल्विक अल्ट्रासाउंड (PELVIC ULTRASOUND)
यह अल्ट्रासाउंड महिलाओं के पेट के निचले हिस्से का होता है, जिसमें ओवेरीज और यूट्रस की संपुर्ण जांच की जाती है। यह परीक्षा महिलाओं के यूट्रस, गर्भाशय ग्रीवा (Cervix), फैलोपियन ट्यूब, और यूरिनरी ब्लैडर जैसी संरचनाओं की तस्वीरें दर्शाती हैं। एंडोमेट्रियल मोटाई, यह गर्भाशय की परत की मोटाई की जांच करता है। अनियमित पीरियड साइकिल के कारण एंडोमेट्रियल मोटी हो सकती है, जिससे एंडोमेट्रियल हाइपरप्लेशिया का खतरा बढ़ता है। कई बार इससे कैंसर का रिस्क भी बढ़ता है।
इन बातों का ख्याल रखें
PCOS पीड़ित महिलाएं कोशिश करें कि उनका वजन ज्यादा न बढ़ सके और न ज्यादा कम हो सके। शुगर नियंत्रण के लिए मीठी चीजों का सेवन कम करें। डिप्रेशन से बचने के लिए योग करें और स्ट्रेस फ्री रहें। डिलीवरी के बाद अपने पीरियड साइकिल का समय नोट करें।
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Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारी पर अमल करने से पहले विशेषज्ञों से राय अवश्य लें। News24 की ओर से जानकारी का दावा नहीं किया जा रहा है।