Gaurav Pandey
लिखने-पढ़ने का शौक है। राजनीति में दूर-दूर से रुचि है। अखबार की दुनिया के बाद अब डिजिटल के मैदान में हूं। आठ साल से ज्यादा समय से देश-विदेश की खबरें लिख रहा हूं। दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे संस्थानों में सेवाएं दी हैं।
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Farmers Protest Belgium : किसानों का आंदोलन इस समय केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में चल रहा है। ऐसा ही एक देश है बेल्जियम जहां के किसान अपनी मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को यहां किसानों और पुलिस के बीच भिड़ंत हो गई। इस दौरान किसानों ने उन पर लिक्विड खाद स्प्रे कर और अंडे फेंक कर विरोध व्यक्त किया। बता दें कि यूरोपीय यूनियन के कृषि मंत्री किसानों की चिंताओं को संबोधित करने का रास्ता तलाश कर रहे हैं।
🚨🇧🇪 Meanwhile in Belgium…..
Farmers Spray Police with Manure
There will come a point where Police will have to pick a side…..hopefully they pick wisely. pic.twitter.com/zCQiIFL5YV
— Concerned Citizen (@BGatesIsaPyscho) February 26, 2024
बेल्जियम के किसान रेड टेप और उन देशों से होने वाले सस्ते इंपोर्ट को लेकर गुस्सा हैं जहां यूरोपीय यूनियन के उच्च मानक पूरे करने की बाध्यता नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार ब्रसेल्स की पुलिस ने बताया कि करीब 900 ट्रैक्टरों पर सवार होकर किसान शहर में पहुंचे थे। ये लोग यूरोपीय यूनियन की उस इमारत के पास पहुंचे जहां मंत्री बैठक कर रहे थे। किसानों के आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके जवाब में किसानों ने उन पर खाद स्प्रे की।
किसानों ने अपने ट्रैक्टर शहर के मुख्य मार्गों पर खड़े कर दिए जिसकी वजह से ट्रैफिक बाधित हुआ। कुछ ट्रैक्टर तो उन बैरियर्स को तोड़ते हुए निकल गए जो पुलिस ने उनका रास्ता रोकने के लिए लगाए थे। बेल्जियम में आंतरिक मामलों की मंत्री एलेलीस वर्लिंडेन ने निर्देश दिया है कि ऐसे प्रदर्शनकारियों की पहचान की जाए जिन्होंने जनता को नुकसान पहुंचाया है या फिर अधिकारियों के निर्देशों का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के अधिकार का इस्तेमाल सम्मान के साथ होना चाहिए।
Belgium update🇧🇪⚔️🚨
Farmers spray police with dung in Brussels ⚔️⚔️🙏🙏 pic.twitter.com/hkHexWo6an
— AntiCensorship (@truthscant) February 26, 2024
बता दें कि इस महीने की शुरुआत में भी किसानों ने एक ऐसा ही प्रदर्शन किया था जिसने हिंसक स्वरूप ले लिया था। तब यूरोपीय यूनियन के नेता एक सम्मेलन में शिरकत कर रहे थे। किसानों ने वहां पहुंच कर पुलिस पर अंडे और पटाखे फेंके थे। किसानों का कहना है कि सरकार हमें नजरअंदाज कर रही है। नियम बनाने वाले नेताओं को एक दिन किसानों के साथ काम करना चाहिए, तब उन्हें पता चलेगा कि यह आसान काम नहीं है। उनके नियमों ने हमारे काम के लिए मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
बेल्जियम के अलावा कई यूरोपीय देशों में किसानों ने आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया है। इन देशों में जर्मनी, पोलैंड, इटली, फ्रांस ग्रीस और स्पेन जैसे देश शामिल हैं। किसानों का कहना है कि पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर यूरोपीय यूनियन के बहद सख्त नियमों ने उनके लिए समस्याएं खड़ी कर दी हैं। बेल्जियम के किसानों की मांग काम की स्थिति में सुधार करने के साथ सख्त नियमों में राहत दिए जाने की है। फरवरी की शुरुआत में किसानों ने यहां यूरोपीय संसद के सामने आग भी लगाई थी।
Brussels, Belgium 🇧🇪:
Farmers trying to storm the European Union HQ 🇪🇺🇮🇱, as European agriculture ministers meet for a SummitIt is war over there and they must be VERY afraid pic.twitter.com/8a6qPTuEOE
— ⚡☀️sLOVEnia 🇸🇮☀️⚡ (@occultni) February 26, 2024
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