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BJP ने चौंकाया, मोदी लहर में हारने वाले को इस सीट से बनाया उम्मीदवार, बसपा ने ‘खेला’ दांव

Saharanpur Lok Sabha Seat 2024: साल 1952 में परिसीमन के बाद इस सीट पर पहली बार लोकसभा चुनाव हुआ था। इस सीट पर दलित और मुस्लिम निर्णायक वोट बैंक है। इस सीट पर 34.66 लाख से अधिक आबादी है और कुल सात विधानसभा पड़ती हैं।

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Saharanpur Lok Sabha Seat 2024: देशभर में जहां बीजेपी अपने जीते हुए सांसदों के टिकट काट रही है, वहीं, यूपी की सबसे पुरानी सीट में से एक सहारनपुर पर पार्टी ने पिछले दिनों चौंकाने वाला फैसला लिया। दरअसल, इस सीट से 2019 की मोदी लहर में बीजेपी के टिकट से हारने वाले राघव लखनपाल शर्मा को पार्टी ने फिर से अपना उम्मीदवार बनाया है। हालांकि वह 2014 में इस सीट से पार्टी की टिकट से जीते थे।

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दलित और मुस्लिम निर्णायक वोट बैंक

जानकारों की मानें तो इस सीट पर दलित और मुस्लिम निर्णायक वोट बैंक हैं। यहां इस्लामिक शिक्षा का केंद्र देवबंद है। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस सीट पर 70 फीसदी से अधिक मुस्लिम वोट हैं और 15 फीसदी दलितों मतदाता हैं। साल 2011 की जनगणना के अनुसार इस लोकसभा सीट पर कुल 34 लाख 66 हजार 382 की आबादी है। इस सीट पर सात विधानसभा पड़ती हैं।

पहले ये जानें

साल 1952 में परिसीमन के बाद इस सीट पर पहली बार लोकसभा चुनाव हुआ। 1952 से 1977 तक इस सीट पर लगातार कांग्रेस का उम्मीदवार जीता। इसके बाद 1977 में इस सीट पर जनता पार्टी और फिर साल 1984 में कांग्रेस का प्रत्याशी चुनाव में विजयी रहा। इसके बाद जनता पार्टी, बसपा, बीजेपी अब तक अलग-अलग पार्टी के प्रत्याशी चुनाव जीत चुके हैं।  इस सीट में आने वाली सात में से पांच विधानसभाओं पर बीजेपी पार्टी का विधायक है।

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प्रत्याशियों को जानें

बहुजन समाज पार्टी

पार्टी ने यहां से माजिद अली को अपना उम्मीदवार बनाया है। 2017 में माजिद ने बसपा की टिकट पर देवबंद विधानसभा से चुनाव लड़ा था, लेकिन वह चुनाव हार गए थे। वर्तमान में माजिद देवबंद क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य हैं। वह कपड़े का व्यवसाय करते हैं। बता दें माजिद की पत्नी तसमीम बानो 2016 में जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं।

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भारतीय जनता पार्टी

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बीजेपी ने इस सीट से राघव लखनपाल शर्मा को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। राघव साल 2014 में इस लोकसभा सीट से चुनाव जीत थे। इसके बाद 2019 में पार्टी ने फिर उन पर भरोसा जताया, लेकिन मोदी लहर के बीच उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। इस बार तीसरी बार पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। बता दें वह पहली बार सरसावा विधानसभा सीट से उपचुनाव जीते थे। 2002 में वह विधानसभा चुनाव हार गए थे। इसके बाद 2007 और 2012 में वह सहारनपुर शहर सीट से विधायक रहे थे।

कांग्रेस

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पार्टी ने इमरान मसूद को यहां से अपना उम्मीदवार बनाया है। 26 मार्च को उन्होंने अपना नामांकन भी भर दिया। वह मुजफ्फराबाद विधानसभा सीट से कांग्रेस के पूर्व विधायक हैं।

क्या कहते हैं आंकड़ें

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साल 2019 में सहारनपुर लोकसभा सीट से बसपा के हाजी फजलुर्रहमान ने चुनाव जीता था, उन्हें 514139 वोट प्राप्त हुए थे। दूसरे नंबर पर बीजेपी के राघव लखनपाल रहे थे उन्हें 491722 मत मिले। तीसरे नंबर पर इमरान मसूद रहे थे, उन्हें कुल 207068 वोट मिले थे। इसी तरह साल 2014 के नतीजों पर नजर डालें तो बीजेपी के राघव लखनपाल शर्मा ने 472999 मत प्राप्त कर जीत हासिल की थी।

First published on: Mar 27, 2024 08:00 AM

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About the Author

Amit Kasana

अमित कसाना: पत्रकारिता की दुनिया में एक सिद्धहस्त कहानीकार अमित कसाना सिर्फ खबरें नहीं लिखते बल्कि उन्हें बारीकी से संवारते हैं ताकि पाठकों तक सटीक, ताजा और प्रभावी जानकारी पहुंचे. News 24 में न्यूज एडिटर के रूप में उनकी भूमिका समाचारों को प्रस्तुत करने से कहीं अधिक है, वह उन्हें संदर्भ और दृष्टिकोण के साथ गढ़ते हैं. 2008 में 'दैनिक जागरण' से अपनी यात्रा शुरू करने वाले अमित ने 'दैनिक भास्कर' और 'हिंदुस्तान' जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों में भी अपनी पहचान बनाई. 17 वर्षों के लंबे अनुभव के साथ उन्होंने पत्रकारिता के हर पहलू को बारीकी से समझा, चाहे वह प्रिंट, टेलीविजन या डिजिटल मीडिया हो. राजनीति, अपराध, खेल, मनोरंजन, कानून, ऑटोमोबाइल, लाइफस्टाइल और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग में उनकी गहरी पकड़ है. ब्रेकिंग न्यूज की रोमांचक दुनिया, खोजी पत्रकारिता की गहराई और तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग का संयोजन अमित की कार्यशैली की पहचान है. News 24 में उनका लक्ष्य स्पष्ट है समाचारों को त्वरितता और सटीकता के साथ प्रस्तुत करना ताकि पाठकों को भरोसेमंद और सार्थक जानकारी मिल सके.

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