अर्थव्यवस्था की गाड़ी अभी भी तेज चल रही है, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है. जहां Q2 (जुलाई-सितंबर) में भारत की GDP ग्रोथ 8.4% की शानदार रफ्तार पर थी, वहीं Q3 (अक्टूबर-दिसंबर) में यह घटकर 7.8% पर आ गई है. अर्थशास्त्री और बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट पूरी तरह से सरप्राइज नहीं है. दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग में कमी का असर भारतीय निर्यात पर पड़ सकता है.
त्योहारी सीजन के बाद मांग में जो सामान्य उतार-चढ़ाव आता है, उसका असर भी GDP की गणना में दिखता है. एक्सपर्ट यह भी कहते हैं कि जब पिछली तिमाही (Q2) की तुलना बहुत ऊंचे आधार (High Base) से की जाती है, तो अगली तिमाही के प्रतिशत में मामूली गिरावट स्वाभाविक है.
आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?
क्या आपको घबराना चाहिए? बिल्कुल नहीं. 7.8% की ग्रोथ अभी भी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति में से एक है. हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अपनी मौद्रिक नीति (Monetary Policy) में इसे ध्यान में रखेगा. अगर ग्रोथ थोड़ी धीमी होती है, तो हो सकता है कि ब्याज दरों (Interest Rates) में कटौती को लेकर RBI का रुख थोड़ा लचीला हो जाए. स्टॉक मार्केट इन आंकड़ों को बहुत बारीकी से देखता है. 7.8% का आंकड़ा उम्मीदों के अनुरूप है या उससे कम, यह कल बाजार की ओपनिंग तय करेगा.
अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव एक सामान्य प्रक्रिया है. 8.4% से 7.8% पर आना कोई बड़ी गिरावट नहीं है, बल्कि एक कंसोलिडेशन का दौर है. अब नजरें चौथी तिमाही (Q4) पर होंगी कि क्या भारत अपनी इस रफ्तार को बरकरार रख पाता है या नहीं.