गुजरात के अहमदाबाद में शनिवार को अदाणी यूनिवर्सिटी के तीसरे दीक्षांत समारोह में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के निदेशक प्रो. गोविंदन रंगराजन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शिक्षा और वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर रहा है. हालांकि इसका बढ़ता प्रभाव सच्चाई, भरोसे और मानवीय रिश्तों को लेकर कई सवाल खड़े करता है. अदाणी यूनिवर्सिटी ने ‘क्लास ऑफ 2026’ के 374 छात्रों को डिग्रियां प्रदान कीं. शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 10 छात्रों को पदक दिए गए, जिनमें 5 स्वर्ण, 3 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं.
यूनिवर्सिटी की अध्यक्ष ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया
अदाणी यूनिवर्सिटी की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी ने समारोह की अध्यक्षता की और मुख्य अतिथि का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि हम भाग्यशाली हैं कि प्रो. रंगराजन हमारे मुख्य अतिथि हैं. गणित, शोध और शैक्षणिक नेतृत्व के क्षेत्र में उनका अहम योगदान हमारे छात्रों के लिए और हम सभी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है. हम अदाणी यूनिवर्सिटी को शोध पर केंद्रित अग्रणी विश्वविद्यालय बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.
प्रो. रंगराजन ने AI को लेकर संभावनाओं का जिक्र किया
प्रो. रंगराजन ने कहा कि AI शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में अपार संभावनाएं लेकर आया है. यह हमें जटिल समस्याओं को सुलझाने और वैज्ञानिक खोजों की गति बढ़ाने में मदद कर सकता है. लेकिन हमें इसके परिणामों के प्रति सचेत रहना चाहिए. तस्वीरें, वीडियो और जानकारी इतनी वास्तविकता के साथ बनाई जा सकती हैं तो हमें कैसे पता चलेगा कि क्या सच है? और भले ही तकनीक हमें डिजिटल रूप से करीब ला रही है, क्या हम एक-दूसरे से और दूर होते जा रहे हैं? हमें AI की क्षमताओं को अपनाना चाहिए, लेकिन साथ ही इस बात पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए कि हमें क्या खोना पड़ सकता है.
इनोवेशन और इन्क्यूबेशन सीखने की छात्रों को नसीहत
उद्योग और शिक्षा जगत (अकादमिक क्षेत्र) के बीच संबंधों पर बात करते हुए डॉ. अदाणी ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि उद्योग केवल विश्वविद्यालय को यह बताएगा कि क्या पढ़ाना है. बल्कि वास्तविक दुनिया की चुनौतीपूर्ण स्थितियों के संपर्क में आने से ऐसे सवाल सामने आ सकते हैं, जिन्हें न तो उद्योग और न ही शिक्षा जगत अकेले सोच पाता. उन्होंने कहा कि भारत ने बहुत बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) तैयार किया है. हमें बड़े स्तर पर नवाचार (इनोवेशन) करना और नए विचारों को विकसित करना (इनक्यूबेट करना) सीखना होगा. उन्होंने छात्रों से ऐसे क्रांतिकारी कार्यों पर ध्यान देने का आग्रह किया, जिनका लाभ समाज के सबसे वंचित वर्गों तक पहुंच सके.
विश्वविद्यालय की एनुअल रिपोर्ट समारोह में प्रस्तुत की गई
विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए प्रोवोस्ट प्रो. (डॉ.) धवल पुजारा ने फैकल्टी, स्टाफ, छात्रों और उद्योग जगत के साझेदारों के योगदान को रेखांकित किया. उन्होंने विश्वविद्यालय के उन प्रयासों के बारे में बताया कि जिनका उद्देश्य शैक्षणिक नींव को मजबूत करना, अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र (रिसर्च इकोसिस्टम) विकसित करना और उद्योग तथा समाज के साथ मिलकर काम करना है. विश्वविद्यालय का लक्ष्य शिक्षा और अनुसंधान के लिए एक ऐसा बहु-विषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) संस्थान बनना है, जो भारत के विकास और राष्ट्र-निर्माण में योगदान दे सके. 2022 में स्थापित अदाणी विश्वविद्यालय उद्योग-प्रासंगिक शिक्षा, व्यावहारिक शिक्षण और अनुसंधान पर केंद्रित है.
अदाणी विश्वविद्यालय के बारे में खास बातें
अदाणी विश्वविद्यालय की परिकल्पना बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर), ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और डिजिटल स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में ट्रांसडिसिप्लिनरी (बहु-विषयक) अनुसंधान, ज्ञान सृजन और शिक्षण-सीखने की प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए की गई है. विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के लिए एक ‘इकोसिस्टम’ दृष्टिकोण अपनाता है. इसमें न केवल पाठ्यक्रम, विषय और अनुसंधान शामिल हैं, बल्कि कौशल विकास, पेशेवर विकास, शिक्षक प्रशिक्षण, उद्यमिता विकास, नवाचार, उत्पाद विकास, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) सृजन, गुणवत्ता और प्रमाणन, परामर्श, तथा दुनिया भर के उद्योगों और संस्थानों के साथ साझेदारी के माध्यम से सहयोगात्मक अनुसंधान भी शामिल हैं.
वर्तमान में यह विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और बिजनेस मैनेजमेंट (अंडर-ग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट) प्रोग्राम (B.Tech, M.Tech और MBA) प्रदान करता है. इसके साथ ही यहां NEP के अनुरूप लचीले इंटीग्रेटेड B.Tech + MBA और B.Tech + M.Tech प्रोग्राम तथा इंटरडिसिप्लिनरी डॉक्टोरल प्रोग्राम (PhD) भी उपलब्ध हैं, जिनमें 1800 से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं. अदाणी यूनिवर्सिटी गुजरात राज्य का पहला ऐसा विश्वविद्यालय है, जिसे ISO 21001:2018 प्रमाणन प्राप्त हुआ है. उच्च शिक्षा में मैनेजमेंट सिस्टम के लिए इस प्रमाणन को ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ माना जाता है.
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