ताइवन दौरे पर अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी, कहा- हम ताइवान में लोकतंत्र के समर्थक, क्षेत्र में चाहते हैं शांति
Edited By Pankaj Mishra

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नई दिल्ली: अमेरिकी सीनेट की स्पीकर नैंसी पोलेसी ताइवान दौरे पर हैं। कल रात पोलेसी ताइवान के राजधानी ताइपे पहुंचीं। इस दौरान पोलेसी ने चीन का नाम लिए बगैर उस पर निशाना साधा। पोलेसी ने कहा कि हम ताइवान में लोकतंत्र के समर्थक हैं। हम ताइवान के 23 मिलियन लोगों के साथ हैं और क्षेत्र में हम शांति चाहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि हम ताइवान का आर्थिक विकास चाहते हैं। पोलेसी ने कहा कि मौजूदा स्थिति को बदलने का विरोध करते रहेंगे। हमारी यात्रा सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी पर केंद्रित है। हम ताइवान के पास दोस्ती के लिए आए हैं।
#WATCH | Taiwan: US House Speaker Nancy Pelosi meets President of Taiwan Tsai Ing-wen in Taipei pic.twitter.com/i7zVHUsOYx
— ANI (@ANI) August 3, 2022
अमेरिकी स्पीकर पेलोसी ने ताइवानी मीडिया से चर्चा में कहा, ‘मैं यहां ताइवानी जनता की बात सुनने और यह सीखने के लिए आई हूं कि हम एक साथ कैसे आगे बढ़ सकते हैं। हम ताइवान को कोविड से सफलतापूर्वक निपटने के लिए बधाई देती हैं। यह स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और शासन का मुद्दा भी है।’
पेलोसी ने यह भी कहा कि ताइवान सरकार से बातचीत में जलवायु संकट से पृथ्वी को बचाने के लिए मिलकर काम करने पर बात करेंगे। हमारी यात्रा मानवाधिकारों, अनुचित व्यापार परंपराओं और सुरक्षा मुद्दों के बारे में है।
वहीं ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन ने कहा कि अमेरिकी स्पीकर पेलोसी वास्तव में ताइवान के सबसे समर्पित मित्रों में से एक हैं। ताइवान के लिए अमेरिकी कांग्रेस के कट्टर समर्थन को प्रदर्शित करने के लिए ताइवान की यह यात्रा करने के लिए हम आपके आभारी हैं।
इस बीच नैंसी पेलोसी की यात्रा से चीन और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। चीन की सेना ताइवान स्ट्रेट की ओर बढ़ गई है। यह स्ट्रेट ताइवान को चीन की मुख्य भूमि से अलग करता है। उधर, चीन के 20 लड़ाकू विमान ताइवान में घुस गए। अमेरिका ने भी पेलोसी की सुरक्षा को देखते हुए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपने युद्धपोत यूएसएस रोनाल्ड रीगन और फिलीपींस सागर में अन्य युद्धपोत को तैनात कर दिया है।
इसके साथ पेलोसी पिछले 25 साल में स्वशासित द्वीप का दौरा करने वाली अमेरिका की सर्वोच्च अधिकारी बन गई हैं। चीन दावा करता रहा है कि ताइवान उसका हिस्सा है। वह विदेशी अधिकारियों के ताइवान दौरे का विरोध करता है क्योंकि उसे लगता है कि यह द्वीपीय क्षेत्र को संप्रभु के रूप में मान्यता देने के समान है।
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