मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान की जंग फिर चरम पर पहुंच गई है. अमेरिकी संसद के सीनेट ने ईरान के खिलाफ राष्ट्रपति ट्रंप की सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया. जबकि ईरान युद्ध के कारण गैस की कीमतों में बढ़ोतरी डोनाल्ड ट्रंप के लिए राजनीतिक चुनौती बन गई है और मध्यावधि चुनाव में भी उनके खिलाफ विपक्ष इसे मुद्दा बना सकता है. लेकिन इसके बावजूद अमेरिकी सेना ने मिडिल ईस्ट में तैनाती बढ़ा दी है और अब होर्मुज स्ट्रेट में हाई-एनर्जी वाले Xbox गेम कंट्रोलर से चलने वाले लेजर हथियार तैनात कर दिए हैं, जो ड्रोन और मिसाइलों को देखते ही गिराने में सक्षम हैं.
लेजर वेपन गेम खेलने जैसे हथियार
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग ने होर्मुज स्ट्रेट में लेजर वेपन तैनात किए जाने की पुष्टि की और बताया इन हथियारों को कंट्रोल करना और चलाना काफी आसान है, वहीं ये हथियार काफी सस्ते होते हैं. सैनिक Xbox गेम कंट्रोलर से इन्हें चला सकते हैं और यह ठीक गेम खेलने जैसे हैं. अमेरिका का डेफेंस डिपार्टमेंट पिछले 50 साल से इस टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है और आज देश की सेना के पास काफी लेजर वेपन हैं. किसी और देश के पास यह हथियार नहीं हैं और अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर इनका ट्रायल किया जा चुका है. इसलिए अब ईरान युद्ध में ये इस्तेमाल होंगे.
लेजर वेपन को बिजली की जरूरत
अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, सामान्य एंटी-ड्रोन या एंटी-मिसाइल सिस्टम को इंटरसेप्टर के जरिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन लेजर वेपन में ऐसा नहीं है. बल्कि इसे सिर्फ बिजली की जरूरत है और इसमें कोई हथियार बार-बार नहीं बदलना पड़ता, बल्कि एक हथियार कई फायर कर सकता है. लेकिन पूरा लेजर वेपन प्रोजेक्ट खरीदने के लिए अमेरिकी सेना को 50 करोड़ डॉलर खर्च करने पड़े. वहीं भविष्य के युद्धों में इस्तेमाल करने के लिए लेजर वेपन सिस्टम बनाने का ठेका भी कंपनी को दे दिया है. लेजर वेपन में AeroVironment के E-HEL यानी एंड्योरिंग हाई-एनर्जी लेजर सिस्टम का इस्तेमाल होता है.
कैसे काम करता है लेजर वेपन?
लेजर वेपन अब लैब या बच्चों की गेम तक सीमित नहीं, बल्कि युद्धक्षेत्र में उतर आए हैं. लेजर वेपन के लिए जनरेटर या बैटरी की जरूरत पड़ती है, जो इलेक्ट्रिसिटी को प्रकाश कणों यानी फोटॉनों में बदलकर एक तरह की किरण बनाता, जो टारगेट को हाईलाइट करती है, जितनी देर वह टारगेट पर रहती है, उस समय को ‘ड्वेल टाइम’ कहते हैं. इससे गर्मी बढ़ने से ड्रोन या मिसाइल के सेंसर खराब हो जाते हैं और जल जाते हैं, जिस वजह से काम न करने की वजह से वे फट जाते हैं. ड्रोन या मिसाइल को डिटेक्ट करके लेजर वेपन से उसे हाईलाइट करके नष्ट किया जा सकता है या निशाना साधा जा सकता है.
लेजर वेपन कैसे कंट्रोल किए जाते?
लेजर वेपन Xbox कंट्रोलर से चलाए जाते हैं. अब तक इस कंट्रोलर का इस्तेमाल बच्चों की गेमिंग के लिए होता था, लेकिन अब इस सिस्टम का इस्तेमाल हथियार चलान के लिए भी किया जा रहा है. मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना के युद्धपोतों पर इन्हें लगाया गया है. इनमें HELIOS यानी हाई-एनर्जी लेजर विद इंटीग्रेटेड ऑप्टिकल डैजलर एंड सर्विलांस टेक्नोलॉजी है, जो 60 किलोवाट की लेजर रे बनाकर टारगेट को फोकस कर सकती है. इससे निकली लेजर रे दिखती नहीं, लेकिन ड्रोन के कैमरे या सेंसर को ब्लाइंड करके उसके नष्ट कर सकती है. इसे ‘डैजलर’ कहते हैं और यह 1300 पाउंड वाले ग्रुप-3 के ड्रोन को गिरा सकती है.