राजधानी दिल्ली अगले हफ्ते एक बड़े आध्यात्मिक आयोजन की गवाह बनने जा रही है. अखिल विश्व गायत्री परिवार का तीन दिन का जन्मशताब्दी महोत्सव 31 अक्टूबर से 2 नवंबर तक नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में होगा. यह महोत्सव संस्था की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्म के सौ साल पूरे होने पर आयोजित किया जा रहा है. आयोजकों के अनुसार, इसमें देश के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों से भी हज़ारों गायत्री परिजनों के पहुँचने की उम्मीद है. तैयारियाँ अंतिम दौर में हैं और स्टेडियम के पास गांधी संग्रहालय में समारोह कार्यालय भी खोल दिया गया है.
हरिद्वार के बाद अब दिल्ली
यह आयोजन गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष का दूसरा चरण है. पहला बड़ा आयोजन इसी साल जनवरी में हरिद्वार में हुआ था. उसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत समेत कई जानी-मानी हस्तियाँ शामिल हुई थीं. दिल्ली का यह महोत्सव मुख्य रूप से संगठन के कार्यकर्ताओं का एक विशेष सम्मेलन है. गायत्री परिवार की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचना के अनुसार, कार्यक्रम आमंत्रण पर आधारित है. इसमें शामिल होने के लिए शांतिकुंज की ओर से आमंत्रण पत्र दिए जा रहे हैं, जिन्हें ज़िला, उपज़ोन और ज़ोन स्तर के समन्वयकों के ज़रिए परिजनों तक पहुँचाया जा रहा है.
एक साल में तीन शताब्दियाँ
गायत्री परिवार के लिए 2026 इसलिए ख़ास है, क्योंकि इस साल एक साथ तीन शताब्दियाँ पूरी हो
रही हैं:
- माता भगवती देवी शर्मा के जन्म के सौ साल.
- 1926 की वसंत पंचमी पर संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा जलाए गए अखंड दीप के सौ साल. यह दीप आज भी हरिद्वार के शांतिकुंज में लगातार जल रहा है.
- उसी अखंड दीप के सामने शुरू हुई गुरुदेव की साधना के सौ साल.
माता भगवती देवी शर्मा का जन्म 20 सितंबर 1926 को आगरा में हुआ था. उन्होंने जीवन भर पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के साथ मिलकर मिशन का काम आगे बढ़ाया. नारी जागरण के उनके प्रयासों ने बड़ी संख्या में महिलाओं को समाज के काम से जोड़ा. 1990 में गुरुदेव के देह त्यागने के बाद उन्होंने पूरे संगठन की ज़िम्मेदारी संभाली. इसी विरासत को ध्यान में रखते हुए गायत्री परिवार ने यह साल नारी सशक्तिकरण को समर्पित किया है.
संकल्पों की समीक्षा और आगे की योजना
इस महोत्सव का मकसद सिर्फ़ उत्सव मनाना नहीं है. अगस्त में शांतिकुंज में हुई एक वर्चुअल बैठक में समारोह की घोषणा करते हुए शताब्दी समारोह के दलनायक डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा था कि यह शताब्दी वर्ष संकल्प और साधना को कर्म में बदलने का मौका है. उनके अनुसार दिल्ली का आयोजन साल भर में लिए गए संकल्पों की समीक्षा करने और आने वाले सालों की योजना बनाने का मंच बनेगा. उन्होंने बताया कि नशा मुक्ति और “माताजी स्मृति उपवन” जैसे संकल्पों को जन-जन तक पहुँचाना इस वर्ष का अहम लक्ष्य है. समारोह में गुरुदेव और माताजी के विचारों को आगे बढ़ाने और उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज निर्माण का संकल्प भी प्रमुखता से रखा जाएगा. इसी बैठक में “मैं गायत्री परिवार हूँ” नाम की एक डॉक्यूमेंट्री भी जारी की गई थी. शांतिकुंज के व्यवस्थापक योगेंद्र गिरि के अनुसार, दिल्ली के आयोजन को लेकर कार्यकर्ताओं में ख़ास उत्साह है और अलग-अलग इलाकों से आने वाले प्रतिनिधियों की भागीदारी के लिए तैयारियाँ तेज़ कर दी गई हैं.
भारत मंडपम में जुटे एक हज़ार से ज़्यादा कार्यकर्ता
महोत्सव से पहले माहौल बनाने के लिए इस महीने दिल्ली के भारत मंडपम में “राष्ट्र निर्माण संकल्प” सम्मेलन हुआ. इसमें दिल्ली-एनसीआर के एक हज़ार से ज़्यादा कार्यकर्ता शामिल हुए. सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पहुँचे केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि महिलाएँ आज अपनी प्रतिभा और संगठन क्षमता के दम पर देश निर्माण में बड़ी भूमिका निभा रही हैं. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक विकास कुमार ने नागरिक कर्तव्यों और देशप्रेम को मज़बूत भारत की नींव बताया. कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा भी मौजूद रहे.
सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि तीनों शताब्दियों का यह संगम साधना को सेवा में और अच्छे विचारों को रोज़ के व्यवहार में बदलने की प्रेरणा देता है. उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार ऐसा भारत बनाना चाहता है, जहाँ हर नागरिक को अपनी विरासत पर गर्व हो और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित हो. कार्यक्रम के अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने राष्ट्र निर्माण में योगदान देने और माताजी के विचारों को घर-घर पहुँचाने का संकल्प लिया.
गाँव-शहर घूम रहे ज्योति कलश रथ
महोत्सव का संदेश लोगों तक पहुँचाने के लिए 11 अक्टूबर को शांतिकुंज से तीन ज्योति कलश रथ रवाना किए गए. इन्हें शांतिकुंज की प्रमुख शैलबाला पंड्या ने हरी झंडी दिखाई. ये रथ दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में घूमकर लोगों को शताब्दी समारोह से जोड़ रहे हैं. शैलबाला पंड्या ने इस मौके पर कहा कि माताजी की जन्मशताब्दी उनके विचारों को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने और सकारात्मक बदलाव के संकल्प को मज़बूत करने का अवसर है. डॉ. चिन्मय पंड्या ने इस अभियान को जन्मशताब्दी समारोह को “जन-उत्सव” बनाने की दिशा में अहम कदम बताया.
परिजनों के लिए ज़रूरी जानकारी
संस्था ने अपील की है कि कार्यक्रम से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए सिर्फ़ आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा करें. ये माध्यम हैं- मुख्य वेबसाइट awgp.org, केंद्रीय व्हाट्सऐप समूह और संस्था के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल. आमंत्रण पत्र या भागीदारी से जुड़े सवालों के लिए परिजन अपने ज़िला या उपज़ोन समन्वयक से संपर्क कर सकते हैं. हरिद्वार से शुरू हुआ शताब्दी वर्ष का यह सफ़र अब देश की राजधानी में एक अहम पड़ाव पर पहुँच रहा है. सौ साल पहले आँवलखेड़ा गाँव में जले एक दीये से शुरू हुई यह यात्रा अगले तीन दिन दिल्ली में नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ेगी.
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