Passwordless Login: पासवर्ड, जो सालों तक हमारी डिजिटल पहचान की पहली चाबी रहे, अब धीरे-धीरे इतिहास बनने की ओर बढ़ रहे हैं. बड़ी टेक कंपनियां मान चुकी हैं कि पासवर्ड न सिर्फ हैकिंग और फिशिंग के लिहाज से कमजोर हैं, बल्कि यूजर के अनुभव को भी खराब करते हैं. इसी वजह से अब दुनिया तेजी से पासवर्डलेस लॉगिन सिस्टम की ओर बढ़ रही है, जहां Passkey जैसी तकनीक को भविष्य का रास्ता माना जा रहा है.
पासवर्ड क्यों हो रहे हैं आउटडेटेड
आज के समय में पासवर्ड याद रखना, बार-बार बदलना और उन्हें सुरक्षित रखना अपने आप में एक झंझट बन चुका है. ऊपर से फिशिंग और डेटा लीक जैसे खतरे इसे और असुरक्षित बना देते हैं. यही कारण है कि टेक इंडस्ट्री अब ऐसे विकल्प ढूंढ रही है जो ज्यादा सुरक्षित होने के साथ-साथ इस्तेमाल में भी आसान हों.
Passkey और FIDO सिस्टम क्या है
Passkey और FIDO बेस्ड लॉगिन सिस्टम पासवर्ड की जगह आपके डिवाइस और बायोमेट्रिक पर काम करते हैं. इसमें लॉगिन के लिए पासवर्ड टाइप करने की जरूरत नहीं होती, बल्कि फिंगरप्रिंट, फेस आईडी या डिवाइस लॉक ही आपकी पहचान बन जाता है. आसान शब्दों में कहें तो आपका फोन ही आपका पासवर्ड बन जाता है.
बड़ी कंपनियां क्यों कर रही हैं इसे आगे
Google, Microsoft और कई बड़े प्लेटफॉर्म Passkey को फिशिंग-प्रूफ और ज्यादा सुरक्षित विकल्प मान चुके हैं. FIDO Alliance के मुताबिक, पिछले दो सालों में अरबों अकाउंट्स में पासकी सपोर्ट जुड़ चुका है. Google इसे भविष्य का डिफॉल्ट लॉगिन मानता है, जबकि Microsoft नए यूजर्स को बिना पासवर्ड के अकाउंट बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. यह पहली बार है जब पासवर्ड को बड़े पैमाने पर हटाने की कोशिश हो रही है.
सिक्योरिटी के मामले में क्यों बेहतर है पासकी
Passkey सिस्टम में पासवर्ड चोरी होने या अनुमान लगाए जाने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है. चूंकि लॉगिन डिवाइस और बायोमेट्रिक से जुड़ा होता है, इसलिए फिशिंग अटैक यहां काम नहीं करते. इसी वजह से सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स इसे अब तक का सबसे सुरक्षित ऑथेंटिकेशन तरीका मानते हैं.

भारत में अलग है तस्वीर
भारत जैसे देश में यह तकनीक अपनाना उतना आसान नहीं है. यहां एक ही फोन कई लोग इस्तेमाल करते हैं, फोन शेयर करना आम बात है और सिम बदलना या सेकेंड हैंड डिवाइस लेना भी सामान्य है. Passkey सिस्टम डिवाइस से गहराई से जुड़ा होता है, ऐसे में फोन खोने या खराब होने पर अकाउंट रिकवरी बड़ी समस्या बन जाती है.
रिकवरी सिस्टम सबसे बड़ी कमजोरी
अभी तक Passkey रिकवरी का कोई एक जैसा और आसान तरीका सभी प्लेटफॉर्म पर मौजूद नहीं है. कई बार यूजर अपने ही अकाउंट से बाहर हो जाते हैं. यही वजह है कि इंडस्ट्री रिपोर्ट्स और UX रिसर्च में बार-बार यह बात सामने आती है कि पासकी अपनाने में सबसे बड़ी रुकावट टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि अकाउंट रिकवरी है.
डिवाइस शेयरिंग से बढ़ती परेशानी
जब एक ही फोन पर परिवार के कई लोगों के अकाउंट लॉगिन हों, तो पासकी सिस्टम में प्राइवेसी और एक्सेस कंट्रोल संभालना मुश्किल हो जाता है. इसी कारण कई प्लेटफॉर्म मजबूरी में पुराने और कम सुरक्षित लॉगिन विकल्प भी चालू रखते हैं, जिससे पासकी का पूरा सुरक्षा फायदा कम हो जाता है.
भारत के लिए क्या जरूरी है
टेक कंपनियां मानती हैं कि पासकी भविष्य हैं, लेकिन भारत में यह भविष्य बिना तैयारी के नहीं आ सकता. जब तक ऑफलाइन बैकअप, आसान अकाउंट रिकवरी और डिवाइस लॉस जैसी स्थितियों के लिए साफ समाधान नहीं मिलते, तब तक पासवर्डलेस सिस्टम कई यूजर्स के लिए परेशानी बन सकता है.
यूजर को क्या करना चाहिए
अगर आप अपना फोन किसी के साथ शेयर नहीं करते हैं, तो Passkey का इस्तेमाल आपके लिए सुरक्षित और आसान हो सकता है. Gmail समेत कई प्लेटफॉर्म Passkey जोड़ने का विकल्प देते हैं. वहीं, अगर आप अभी भी पासवर्ड मैनेज करना चाहते हैं, तो 1Password जैसे पासवर्ड मैनेजर ऐप्स का सहारा लिया जा सकता है, हालांकि इसके लिए सब्सक्रिप्शन लेना पड़ता है.
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