Wednesday, 28 February, 2024

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Noida: 500 लोगों के डीमैट अकाउंट से ट्रेडिंग के नाम पर ठगी, रकम जानकर रह जाएंगे दंग

Noida Cyber Crime News: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की नोएडा यूनिट साइबर सेल ने मध्य प्रदेश के एक व्यक्ति को ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसने अपने साथियों की मदद से 500 लोगों का डीमैट अकाउंट (Demat Account) खोलने के नाम पर 15 करोड़ रुपये की ठगी की है। पुलिस उसके […]

Edited By : Naresh Chaudhary | Updated: Sep 7, 2022 11:18
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Noida Cyber Crime News: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की नोएडा यूनिट साइबर सेल ने मध्य प्रदेश के एक व्यक्ति को ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया है। उसने अपने साथियों की मदद से 500 लोगों का डीमैट अकाउंट (Demat Account) खोलने के नाम पर 15 करोड़ रुपये की ठगी की है। पुलिस उसके साथियों की तलाश में जुट गई है। वहीं उसके गैंग और नेटवर्क के बारे में जानकर पुलिस भी हैरान रह गई।

गाजियाबाद के रहने वाले एक व्यक्ति से ठगे थे 15 लाख रुपये

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यूपी के गाजियाबाद में रहने वाले अशोक कुमार मिश्रा ने इसी साल फरवरी में नोएडा के सेक्टर-36 स्थित साइबर क्राइम थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि किसी ने मुद्रा व्यापार (currency trading) के बहाने मोबाइल एप्लिकेशन से उसके बैंक खाते से 15 लाख रुपये ठग लिए। वहीं एसटीएफ (नोएडा यूनिट) की साइबर सेल प्रभारी रीता यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है, पीड़ित को मेटाट्रेड-05 नामक एक मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए ठगा गया था। साइबर टीम और खुफिया जानकारी की मदद से आरोपी की पहचान मध्य प्रदेश के देवास निवासी शोएब मंसूरी के रूप में की गई। वह इंदौर में आमदनी सॉल्यूशंस के नाम से एक फर्जी फर्म चला रहा था।

शातिर ने 10 लोगों का स्टाफ भी रखा था लोगों को फंसाने के लिए

पुलिस ने जब मामले की पड़ताल की तो पाया कि आरोपी ने करीब 10 पुरुषों और महिलाओं को इस काम में अपने साथ रखा था, जो लोगों को कॉल करके करेंसी ट्रेडिंग के बारे में बताते थे और उनके पैसों को दोगुना करने का झांसा देते थे। शिकायतकर्ता को भी इसी तरह का एक कॉल आया था। इसके बाद उसने एक डीमैट खाता खोला और कॉल करने व्यक्ति के कहने पर वही मोबाइल ऐप डाउनलोड कर लिया। ग्राहक ऐप के माध्यम से डीमैट खातों में पैसे ट्रांसफर करते थे। वहीं आरोपियों को डीमैट खाते की पूरी जानकारी मिल जाती थी। इसके बाद ऐप के माध्यम से खाते से पैसे निकाल लेते थे, लेकिन ग्राहक को ऐप पर निवेश की गई रकम दिखाई देती थी।

सिप्ऱ मोबाइल ऐप में दिखते थे पैसे, निकालने पर होता था खुलासा

साइबर सेल प्रभारी रीता यादव ने बताया कि ऐप में निवेशकों को अपनी रकम बढ़ती हुई दिखाई देती थी, लेकिन वास्तव में यह शातिरों की चाल होती थी। यह सिर्फ अंक होते थे। इसके चलते ग्राहक करेंसी ट्रेडिंग ऐप पर भरोसा करते थे और ज्यादा से ज्यादा पैसा लगाते थे। जब ग्राहक ट्रेडिंग के बाद अपना मुनाफे का पैसा निकालने चाहते थे तो आरोपी उन्हें सेटलमेंट चार्ज, जीएसटी या कन्वर्जन चार्ज के रूप में और ज्यादा पैसे देने को कहते थे। रीता यादव ने बताया कि आरोपियों पर धोखाधड़ी और आईटी अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं पकड़े गए मंसूरी को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। उसके साथियों की तलाश जारी है।

First published on: Sep 07, 2022 11:18 AM
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