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Noida Heliport Project: नोएडा में देश के सबसे बड़े हेलिपोर्ट प्रोजेक्ट को योगी सरकार ने दी मंजूरी, इतने करोड़ आएगा खर्च

Noida Heliport Project: उत्तर प्रदेश के नोएडा (Noida) में देश का सबसे बड़ा हेलिपोर्ट (Heliport) बनेगा। इसके लिए टेंडर जारी किया जाएगा। शासन ने इस बाबत नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) को मंजूरी दे दी है। हेलिपोर्ट सेक्टर-151ए में बनेगा। परियोजना का उद्देश्य नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में हेलीकॉप्टर कनेक्टिविटी स्थापित करना है। यात्रियों को नोएडा हवाई […]

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Noida Heliport Project: उत्तर प्रदेश के नोएडा (Noida) में देश का सबसे बड़ा हेलिपोर्ट (Heliport) बनेगा। इसके लिए टेंडर जारी किया जाएगा। शासन ने इस बाबत नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) को मंजूरी दे दी है। हेलिपोर्ट सेक्टर-151ए में बनेगा।

परियोजना का उद्देश्य नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में हेलीकॉप्टर कनेक्टिविटी स्थापित करना है। यात्रियों को नोएडा हवाई अड्डे से सीधे आईजीआई एयरपोर्ट दिल्ली और अन्य पड़ोसी शहरों जैसे मथुरा, आगरा, देहरादून आदि तक उड़ान भरने का भी मौका मिलेगा।

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12 नवंबर को बोर्ड बैठक में मिली थी मंजूरी

पिछले माह 12 नवंबर को अथॉरिटी की बोर्ड बैठक में हेलीपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल को मंजूरी दी गई थी। डीपीआर के अनुसार हेलीपोर्ट ग्रेटर नोएडा से 10 किमी दूर, दिल्ली हवाई अड्डे से 50 किमी और नोएडा से 47 किमी दूर एक साइट पर बनेगा। हेलीपोर्ट के लिए कमबख्शपुर गांव में प्राधिकरण ने 9.3 एकड़ जमीन भी चिह्नित की है। साइट नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और एक्वा लाइन के सेक्टर-147 स्टेशन के पास है।

हेलीपोर्ट पर मिलेंगी ये सुविधाएं

जानकारी के मुताबिक परियोजना स्थल के पास जेपी अमन जैसी कुछ ऊंची इमारतें हैं। हेलीपोर्ट तीन ओर से प्रस्तावित गोल्फ कोर्स से घिरा होगा। एक बार विकसित हो जाने के बाद हेलीपोर्ट के आसपास वीआईपी और कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के आवागमन की भी सुविधा रहेगी।

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नोएडा प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि यह राजस्व बढ़ाने के लिए साथ-साथ हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों के लिए एक आधार भी प्रदान करेगा। हेलीपोर्ट बेल 412 हेलीकाप्टरों को समायोजित करने में सक्षम होगा, जिसमें 13 यात्रियों के बैठने की क्षमता है। इसमें हेलीपैड, एप्रन, टैक्सीवे, हैंगर और एक टर्मिनल बिल्डिंग जैसी सुविधाएं होंगी।

इतने करोड़ रुपये का आएगा खर्चा

प्राधिकरण के मुताबिक इस परियोजना पर 43 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। आवेदन की आखिरी तारीख 12 जनवरी 2023 थी। सितंबर में सलाहकार कंपनी की ओर से कुछ कमियां बताए जाने के बाद प्राधिकरण ने इस परियोजना की एक निविदा रद्द कर दी थी।

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अब फिर से इसकी डीपीआर तैयार की गई है। संशोधित डीपीआर के मुताबिक परियोजना के यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली के साथ दिल्ली के पड़ोसी जिलों को जोड़ना है।

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First published on: Mar 03, 2023 07:03 PM
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