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Menopause in Women: मेनोपॉज क्या है? हर महिलाओं को इसका पता होना चाहिए। किसी भी महिला के जीवन में मासिक धर्म का हर महीने होना जितना जरूरी है, उतनी ही मेनोपॉज की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, अगर आप इसके बारे में नहीं जानते हैं, तो आपके लिए भी इसे जानना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि मेनोपॉज क्यों होता है? इसके लक्षण क्या हैं, किन-किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए।
महिलाएं यह बिलकुल ना सोचे की ये कोई बीमारी है बल्कि बॉडी की सामान्य एक्टिविटी है जो बढ़ती ऐज के साथ आती है। उम्र बढ़ने के साथ मेनोपॉज होना बहुत आम होता है। ये इसलिए होता है क्योंकि महिलाओं के सेक्स हार्मोन का फंक्शन बढती उम्र के साथ वीक होने लगता है।
मेनोपॉज वह स्थिति होती है, जब महिलाओं को पीरियड्स आने बंद हो जाते हैं, जिस तरह टीनऐज में पीरियड्स शुरू होने के समय हॉर्मोनल बदलाव होते हैं, उसी तरह मेनोपॉज के दौरान शरीर में बहुत तेजी से हॉर्मोन्स का लेवल बदलता है, और इसी के चलते महिलाओं को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए, बल्कि पहले से ही सारी जानकारी के साथ इस चीज को फेस करना चाहिए।
महिलाओं को अपनी सेहत से जुड़े हर पहलू के बारे में पहले से ही जागरूक रहना चाहिए। बदलती लाइफस्टाइल के कारण ज्यादातर मामलों में मेनोपॉज की उम्र घटकर 40 से 45 साल के बीच आ गई है, जिसे अर्ली मेनोपॉज कहा जाता है। जबकि कुछ साल पहले तक मेनोपॉज 50 से 55 के बीच हुआ करता था।
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कई रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि मेनोपॉज के बाद महिलाओ में हार्ट की बीमारी का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। ये सभी को पता है पीरियड्स होना एक नेचुरल प्रॉसेस है और 40 की उम्र के बाद मेनोपॉज होना भी नेचुरल ही है। अगर आपको भी लग रहा है कि मेनोपॉज आने का दिन करीब आ रहा है, तो इन शारीरिक समस्याओं को पहले से ही जान लेना ठीक रहेगा।
शरीर में अचानक बदलाव के कारण दिनभर थका हुआ महसूस कर सकती हैं। शरीर की एनर्जी काफी कम हो जाती है। थकान को दूर करने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरुरी है। और साथ ही साथ अपने आहार में Nutrients का ध्यान रखना चाहिए।
मेनोपॉज के बाद वेट बढ़ता ही है लेकिन यह जल्दी नहीं बढ़ता है। तब ये नुकसानदायक हो सकता है। मेनोपॉज के बाद वजन बढ़ना, ब्रेस्ट कैंसर, दिल की बीमारी और तनाव हो सकता है।
मेनोपॉज के बाद हॉट फ्लैश की दिक्कत हो सकती है। आपको अचानक से तापमान बढ़ना और घटनालगने जाता है। हॉट फ्लैश की समस्या मेनोपॉज के बाद 10 साल तक रह सकती है। इससे गर्दन और माथे में पसीना आता है, तनाव और दिल की धड़कन बहुत तेज हो जाती है।
मेनोपॉज के दौरान शरीर की एनर्जी बहुत कम हो जाती है। बॉडी में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन का लेवल में भी उतार-चढ़ाव होने लगता है।
Disclaimer: इस लेख में बताई गई जानकारी और सुझाव को पाठक अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। News24 की ओर से किसी जानकारी और सूचना को लेकर कोई दावा नहीं किया जा रहा है।
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