खरमास कब से हो रहा है शुरू, जानें इसका महत्व और इस दौरान क्या करें-क्या नहीं
Kharmas 2023: सनातन परंपरा के मुताबिक खरमास के दौरान कुछ शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। आइए जानते हैं कि दिसंबर महीने में खरमास कब से कब तक है और इस दौरान क्या करें और क्या नहीं
Edited By : Dipesh Thakur|Updated: Feb 11, 2024 00:36
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Kharmas 2023 Date, Importance, Dos and Donts: सनातन धर्म में खरमास को मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता है। यही वजह है कि इस दौरान जनेऊ, मुंडन और कर्ण छेदन, विवाह, गृह प्रवेश (कान छेदना) जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। पंचांग के अनुसार, खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर, शनिवार से हो रही है। जबकि इसकी समाप्ति 15 जनवरी को होगी। आइए जानते हैं कि खरमास कब से कब तक है? इस दौरान क्यों नहीं किए जाते हैं शुभ और मांगलिक कार्य।
खरमास 2023 कब से कब तक है?
दृक पंचांग के अनुसार, खरमास 16 दिसंबर 2023 से शुरू होने वाला है। दरअसल इस दिन दोपहर 3 बजकर 58 मिनट पर सूर्य देव वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में इस दिन से खरमास शुरू हो जाएगा। जबकि खरमास की समाप्ति 15 जनवरी 2024 को होगी, जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश कर चुके होंगे।
खरमास का महत्व
ज्योतिषीय गणना के मुताबिक सूर्य देव जब बृहस्पति की राशि में भ्रमण करते हैं तो उस दौरान गुरु की ताकत कमजोर हो जाती है। साथ ही साथ इस वक्त सूर्य का तेज भी कम हो जाता है। कहा जाता है कि मांगलिक कार्यों के लिए इन दोनों ग्रहों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्य निषेध रहते हैं।
खरमास में क्या ना करें
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, खरमास में किसी भी प्रकार के नए व्यवसाय की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। माना जाता है कि खरमास के दौरान ऐसा करने से जीवन में संघर्ष बहुत अधिक बढ़ जाता है। साथ ही बिजनेस में कामयाबी मिलने में दिक्कतें आती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास में जनेऊ संस्कार, मुंडन संस्कार और कान छेदन संस्कार नहीं किए जाते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से जातक पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, खरमास में शादी-विवाह जैसे शुभ और मांगलिक कार्य भी नहीं करने चाहिए। खरमास के दौरान ऐसा करने से वैवाहिक जीवन प्रभावित होता है।
ज्योतिषीय मान्यता के अऩुसार खरमास में सूर्य की उपासना सर्वोपरि है। माना जाता है कि खरमास के दौरान सूर्य की पूजा-अर्चना करने से जीवन में शुभता का संचार होता है। इसके साथ ही खरमास में सूर्य को जल अर्पित करना भी शुभकारक माना गया है। ऐसे में खरमास के दौरान सूर्य देव को जल अर्पित करते समय जल में कुमकुम अक्षत और लाल फूल मिलाएं। इसके अलावा सूर्य को जल अर्पित करते समय सूर्य देव के मंत्रों का जाप भी करें। खरमास में इस विधि से सूर्य देव की उपासना करने के नौकरी-व्यापार में किसी प्रकार की दिक्कतें नहीं आती हैं।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।
Kharmas 2023 Date, Importance, Dos and Donts: सनातन धर्म में खरमास को मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता है। यही वजह है कि इस दौरान जनेऊ, मुंडन और कर्ण छेदन, विवाह, गृह प्रवेश (कान छेदना) जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। पंचांग के अनुसार, खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर, शनिवार से हो रही है। जबकि इसकी समाप्ति 15 जनवरी को होगी। आइए जानते हैं कि खरमास कब से कब तक है? इस दौरान क्यों नहीं किए जाते हैं शुभ और मांगलिक कार्य।
खरमास 2023 कब से कब तक है?
दृक पंचांग के अनुसार, खरमास 16 दिसंबर 2023 से शुरू होने वाला है। दरअसल इस दिन दोपहर 3 बजकर 58 मिनट पर सूर्य देव वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में इस दिन से खरमास शुरू हो जाएगा। जबकि खरमास की समाप्ति 15 जनवरी 2024 को होगी, जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश कर चुके होंगे।
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खरमास का महत्व
ज्योतिषीय गणना के मुताबिक सूर्य देव जब बृहस्पति की राशि में भ्रमण करते हैं तो उस दौरान गुरु की ताकत कमजोर हो जाती है। साथ ही साथ इस वक्त सूर्य का तेज भी कम हो जाता है। कहा जाता है कि मांगलिक कार्यों के लिए इन दोनों ग्रहों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्य निषेध रहते हैं।
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खरमास में क्या ना करें
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, खरमास में किसी भी प्रकार के नए व्यवसाय की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। माना जाता है कि खरमास के दौरान ऐसा करने से जीवन में संघर्ष बहुत अधिक बढ़ जाता है। साथ ही बिजनेस में कामयाबी मिलने में दिक्कतें आती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास में जनेऊ संस्कार, मुंडन संस्कार और कान छेदन संस्कार नहीं किए जाते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से जातक पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, खरमास में शादी-विवाह जैसे शुभ और मांगलिक कार्य भी नहीं करने चाहिए। खरमास के दौरान ऐसा करने से वैवाहिक जीवन प्रभावित होता है।
ज्योतिषीय मान्यता के अऩुसार खरमास में सूर्य की उपासना सर्वोपरि है। माना जाता है कि खरमास के दौरान सूर्य की पूजा-अर्चना करने से जीवन में शुभता का संचार होता है। इसके साथ ही खरमास में सूर्य को जल अर्पित करना भी शुभकारक माना गया है। ऐसे में खरमास के दौरान सूर्य देव को जल अर्पित करते समय जल में कुमकुम अक्षत और लाल फूल मिलाएं। इसके अलावा सूर्य को जल अर्पित करते समय सूर्य देव के मंत्रों का जाप भी करें। खरमास में इस विधि से सूर्य देव की उपासना करने के नौकरी-व्यापार में किसी प्रकार की दिक्कतें नहीं आती हैं।
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।