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ज्योतिष

Janmashtami 2022: जन्माष्टमी पर कृष्ण-कन्हैया को पालने में झुलाने की क्यों है मान्यता, जानें वजह

Janmashtami 2022: श्री कृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी केवल देश में ही नहीं विदेशों में भी काफी धूमधाम से मनाया जाता है। कृष्ण-कन्हैया के भक्त एहतियात के साथ अपने-अपने अपने आराध्य की आराधना की तैयारी में जुटे हैं। कृष्ण जन्माष्टमी पर व्रत रखने वाले भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने के दौरान कुछ खास विधि जरूर […]

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Edited By : Pankaj Mishra Updated: Aug 17, 2022 15:38

Janmashtami 2022: श्री कृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी केवल देश में ही नहीं विदेशों में भी काफी धूमधाम से मनाया जाता है। कृष्ण-कन्हैया के भक्त एहतियात के साथ अपने-अपने अपने आराध्य की आराधना की तैयारी में जुटे हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी पर व्रत रखने वाले भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने के दौरान कुछ खास विधि जरूर अपनाते हैं। इन्हीं में से एक है भगवान कृष्ण को पालने पर झुलाना। लोगों के मन में अक्सर सवाल उठता है कि आखिर जन्माष्टमी पर पूजा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या तस्वीर को पालने पर क्यों झुलाया जाता है?

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दरअसल, कृष्णाश्रयी शाखा से जुड़े भक्त इस सवाल का उत्तर कई तरह से देते हैं। ये लोग जन्माष्टमी को व्रतराज यानी सभी व्रतों में प्रमुख मानते हैं। इनका कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण ने बालकाल में ज्यादातर कलाएं पालने में लेटे-लेटे ही दिखाया था। इसी वजह से जन्माष्टमी पूजा के दौरान इसबात की कोशिश होती है कि भगवान कृष्ण को उनको जन्मदिवस के मौके पर पालने में जरूर झूलाया जाए।

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दूसरी मान्यता यह है कि भगवान कृष्ण को पालना बेहद पसंद है और मां यशोदा उन्हें बचपन में अक्सर उन्हें पालने में रखती थीं। मान्यता है कि जन्माष्टमी की पूजा के दौरान अगर व्रत रखने वाले पालने में नंद गोपाल को झुला दें, तो उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

मथुरा और आसपास के इलाकों में कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण को पालने में झुलाने पर संतान से स्नेह बढ़ता है। इसके पीछे तर्क दिया जाता है कि मां यशोदा जब कभी अपने कान्हा को पालने में लेटे हुए देखती थीं तो वह काफी आनंद महसूस करती थीं। मान्यता है कि नंदगोपाल को पालने में झुलाने के दौरान जो ठीक वैसी ही अनुभूति होती है, जिसका सकारात्मक असर मां-पुत्र-पुत्री के प्रेम में भी झलकता है।

First published on: Aug 17, 2022 03:34 PM

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