केरल के अभयारण्यम में पिछले 18 महीनों से जिंदगी की जंग लड़ रही नन्हीं हथिनी ‘माया’ को नया जीवन मिला है. गंभीर रूप से बीमार, कई फ्रैक्चर और कमजोर हड्डियों से जूझ रही 18 महीने की इस हाथी के बच्चे को बेहतर और गहन चिकित्सा के लिए केरल से गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा अस्पताल के लिए एयरलिफ्ट किया गया है.
केरल के मुख्य वन्यजीव वार्डन डॉ. पी. पुगलजेंडी ने 5 नवंबर 2026 को माया को तत्काल वंतारा के अत्याधुनिक अस्पताल में ट्रांसफर करने का आदेश दिया. यह फैसला केरल वन विभाग द्वारा वैज्ञानिक और मानवीय आधार पर हर संभव विकल्प तलाशने के बाद लिया गया, जिससे इस मासूम को एक नई जिंदगी मिल सके.
जन्म के समय ही मां से बिछड़ गई थी माया
माया की दास्तान शुरू से ही संघर्षों से भरी रही है. 19 अप्रैल 2025 को मलायात्तूर डिवीजन के कपरीक्कड़ के पास नदी पार करते समय उसका झुंड आगे निकल गया और यह नवजात बच्ची अकेली छूट गई. वह भूख, डिहाइड्रेशन और कमजोरी से बेहाल थी और उसे मां का पहला दूध भी नहीं मिला था. मां के न लौटने पर वन विभाग ने उसे रेस्क्यू कर अभयारण्यम पहुंचाया.
सहायक वन पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. बिनॉय सी. बाबू और केयरगिवर्स ने दिन-रात हाथ से बोतल के जरिए दूध पिलाकर उसे पाला और उसका नाम ‘माया’ रखा.
एक हादसे ने छीनी चलने की ताकत
2 जुलाई 2026 को करीब 15 महीने की उम्र में खेलते समय माया फिसल गई, जिससे उसके दाहिने कंधे में चोट आई. फिजियोथेरेपी, स्प्लिंट्स, कैल्शियम और विटामिन डी सप्लीमेंट्स के बावजूद उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई. अक्टूबर के अंत तक वह अपने पैरों पर खड़ी होने में असमर्थ हो गई और केवल लिक्विड डाइट पर निर्भर रह गई.
24 अक्टूबर को पूकोड वेटरनरी कॉलेज के डॉ. दिनेश पी.टी. द्वारा किए गए परीक्षण में उसके बाएं ह्यूमरस में फ्रैक्चर, दाहिने रेडियस में कई फ्रैक्चर, हड्डियों का अत्यधिक पतलापन, सीने में संक्रमण और लगातार लेटे रहने के कारण घाव पाए गए. 29 अक्टूबर को मेडिकल बोर्ड ने पाया कि उसकी हड्डियां बेहद नाजुक हैं, जो किसी जन्मजात बीमारी की ओर इशारा करती हैं. लगातार असहनीय दर्द को देखते हुए मेडिकल बोर्ड ने भारी मन से ‘इच्छा मृत्यु’ की सिफारिश की थी.
पद्मश्री डॉ. कुशल सरमा ने जगाई नई उम्मीद
केस बंद करने के बजाय केरल वन विभाग ने देश के जाने-माने विशेषज्ञों से राय ली. 1 नवंबर को वंतारा की मेडिकल टीम के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक्स-रे और ब्लड रिपोर्ट्स शेयर की गईं. इसके बाद 4 नवंबर को असम के प्रख्यात हाथी रोग विशेषज्ञ और वंतारा के पशु चिकित्सा सलाहकार पद्मश्री डॉ. कुशल कोंवर सरमा के साथ आपात बैठक हुई.
डॉ. सरमा ने पाया कि यह समस्या पैराथायरॉइड विकार से जुड़ी हो सकती है, जिसका इलाज संभव है. उन्होंने सुझाव दिया कि कोई भी कठोर कदम उठाने से पहले माया को वंतारा के अत्याधुनिक अस्पताल में एक मौका दिया जाना चाहिए. वंतारा एलिफेंट केयर सेंटर के हेड वेटरिनेरियन डॉ. यदुराज खडपेकर ने भी इस पर सहमति जताई, जिसके बाद सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से एयरलिफ्ट के फैसले पर मुहर लगाई.
वंतारा में आधुनिक सुविधाओं से होगा इलाज
जामनगर स्थित वंतारा में माया को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं. 24 घंटे वरिष्ठ पशु चिकित्सकों की निगरानी और एडवांस पेन मैनेजमेंट किया जा रहा है. सुरक्षित मूवमेंट के लिए हाइड्रोलिक लिफ्टिंग सिस्टम की मदद ली जा रही है, ताकि उसके नाजुक अंगों पर दबाव न पड़े. जरूरत पड़ने पर मांसपेशियों और जोड़ों के लिए इड्रोथेरेपी दी जा रही है.