वेनेजुएला पर अमेरिका द्वारा किए गए हमले के बाद पूरी दुनिया में तनाव की स्थिति दिखाई दे रही है. अमेरिकी द्वारा वेनेजुएला पर की गई कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं. वहीं, जानकारों का ऐसा भी मानना है कि पूरी दुनिया में फैला संघर्ष अब लैटिन अमेरिका तक भी पहुंच चुका है.
वहीं, दुनिया भर में इस कार्रवाई को लेकर लोगों को राय भी अलग-अलग दिखाई देने लगी है. जो साफतौर पर दर्शाता है कि वैश्विक राजनीति पहले से ही तनाव से जूझ रही है.
ACLED के अनुसार, 2025 में यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया में संघर्षों की संख्या लगातार बढ़ रही है. कई देशों ने अपने पड़ोसी देशों और डोमेस्टिक आर्म्ड ग्रुप्स के खिसाफ हवाई और ड्रोन हमले किए.
क्या कहते हैं अध्ययन?
आर्म्ड कंफ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट (ACLED) के अनुसार, हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर राजनीतिक हिंसा और संघर्ष स्थिर लेकिन उच्च स्तर पर बने हुए हैं, जिसमें मिडिल ईस्ट सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहा है. यहां इजरायल-हमास संघर्ष, लेबनान और क्षेत्रीय तनाव प्रमुख रहे हैं.
इसके साथ ही यूरोप (मुख्य रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध) और एशिया (म्यांमार का गृहयुद्ध) में राज्य-स्तरीय और अंतरराष्ट्रीय हिंसा बढ़ी है, जहां देशों ने पड़ोसी या विरोधी समूहों पर ड्रोन और एयर स्ट्राइक्स से हमले किए हैं. इस दौरान कई देशों ने अपने रक्षा बजट में रिकॉर्ड वृद्धि की है.
वहीं, अफ्रीका (साहेल, सूडान और अन्य क्षेत्रों में) तथा लैटिन अमेरिका (मेक्सिको, इक्वाडोर में गिरोह हिंसा) में मुख्य रूप से आंतरिक संघर्ष और सशस्त्र समूहों की गतिविधियां जारी रहीं.
साल 2024 में हुई थी लाखों लोगों की मौत
ग्लोबल चेंज के डेटा के अनुसार, साल 2014 में 1 लाख से ज्यादा लोगों की मौत युद्ध के कारण हुई थी. वहीं, साल 2022 में मुख्य रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यह आंकड़ा करीब 2.77 लाख के उच्च स्तर तक पहुंच गया था. वहीं, साल 2023-24 में मौतों के आंकड़ों में कमी आई थी लेकिन दूसरी ओर दुनिया भर में सक्रिय संघर्षों की संख्या बढ़कर 61 हो गई.
वहीं, वेनेजुएला पर अमेरिका द्वारा किया गया हमला भी अब लोगों को दो भागों में बांट चुका है. अर्जेटीना और चिली जैसे कुछ देशों ने अमेरिका का समर्थन किया है. उनका कहना है कि यह कदम अपराधी गिरोहों को खत्म करने और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी है. इजरायल और कनाडा ने भी अमेरिका के फैसले का समर्थन किया है.
चीन और रूस ने किया अमेरिका का विरोध
वहीं, दूसरी ओर अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर किए गए हमले का चीन और रूस ने खुल कर विरोध जताया है. इन देशों का कहना है कि इससे वेनेजुएला की संप्रभुता का उल्लंघन हुआ है और इससे अंतरराष्ट्रीय कानून टूटता है. अमेरिका के फैसले पर ईरान, क्यूबा, कोलंबिया और ब्राजील ने भी चिंता जताई है. उनका कहना है ऐसे कदम दुनिया में अस्थिरता को और ज्यादा बढ़ावा देंगे.










