धरती से 10,000 प्रकाश वर्ष दूर एक ऐसा ग्रह मिला है जिसका कोई सूरज नहीं है. यह ग्रह पूरी तरह अकेला है और ब्रह्मांड में अंधेरे में भटक रहा है. वैज्ञानिकों ने इस रोग प्लैनेट की दूरी और वजन को पहली बार सटीक रूप से मापा है. इसका वजन बृहस्पति के लगभग पांचवें हिस्से के बराबर है. ऐसे ग्रहों को देखना बेहद मुश्किल होता है और यही इसे खास बनाता है. यह ग्रह किसी भी तारे के चारों ओर चक्कर नहीं लगाता और गैलेक्सी के केंद्र की ओर बढ़ रहा है.
सौर मंडल से क्यों बाहर फेंक दिया गया ये ग्रह?
वैज्ञानिक मानते हैं कि यह ग्रह कभी किसी सौर मंडल का हिस्सा था. गुरुत्वाकर्षण की खींचतान के कारण इसे बाहर फेंक दिया गया. इसे ग्रेविटेशनल बिलियर्ड्स भी कहा जाता है. इस प्रक्रिया में बड़े ग्रह छोटे ग्रहों को बाहर धकेल देते हैं. अब यह ग्रह अनंत काल तक अकेले ही सफर करेगा और इसकी सतह पर सूरज की कोई रोशनी नहीं पहुँचती. यह पूरी तरह ठंडा और अंधेरा हो सकता है.
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माइक्रोलेंसिंग तकनीक क्या है?
इस ग्रह को ढूंढना बेहद मुश्किल था क्योंकि इसके पास अपनी कोई रोशनी नहीं है. वैज्ञानिकों ने माइक्रोलेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया. जब यह ग्रह किसी दूर स्थित तारे के सामने से गुजरा, तो इसका गुरुत्वाकर्षण उस तारे की रोशनी को मोड़ने में मदद करता है. इसे ग्रेविटेशनल माइक्रोलेंसिंग कहते हैं. चिली और ऑस्ट्रेलिया के टेलिस्कोप ने इसे 3 मई 2024 को देखा. गया स्पेस टेलिस्कोप ने भी इसे रिकॉर्ड किया. अलग-अलग जगहों से देखने पर इसकी सटीक दूरी और वजन का पता चला.
क्या अरबों ग्रह भटक रहे हैं अकेले?
वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे अरबों ग्रह हो सकते हैं जो अकेले भटक रहे हैं. नैन्सी ग्रेस रोमन स्पेस टेलिस्कोप 2027 में लॉन्च होगा और हबल से 1000 गुना तेजी से आवारा ग्रहों का सर्वे करेगा. इससे हजारों नए ग्रहों की खोज संभव होगी. यह तकनीक ब्रह्मांड में ग्रहों के बनने की प्रक्रिया और उन हिस्सों की जानकारी देने में मदद करेगी जो अब तक छुपे हुए थे.










