Nitin Arora
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मुंबई: भारतीय सीमा शुल्क प्राधिकरण ने 3 अक्टूबर को मुंबई की अदालत से 244 मिलियन डॉलर की कर मांग से संबंधित कार्यवाही को रोकने के लिए पर्नोड रिकार्ड (Pernod Ricard) की मांग को रद्द करने के लिए कहा है। इसमें फ्रांसीसी स्पिरिट जायंट (French spirit giant) को ‘आदतन वादी’ होने और ‘धोखाधड़ी’ करने के आरोपों के तहत रखा गया है। रॉयटर्स ने कानूनी दस्तावेजों का हवाला देते हुए यह सूचना दी। सीमा शुल्क प्राधिकरण का कहना है कि पर्नोड ने आयात करों के पूर्ण भुगतान से बचने के लिए ऐसा किया था।
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फ्रांस की कंपनी Pernod Ricard दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी वाइन और स्पिरिट बेचने वाली कंपनी है। यह चिवास रीगल, जेमिसन, द ग्लेनलिवेट, मंकी 47, बैलेंटाइन्स, 100 पाइपर्स वगैरह जैसे कई लोकप्रिय अल्कोहलिक ब्रांड का उत्पादन करता है जो लक्जरी अल्कोहल श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।
भारत Pernod Ricard के प्रमुख विकास बाजारों में से एक है जहां इसकी 17 प्रतिशत हिस्सेदारी है। भारत सरकार और Pernod Ricard के बीच यह झगड़ा शराब कंपनी को भारत में व्यापार और नियामक से जुड़ी परेशानियों के कारण है। कंपनी ने पहले इस बारे में जानकारी दी थी।
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कंपनी ने पहले मोदी सरकार को बताया था कि शराब के आयात के मूल्यांकन पर लंबे समय से चल रहे विवादों ने भारत में नए निवेश को रोक दिया था। इससे पहले, पेरनोड ने भारत सरकार की बैक टैक्स की मांग को अदालत में चुनौती दी थी। कहा था कि जांच को रोक दिया जाना चाहिए क्योंकि यह गलत उद्योग डेटा पर निर्भर है और प्रक्रिया उचित नहीं है। बता दें कि भारत सरकार और कंपनी के बीच रुके हुए टैक्स से जुड़ा ये सारा मामला है।
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