पहाड़ के युवाओं को सपनों के लिए नहीं छोड़ना पड़ेगा घर, फिल्ममेकर अविनाश ध्यानी ने चकराता में बनाई फिल्म सिटी
उत्तराखंड प्राकृतिक सुंदरता से समृद्ध प्रदेश है. यहां हिमालय की भव्यता है, देवदार के विशाल वृक्ष हैं, पहाड़ों की अनगिनत खूबसूरत वादियाँ हैं और ऐसे दृश्य हैं, जिन्हें कैमरे में कैद करना हर फिल्ममेकर का सपना हो सकता है.
‘हम हमेशा पहाड़ छोड़कर शहरों की ओर जाने की बात करते हैं, लेकिन कभी-कभी यह भी सोचना चाहिए कि हम अपने पहाड़ के लिए क्या कर सकते हैं.’
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उत्तराखंड की मिट्टी में जन्मे और पले-बढ़े फिल्ममेकर अविनाश ध्यानी के लिए सिनेमा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि अपने पहाड़, अपनी मिट्टी और अपनी कहानियों से जुड़ने का एक माध्यम है. लेखक, निर्देशक, अभिनेता और फिल्ममेकर के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले अविनाश ध्यानी ने इससे पहले ’72 Hours’ जैसी फिल्म के जरिए उत्तराखंड की वीरता और इतिहास को पर्दे पर उतारा है. लेकिन उनके मन में वर्षों से एक ऐसा सपना पल रहा था, जो केवल उनकी फिल्मों तक सीमित नहीं था.
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यह सपना था, अपने उत्तराखंड में एक ऐसी फिल्म सिटी का निर्माण करना, जहां सिनेमा की बुनियादी जरूरतें पूरी हो सकें और आने वाली पीढ़ी के फिल्मकारों को उन मुश्किलों से न गुजरना पड़े, जिनका सामना उन्होंने स्वयं किया.
एक फिल्ममेकर की परेशानी से जन्मा विचार
उत्तराखंड प्राकृतिक सुंदरता से समृद्ध प्रदेश है. यहां हिमालय की भव्यता है, देवदार के विशाल वृक्ष हैं, पहाड़ों की अनगिनत खूबसूरत वादियाँ हैं और ऐसे दृश्य हैं, जिन्हें कैमरे में कैद करना हर फिल्ममेकर का सपना हो सकता है. लेकिन इन प्राकृतिक लोकेशन्स के बीच फिल्म निर्माण की अपनी चुनौतियां भी हैं.
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अविनाश ध्यानी बताते हैं कि जब उन्होंने उत्तराखंड में फिल्मों की शूटिंग शुरू की, तब उन्हें महसूस हुआ कि एक फिल्म की बुनियादी आवश्यकताओं के लिए भी कई बार अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ता है. कभी किसी गांव की तलाश, कभी पुलिस स्टेशन, कभी अस्पताल, कभी किसी पुराने भवन या रेलवे स्टेशन जैसे सेट की जरूरत. इन सभी व्यवस्थाओं में समय, संसाधन और धन का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है.
विशेषकर स्वतंत्र फिल्मकारों के लिए यह चुनौती और भी बड़ी होती है. सीमित बजट में फिल्म बनाना, कलाकारों और तकनीकी टीम को संभालना और अलग-अलग लोकेशन्स पर शूटिंग करना एक कठिन प्रक्रिया बन जाती है. यहीं से अविनाश ध्यानी के मन में एक विचार ने आकार लेना शुरू किया. क्यों न उत्तराखंड में ही एक ऐसी फिल्म सिटी बनाई जाए, जहां एक फिल्ममेकर को उसकी फिल्म की बुनियादी जरूरतों के लिए भटकना न पड़े?
इसी विचार और वर्षों के अनुभव का परिणाम है अविनाश ध्यानी फिल्म सिटी (ADFC). यह फिल्म सिटी केवल शूटिंग के लिए एक स्थान तैयार करने की पहल नहीं है, बल्कि उत्तराखंड में फिल्म निर्माण की एक नई व्यवस्था विकसित करने का प्रयास है. ADFC में एक ऐसे फिल्मी संसार की परिकल्पना की गई है, जहां एक गांव का पूरा सेट हो, पुलिस स्टेशन हो, अस्पताल हो, रेलवे स्टेशन हो, ब्रिटिशकालीन भवन और बंगले हों, मंदिर हों और अन्य आवश्यक संरचनाएं हों, जिनकी जरूरत फिल्म निर्माण के दौरान पड़ती है.
इसका उद्देश्य है कि एक फिल्ममेकर को अपनी कहानी के अनुरूप कई बुनियादी लोकेशन्स एक ही परिसर में उपलब्ध हो सकें. इससे विशेषकर छोटे बजट की फिल्मों, स्वतंत्र फिल्मकारों और नए कलाकारों को सुविधा मिलेगी. अविनाश ध्यानी का मानना है कि सिनेमा की दुनिया में प्रवेश करने वाले हर नए व्यक्ति के पास बड़े संसाधन नहीं होते, लेकिन उसके पास एक कहानी होती है, एक सपना होता है। ADFC उसी सपने को एक मंच देने की दिशा में उनका प्रयास है.
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पहाड़ के युवाओं के लिए रोजगार और सिनेमा का नया रास्ता
अविनाश ध्यानी के इस विज़न का एक महत्वपूर्ण पक्ष स्थानीय रोजगार और प्रतिभाओं का विकास भी है. उत्तराखंड के अनेक युवा अभिनय, सिनेमैटोग्राफी, लाइटिंग, साउंड, एडिटिंग और फिल्म निर्माण के अन्य क्षेत्रों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं. लेकिन अवसरों की कमी के कारण उन्हें मुंबई, दिल्ली और दूसरे बड़े शहरों की ओर जाना पड़ता है. ADFC के माध्यम से अविनाश ध्यानी चाहते हैं कि पहाड़ का युवा अपने ही क्षेत्र में सिनेमा की दुनिया से जुड़ सके.
यहां स्थानीय युवाओं को तकनीशियन, सिनेमैटोग्राफर, लाइटमैन, प्रोडक्शन मैनेजर और प्रोडक्शन हेड जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम करने और सीखने के अवसर मिलें. उनका उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उत्तराखंड में एक ऐसी फिल्म निर्माण क्षमता विकसित करना है, जहां स्थानीय प्रतिभाएं आगे चलकर अपने दम पर फिल्में बना सकें. उनके लिए यह सपना केवल एक फिल्म सिटी का नहीं, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था का है जहाँ पहाड़ का युवा अपने सपनों के लिए अपने पहाड़ से दूर जाने को मजबूर न हो.
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प्रकृति स्वयं है इस फिल्म सिटी का हिस्सा
चकराता क्षेत्र में स्थित ADFC की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राकृतिक भव्यता है. यहां से हिमालय के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं. आसपास देवदार के विशाल वृक्ष, पहाड़ों की खूबसूरत श्रृंखलाएँ, प्राकृतिक लोकेशन्स और मनमोहक सूर्यास्त हैं. यह वह परिवेश है, जहाँ प्रकृति स्वयं सिनेमा का हिस्सा बन जाती है. फिल्मकारों को यहां केवल तैयार सेट ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य का भी एक अनूठा संसार उपलब्ध हो सकता है. गीतों के फिल्मांकन से लेकर भावनात्मक दृश्यों, रोमांटिक सीक्वेंस और विभिन्न प्रकार की सिनेमाई कहानियों के लिए यह क्षेत्र अपार संभावनाएं रखता है.
अविनाश ध्यानी के अनुसार, उत्तराखंड में फिल्म निर्माण की सबसे बड़ी ताकत यहां की प्रकृति और यहां की कहानियां हैं. जरूरत केवल ऐसी सुविधाओं और व्यवस्थाओं को विकसित करने की है, जो इस क्षमता को सही दिशा दे सकें.
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अपनी फिल्मों से शुरू की इस पहल की यात्रा
ADFC का सपना अब केवल विचार तक सीमित नहीं है. अविनाश ध्यानी अपनी आने वाली फिल्मों के माध्यम से इस फिल्म सिटी को विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं. उनकी आगामी फिल्म Tu Tum Aur Main की शूटिंग यहां की जा रही है. वहीं, उनकी ऐतिहासिक युद्ध फिल्म VC-571 (Victoria Cross), जो प्रथम विश्व युद्ध के वीर सैनिक राइफलमैन गबर सिंह नेगी के जीवन पर आधारित है, के लिए भी यहां युद्धकालीन सेट तैयार किए जा रहे हैं.
इस फिल्म के लिए युद्धभूमि, ट्रेंच और अन्य आवश्यक संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है. इस प्रकार ADFC केवल भविष्य की फिल्मों के लिए एक स्थान नहीं, बल्कि वर्तमान में भी फिल्म निर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा बन रही है. अविनाश ध्यानी का प्रयास है कि इन फिल्मों के निर्माण के साथ-साथ फिल्म सिटी की सुविधाएं भी विकसित होती रहें, ताकि आने वाले समय में दूसरे फिल्मकार भी यहाँ आकर अपनी फिल्मों का निर्माण कर सकें.
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सरकार के सहयोग के साथ निजी पहल की आवश्यकता
उत्तराखंड सरकार ने फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए फिल्म नीति और सब्सिडी जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से महत्वपूर्ण सहयोग दिया है. राज्य में फिल्म निर्माण की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयासों को अविनाश ध्यानी भी महत्वपूर्ण मानते हैं. लेकिन उनका मानना है कि फिल्म उद्योग के विकास की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं हो सकती. एक फिल्ममेकर के रूप में यह भी हमारा दायित्व है कि हम अपने स्तर पर पहल करें, सुविधाएं विकसित करें और आने वाली पीढ़ी के लिए अवसरों का निर्माण करें.
ADFC इसी सोच का परिणाम है, सरकारी सहयोग और नीतियों के साथ-साथ निजी स्तर पर एक ऐसी पहल, जो उत्तराखंड में फिल्म निर्माण के लिए आधारभूत संरचना विकसित करने का प्रयास कर रही है.
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एक सपना, जो अपने पहाड़ के लिए है
अविनाश ध्यानी के लिए ADFC का अर्थ केवल एक फिल्म सिटी नहीं है. यह उनके वर्षों के अनुभव, संघर्ष और अपने प्रदेश के प्रति जिम्मेदारी से जन्मा एक सपना है. वह चाहते हैं कि आने वाले समय में उत्तराखंड के युवा केवल फिल्मों में काम करने के लिए बड़े शहरों की ओर न देखें, बल्कि अपने प्रदेश में भी सिनेमा की दुनिया में आगे बढ़ने के अवसर तलाश सकें. वह चाहते हैं कि उत्तराखंड की कहानियां यहीं जन्म लें, यहीं विकसित हों और दुनिया तक पहुंचें. क्योंकि पहाड़ों से उतरकर शहरों में अपनी पहचान बनाने की यात्रा उन्होंने स्वयं तय की है. अब उनकी इच्छा है कि आने वाली पीढ़ी को अपने सपनों की शुरुआत करने के लिए पहाड़ छोड़ना न पड़े.
ADFC – एक फिल्ममेकर का अपने पहाड़ के लिए सपना. एक ऐसी पहल, जहां सिनेमा की कहानियां भी जन्म लें और सिनेमा का भविष्य भी.