US मिड-टर्म इलेक्शन के नतीजों के बाद ट्रंप बने रहेंगे राष्ट्रपति, लेकिन कौन-कौन सी पावर अब छिन जाएगी?

Donald Trump: अमेरिका में मिड-टर्म इलेक्शन के नतीजे डोनाल़्ड ट्रंप की उम्मीदों के खिलाफ आए हैं, इसके बावजूद वो राष्ट्रपति बने रहेंगे, लेकिन उनकी ताकत जरूर थोड़ी कम हो जाएगी, क्योंकि दोनों सदनों में रिपब्लिकंस का कंट्रोल खत्म हो चुका है.

Donald Trump PTI

डोनाल्ड ट्रंप (Photo-PTI)

US Midterm Election: 2026 के यूएस मिड-टर्म इलेक्शन के नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा राजनीतिक झटका दिया है. डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट पर कंट्रोल हासिल कर लिया है. इस नतीजे की वजह से, ट्रंप के लिए अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के बचे हुए 2 सालों में अपने राजनीतिक एजेंडे को लागू करना काफी मुश्किल हो सकता है.

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ट्रंप के लिए क्या मुश्किलें आ सकती हैं?

हालांकि इन चुनावी नतीजों से ट्रंप को व्हाइट हाउस से नहीं हटाया जा सकेगा. वो जनवरी 2029 में अपना कार्यकाल पूरा होने तक राष्ट्रपति बने रहेंगे. लेकिन कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का कंट्रोल होने के कारण, उनके प्रशासन को गंभीर रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है. यहां 5 ऐसे 5 फैसले बताए जा रहे हैं. जिन्हें लागू करने में ट्रंप को अब मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

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1. नए कानून आसानी से पास नहीं हो सकेंगे

फेडरल कानून बनाने का संवैधानिक अधिकार कांग्रेस के पास है. कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का कंट्रोल होने के कारण, ट्रंप के विधायी प्रस्तावों को कड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है. यहां तक कि उनके ‘MAGA’ (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) एजेंडे से जुड़े विधेयकों को भी पास होने के लिए जरूरी वोट जुटाने में संघर्ष करना पड़ सकता है.

2. फंडिंग पर पाबंदियों का खतरा

कांग्रेस बजट और विनियोग कानूनों के जरिए फेडरल खर्चों को नियंत्रित करती है. डेमोक्रेट्स ट्रंप के अहम प्रोजेक्ट्स जैसे कि बॉर्डर वॉल और ‘MAGA’ से जुड़े दूसरे पहलों के लिए मिलने वाली फंडिंग को रोक सकते हैं या उसमें कटौती कर सकते हैं. बजट को लेकर असहमति के कारण ‘गवर्नमेंट शटडाउन’ का खतरा भी बढ़ सकता है.

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3. महाभियोग का खतरा

डेमोक्रेट्स ट्रंप प्रशासन के खिलाफ जांच शुरू कर सकते हैं, अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुला सकते हैं और समन जारी कर सकते हैं. वो हाउस में महाभियोग की प्रक्रिया भी शुरू कर सकते हैं. हालांकि ट्रंप को पद से हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जिससे उन्हें हटाना काफी मुश्किल हो जाता है.

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4. जजों और अधिकारियों की नियुक्ति मनमुताबिक नहीं हो सकेगी

ट्रंप की तरफ से न्यायिक और कई सीनियर सरकारी पदों पर की जाने वाली नियुक्तियों के लिए सीनेट की मंजूरी जरूरी होती है. सीनेट पर डेमोक्रेट्स का कंट्रोल होने के कारण, वो उनकी तरफ नामित लोगों को खारिज कर सकते हैं, नियुक्ति में देरी कर सकते हैं या उनमें बदलाव की मांग कर सकते हैं.

5. विदेश नीति से जुड़े समझौतों में रुकावटें आ सकती हैं

    ट्रेड से जुड़े बड़े कानूनों, संधियों की पुष्टि और सैन्य अभियानों के लिए फंडिंग को लेकर विरोध का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि राष्ट्रपति के पास काफी कूटनीतिक और सैन्य ताकतें होती हैं, लेकिन जरूरी फंडिंग और विधायी फैसलों पर कांग्रेस का नियंत्रण होता है.

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    ट्रंप के लिए इसका क्या मतलब है?

    डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में बने रहेंगे और उनके पास कार्यकारी शक्तियां बनी रहेंगी. हालांकि कांग्रेस कानूनों, जांच और फंडिंग पर पाबंदियों के जरिए उनके एजेंडे को चुनौती दे सकती है. वहीं अदालतें ऐसे किसी भी कार्यकारी कदम को रोक सकती हैं जो कानून या संविधान का उल्लंघन करते हों. आसान भाषा में कहें तो ट्रंप राष्ट्रपति बने हुए हैं, लेकिन अब डेमोक्रेट्स के पास उनके शासन करने की क्षमता पर संवैधानिक रूप से लगाम लगाने के ताकतवर साधन मौजूद हैं.

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    लेखक के बारे में

    Shariqul Hoda

    Shariqul Hoda

    न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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