क्या होता है 'जजिया कर'? जिसे लेकर कारोबारी हिंदू को बांग्लादेश में मिल रही थी धमकी, फिर कर दी हत्या

जजिया कर का जिक्र एक बार फिर चर्चा में है. बांग्लादेश में एक हिंदू कारोबारी से इसी के नाम पर वसूली की धमकी दी गई और बाद में उसकी हत्या कर दी गई, जिससे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए.

Jizya tax

जजिया एक प्रकार का प्रति व्यक्ति कर था, जो पुराने समय में मुस्लिम शासकों द्वारा गैर मुस्लिम नागरिकों से लिया जाता था. इन्हें धिम्मी कहा जाता था. यह कर सैन्य सेवा से छूट और जान माल की सुरक्षा के बदले वसूला जाता था. जजिया केवल स्वस्थ पुरुषों पर लागू होता था. महिलाएं बच्चे बुजुर्ग बीमार और साधु संत इससे मुक्त रहते थे. भारत में जजिया कर सबसे पहले मोहम्मद बिन कासिम ने सिंध में लागू किया. दिल्ली सल्तनत के दौर में कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे आगे बढाया. मुगल शासक अकबर ने 1564 में इसे खत्म कर दिया था ताकि धार्मिक सौहार्द बना रहे. बाद में औरंगजेब ने 1679 में इसे फिर से लागू किया जिसे धार्मिक भेदभाव से जोडा गया.

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बांग्लादेश में जजिया के नाम पर धमकी

अब जजिया कर का जिक्र बांग्लादेश में एक हत्या के बाद सामने आया है. ढाका के पास किराने की दुकान चलाने वाले 40 साल के सरत चक्रवर्ती मणि की बेरहमी से हत्या कर दी गई. आरोप है कि उनसे जजिया कर के नाम पर वसूली की जा रही थी. परिवार के करीबी दोस्त बप्पादित्य बसु ने बताया कि मणि को धमकी दी गई थी कि अगर पुलिस को बताया तो उसकी पत्नी का अपहरण कर लिया जाएगा. बांग्लादेश में जजिया कर का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है. इसके बावजूद इस तरह की धमकियां गंभीर चिंता पैदा कर रही हैं.

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हत्या और पुलिस की जानकारी

पुलिस के मुताबिक मणि सोमवार रात दुकान बंद कर घर लौट रहे थे तभी अज्ञात हमलावरों ने उन पर धारदार हथियार से हमला किया. उनकी मौके पर ही मौत हो गई. वह शिबपुर उपजिला के निवासी थे और उनका राजनीति से कोई संबंध नहीं था. बप्पादित्य बसु ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति लगातार खराब हो रही है. उनका आरोप है कि यह सब सरकार की चुप्पी में हो रहा है. बीते 18 दिनों में देश में छह हिंदुओं की हत्या हो चुकी है.

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अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले

सरत मणि की हत्या अकेली घटना नहीं है. जेस्सोर जिले में राणा प्रताप बैरागी नाम के हिंदू व्यापारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इससे पहले खोकन चंद्र दास को जलाकर मार दिया गया. अमृत मंडल और दीपू चंद्र दास की भीड द्वारा पीट पीटकर हत्या हुई. चटगांव में हिंदू प्रवासी कामगारों के घर जलाने की घटना भी सामने आई. इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खडे कर दिए हैं.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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