Salary Structure Changes Explained: केंद्रीय बजट 2025-26 में 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय को कर-मुक्त कर दिया गया है। लेकिन, अगर आपकी कंपनी आपके सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव करती है, तो कुछ भत्तों का लाभ उठाकर इस इनकम लिमिट को 17 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। आयकर अधिनियम के अनुसार, न्यू टैक्स रिजीम के तहत कुछ अलाउंस टैक्स के दायरे से बाहर हैं। हालांकि, इसका लाभ केवल तभी उठाया जा सकता है, जब निर्धारित शर्तों को पूरा किया जाए। चलिए जानते हैं कि सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव से वित्त वर्ष 26 में आपकी लगभग 17 लाख रुपये की वार्षिक आय कैसे कर-मुक्त हो सकती है?
क्या है व्यवस्था?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स कंसल्टिंग फर्म भूटा शाह एंड कंपनी के पार्टनर हर्ष भूटा का कहना है कि नई कर व्यवस्था के तहत, आयकर अधिनियम में कुछ भत्ते हैं जो करदाताओं को अपने वेतन ढांचे को फिर से व्यवस्थित करने में मदद कर सकते हैं। अगर कुछ शर्तें पूरी की जाती हैं तो ये भत्ते यानी अलाउंस टैक्स फ्री हो सकते हैं। निम्नलिखित कुछ रिम्बर्समेंट और अलाउंस हैं, जो टैक्स बचाने में आपकी मदद करेंगे:
टेलीफोन और मोबाइल बिल: वेतनभोगी कर्मचारी अपने द्वारा भुगतान किए गए टेलीफोन और मोबाइल बिलों पर छूट का दावा कर सकता है। इसके लिए कोई लिमिट नहीं है। ET की रिपोर्ट में टैक्स कंसल्टिंग फर्म नांगिया एंडरसन एलएलपी के कार्यकारी निदेशक योगेश काले के हवाले से बताया गया है कि किसी भी टैक्स रिजीम के तहत टेलीफोन और इंटरनेट बिलों की छूट के संबंध में कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है। हालांकि, कर्मचारियों को एक उचित राशि का ही दावा करना चाहिए। उनके मुताबिक, यदि कर्मचारी अपने वेतन ढांचे में टेलीफोन, मोबाइल, इंटरनेट बिलों को शामिल करने के लिए बदलाव करते हैं, तो यह कदम उनकी टैक्स लायबिलिटी को कम कर सकता है।
ट्रांसपोर्टेशन अलाउंस: आयकर अधिनियम के तहत दिव्यांग लोगों के लिए टैक्स-फ्री ट्रांसपोर्टेशन अलाउंस का प्रावधान है। वह घर से ऑफिस और ऑफिस से घर की यात्रा पर होने वाले खर्चे का दावा कर सकते हैं। हर्ष भूटा का कहना है कि दिव्यांग कर्मचारियों को मिलने वाले परिवहन भत्ते पर 3,200 रुपये प्रति माह या 38,400 रुपये प्रति वर्ष तक छूट दी जाती है। केवल ऐसे कर्मचारी इस छूट के पात्र हैं, जो नेत्रहीन/मूक-बधिर हैं या जिनके शरीर का निचला हिस्सा काम नहीं करता।
कन्वेंस अलाउंस: यह नियोक्ता द्वारा कर्मचारियों को उनके काम के लिए प्रदान की जाने वाली सुविधा है। यह दिव्यांग कर्मचारियों को प्रदान किए जाने वाले ट्रांसपोर्टेशन अलाउंस से अलग है। हर्ष भूटा का कहना है कि कर्मचारी को मिलने वाला कन्वेंस रिम्बर्समेंट उस स्थिति में टैक्स फ्री है, यदि यह खर्चा कार्यस्थल आने-जाने के दौरान किया जाता है। कर्मचारी को रिम्बर्समेंट का दावा करने के लिए बिल जमा करना आवश्यक है।
नियोक्ता की कार लीज पॉलिसी: कार लीज़ नीति के तहत, कुछ नियोक्ता कर्मचारियों को व्यक्तिगत और आधिकारिक उपयोग के लिए कार प्रदान करते हैं। हालांकि, इसे आयकर के तहत एक अनुलाभ या पर्क्विज़िट माना जाता है, लेकिन इसकी वैल्यू बहुत कम है। योगेश काले के अनुसार, नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के व्यक्तिगत और आधिकारिक उपयोग के लिए दी गई कार की पर्क्विज़िट वैल्यू बहुत कम है। पुरानी और नई व्यवस्थाओं के तहत वैल्यूएशन मैकेनिज्म एक ही रहता है। यदि कार के इंजन की क्यूबिक कैपिसिटी 1.6 लीटर से अधिक नहीं है, तो ऐसे पर्क्विज़िट की टैक्सेबल वैल्यू 1,800 रुपये प्रति माह है। यदि कैपिसिटी 1.6 लीटर से अधिक है, तो वैल्यू 2,400 रुपये प्रति माह होगी। उन्होंने कहा कि यदि ड्राइवर भी उपलब्ध कराया जाता है तो पर्क्विज़िट वैल्यू में 900 रुपये प्रति माह अतिरिक्त जोड़े जाएंगे।
यहां पहले केस में सीटीसी यानी कॉस्ट टू कंपनी का 30 प्रतिशत मूल वेतन और दूसरे में 40 प्रतिशत मूल वेतन। इसके लिए, सैलरी स्ट्रक्चर में मोबाइल रिम्बर्समेंट, ट्रांसपोर्टेशन रिम्बर्समेंट, कन्वेंस रिम्बर्समेंट, एनपीएस निवेश और ईपीएफ निवेश शामिल होना चाहिए।
वर्तमान में, नई कर व्यवस्था के तहत, कुछ डिडक्शन का दावा किया जा सकता है। इनमें 75,000 रुपये का स्टैण्डर्ड डिडक्शन, 25,000 रुपये का फैमिली पेंशन के तहत डिडक्शन, नियोक्ता का एनपीएस योगदान 14 प्रतिशत और नियोक्ता का ईपीएफ योगदान 12 प्रतिशत शामिल है। इस सैलरी स्ट्रक्चर के अनुसार आपकी टैक्स कैलकुलेशन इस प्रकार होगी:
लिहाजा, जब वित्त वर्ष 2026 में 12 लाख रुपये तक की वार्षिक वेतन आय कर मुक्त है, तो यदि आप इस कर संरचना का पालन करते हैं तो आपका पूरा वेतन 16,64,959 रुपये कर मुक्त हो सकता है।