Nitin Arora
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Layoffs: केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने कंपनी द्वारा जबरन नौकरी से निकाले जाने के मामले में Amazon India को बुधवार को बेंगलुरु में उप मुख्य श्रम आयुक्त के समक्ष पेश होने के लिए तलब किया है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने इस बात की जानकारी दी।
मंगलवार को जारी मंत्रालय के नोटिस के अनुसार, ‘Amazon से इस मामले में सभी प्रासंगिक रिकॉर्ड के साथ या तो व्यक्तिगत रूप से या किसी अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से पूर्वोक्त तिथि और समय पर बिना चूके कार्यालय में उपस्थित होने का अनुरोध किया गया है।’
आईटी कंपनियों के कर्मचारियों के अधिकारों के लिए काम करने वाली पुणे स्थित यूनियन NITES ने पिछले हफ्ते कहा था कि उसने एक याचिका दायर की है और केंद्र सरकार और राज्य श्रम अधिकारियों से अनैतिक और अवैध छंटनी के संबंध में जांच करने का अनुरोध किया है। अमेजन द्वारा कर्मचारियों को ईमेल के जरिए परेशान किया गया।
नवजात सूचना प्रौद्योगिकी कर्मचारी सीनेट (NITES) के अध्यक्ष हरप्रीत सिंह सलूजा ने कहा था, ‘NITES भारत में Amazon द्वारा शुरू की गई अनैतिक और अवैध छंटनी की कड़ी निंदा करता है। देश का कानून अमेजन की नीतियों से ऊपर है। औद्योगिक विवाद अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, नियोक्ता उपयुक्त सरकार की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी कर्मचारी की छंटनी नहीं कर सकता है। अमेजन के कर्मचारी जिन्होंने कम से कम एक वर्ष की निरंतर सेवा की है, उन्हें तब तक काम से नहीं हटाया जा सकता है जब तक कि उन्हें तीन महीने पहले नोटिस नहीं दिया जाता है और उपयुक्त सरकार से पूर्व अनुमति नहीं मिलती है।’
ई-कॉमर्स की दिग्गज कंपनी ने असामान्य और अनिश्चित व्यापक आर्थिक वातावरण के बीच कंपनी में कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी है और अपने कर्मचारियों की संख्या में 10,000 या 3 प्रतिशत की कटौती करने की योजना बना रही है। इसके अलावा मेटा, ट्विटर जैसी बड़ी कंपनियां भी हजारों लोगों को नौकरी से निकाल चुकी हैं।
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