Pulkit Bhardwaj
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नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने शुक्रवार को कहा कि भारत यूक्रेन में हाल के घटनाक्रम से बहुत परेशान है और इस बात पर जोर दिया कि विवादों को सुलझाने का एकमात्र जवाब बातचीत है। भारत का यह बयान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ हुई वोटिंग में शामिल नहीं होने के बाद आया है।
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गौरतलब है कि अमेरिका और अल्बानिया ने शुक्रवार को 15 देशों की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश कर रूस के यूक्रेन में “अवैध जनमत संग्रह” और कुछ क्षेत्रों के विलय, हिंसा की तत्काल समाप्ति का आह्वान किया था। लेकिन रूस ने इस प्रस्ताव पर वीटो लगाकर इसे पारित नहीं होने दिया। इस प्रस्ताव से जुड़ी वोटिंग में भारत के अलावा चीन, गैबॉन और ब्राजील ने भी भाग नहीं लिया।
India abstains from UN vote that condemns Russia's annexation of Ukrainian regions
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— ANI Digital (@ani_digital) September 30, 2022
इसके बाद भारतीय प्रतिनिधि काम्बोज ने आग्रह किया कि हिंसा को तत्काल समाप्त करने के लिए संबंधित पक्षों द्वारा सभी प्रयास किए जाएं और साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कहा कि मतभेदों और विवादों को निपटाने का एकमात्र तरीका बातचीत ही है। उन्होंने यूएनएससी में अपने संबोधन के दौरान कहा, “मतभेदों और विवादों को निपटाने के लिए संवाद ही एकमात्र जवाब है, चाहे वह कितना भी कठिन क्यों न हो। शांति के मार्ग के लिए हमें कूटनीति के सभी मार्गों को खुला रखना होगा।”
उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध पर उच्च स्तरीय सप्ताह के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा उनके हालिया कार्यक्रमों में दिए गए बयानों पर भी प्रकाश डाला। समरकंद में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति पुतिन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह का उल्लेख करते हुए कि यह युद्ध का युग नहीं हो सकता, काम्बोज ने कहा कि भारत संघर्ष के समाधान के लिए शांति वार्ता की जल्द बहाली के लिए आशान्वित है।
संयुक्त राष्ट्र के दूत ने कहा, “इस संघर्ष की शुरुआत से ही भारत की स्थिति स्पष्ट और सुसंगत रही है। वैश्विक व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, अंतर्राष्ट्रीय कानून और सभी राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित है।” कम्बोज ने कहा, “बयानबाजी या तनाव का बढ़ना किसी के हित में नहीं है। यह महत्वपूर्ण है कि वार्ता की मेज पर वापसी के लिए रास्ते खोजे जाएं। उभरती स्थिति की समग्रता को ध्यान में रखते हुए, भारत ने इस प्रस्ताव से दूर रहने का फैसला किया है।”
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बता दें कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से यूक्रेन के चार क्षेत्रों – डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया के विलय की घोषणा की।
रूस के विलय की दुनिया भर में व्यापक आलोचना हुई। संयुक्त राज्य अमेरिका ने घोषणा की कि रूस को इसके लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि “संयुक्त राज्य अमेरिका यूक्रेन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं को बदलने के रूस के कपटपूर्ण प्रयास को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।”
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