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किस मुगल बादशाह की थीं सबसे ज्यादा पत्नियां? शादी करने में सबसे आगे, जानिए पैदा किए कितने बच्चे

मुगल काल में शादियां केवल निजी रिश्ते नहीं, बल्कि साम्राज्य विस्तार की बड़ी रणनीति हुआ करती थीं. आइए जानते हैं किस बादशाह ने सबसे अधिक विवाह किए और इसका सत्ता पर क्या असर पड़ा.

Author Written By: Raja Alam Updated: Jan 28, 2026 19:59

मुगल साम्राज्य के इतिहास में जब भी सबसे अधिक शादियों की बात होती है, तो बादशाह अकबर का नाम सबसे ऊपर आता है. अकबर के विवाह केवल निजी जीवन का हिस्सा नहीं थे, बल्कि वे साम्राज्य विस्तार और राजनैतिक मजबूती के लिए सोची-समझी रणनीतियां थीं. इतिहासकारों के अनुसार, अकबर ने आमेर समेत कई बड़े राजपूत घरानों और अन्य प्रभावशाली परिवारों के साथ वैवाहिक गठबंधन किए थे. इन शादियों की सही संख्या को लेकर अलग-अलग किताबों में मतभेद हैं, लेकिन यह सच है कि अकबर ने इन रिश्तों के जरिए उत्तर-पश्चिम भारत में मुगलों की पकड़ बेहद मजबूत कर दी थी. राजपूतों को ऊंचे पद और सम्मान देकर अकबर ने दरबार में एक ऐसा संतुलन बनाया, जिसने करीब 50 साल तक उनके शासन को स्थिरता दी.

शराब की लत ने छीनी दावेदारी

अकबर की संतानों में तीन बेटों सलीम (जहांगीर), मुराद और दानियाल का नाम इतिहास में प्रमुखता से लिया जाता है. उत्तराधिकार की लड़ाई में जहांगीर की स्थिति सबसे मजबूत थी, क्योंकि उनकी मां जोधा बाई (मरियम-उज-जमानी) आमेर की राजकुमारी थीं. अकबर के दो अन्य बेटे मुराद और दानियाल अपनी शराब की लत और खराब स्वास्थ्य के कारण पिता के जीवित रहते ही दुनिया छोड़ गए थे. मुराद की मौत 1599 में हुई, जबकि दानियाल ने अकबर की मौत से कुछ दिन पहले ही दम तोड़ दिया था. ऐसे में साल 1605 में जब अकबर का निधन हुआ, तो सलीम यानी जहांगीर ही एकमात्र जीवित और सक्षम उत्तराधिकारी बचे थे, जिन्हें मुगल और राजपूत दोनों गुटों का समर्थन हासिल था.

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मुगल हरम और संतानों की संख्या

मुगल शासकों में सबसे ज्यादा संतानें किसकी थीं, इस बात पर आज भी इतिहासकारों के बीच एक राय नहीं है. मुगल काल में बहु-विवाह और हरम की लंबी-चौड़ी व्यवस्था के कारण राजकुमारों और राजकुमारियों की संख्या काफी बड़ी हुआ करती थी. अकबर की कुल संतानों का अनुमान 10 से 15 के बीच लगाया जाता है, जिनमें आरजानी बेगम और खानजादा बानो जैसी बेटियां भी शामिल थीं. अकबर के बाद जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब की भी कई संतानें हुईं, लेकिन सटीक संख्या पर दस्तावेज खामोश हैं. हालांकि, सत्ता पाने का संघर्ष केवल जन्म के क्रम पर निर्भर नहीं था, बल्कि इसके लिए शहजादों को सैन्य कौशल, अमीरों का समर्थन और अपनी योग्यता साबित करनी पड़ती थी.

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इतिहास की किताबों में दर्ज मुगलों की विलासिता

मुगलों के निजी जीवन और उनकी सत्ता की कहानी अबुल फजल की ‘अकबरनामा’ और ‘आइने-अकबरी’ जैसी किताबों में विस्तार से मिलती है. इसके अलावा बदायूनी की ‘मुन्तखब-उत-तवारीख’ जैसे स्रोत उस दौर की राजनीति और दरबार की हलचलों पर रोशनी डालते हैं. आधुनिक इतिहासकारों में विन्सेंट स्मिथ और सतीश चंद्र ने भी अकबर की वैवाहिक नीतियों को साम्राज्य निर्माण का एक मुख्य स्तंभ माना है. इन तमाम दस्तावेजों से यह साफ होता है कि मुगलों के वैवाहिक संबंध केवल परिवार बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान पर हुकूमत करने का एक जरिया थे. आज भी इन शादियों और उत्तराधिकार के संघर्षों की कहानियां भारतीय इतिहास का एक बेहद दिलचस्प हिस्सा बनी हुई हैं.

First published on: Jan 28, 2026 07:59 PM

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