Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

उत्तर प्रदेश / उत्तराखंड

‘बैंडिट क्वीन’ की विरासत को क्यों भुनाने में जुटी सपा? यूपी चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने खेला बड़ा दांव

यूपी में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने निषाद समुदाय को लेकर बड़ा दांव खेला है। उन्होंने इटावा में फूलन देवी का जिक्र किया। आइए जानते हैं कि बैंडिट क्वीन की विरासत को क्यों भुनाने में जुटी समाजवादी पार्टी?

Author
Edited By : Deepak Pandey Updated: Apr 12, 2025 17:28
Phoolan Devi
अखिलेश यादव ने क्यों किया फूलन देवी का जिक्र?

उत्तर प्रदेश में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होंगे। इसे लेकर राजनीतिक पार्टियां अभी से ही एक्टिव हो गईं और वोटरों को साधने में जुट गई हैं। लोकसभा चुनाव में पीडीए के फॉर्मूले पर समाजवादी पार्टी की खूब साइकिल चली थी। अब सपा की नजरें विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का ज्यादा फोकस पूर्वांचल पर है। ऐसे में एक बार फिर फूलन देवी का नाम चर्चा में है। अब सवाल उठता है कि क्यों फूलन देवी की विरासत को कैश कराने में जुटे हैं अखिलेश यादव?

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इटावा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि फूलन देवी का भी एक अलग इतिहास है। शायद धरती पर, दुनिया के इतिहास में इतनी प्रताड़ना इतना अपमान किसी महिला का हुआ होगा। जो व्यवहार, अपमान हुआ था उसको सम्मान में बदलने के लिए नेताजी और समाजवादी पार्टी ने उन्हें लोकसभा में पहुंचाने का काम किया था।

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें : सपा MP रामजी लाल को सता रहा जान का खतरा! हाई कोर्ट में दाखिल की याचिका

फूलन देवी के सहारे निषाद वोटरों पर सपा की नजर

यूपी चुनाव से पहले पार्टियों में बैंडिट क्वीन के नाम से फेमस फूलन देवी की राजनीतिक विरासत को भुनाने की होड़ लगी है। निषाद, मल्लाह, केवट समुदाय में फूलन देवी का नाम सम्मान से लिया जाता है। उत्तर प्रदेश में निषाद समुदाय की संख्या करीब 5 प्रतिशत है, जिसमें 150 से अधिक उपजातियां शामिल हैं। वाराणसी, गोरखपुर, मिर्जापुर, भदोही, गाजीपुर, बलिया समेत 18 जिलों में निषाद समुदाय की अच्छी खासी पकड़ है। माना जा रहा है कि अखिलेश यादव ने निषाद वोटरों को सपा से जोड़ने के लिए फूलन देवी का जिक्र लिया और उनके पिता मुलायम सिंह यादव द्वारा फूलन देवी के लिए किए गए कार्यों को गिनाया।

---विज्ञापन---

मुलायम सिंह ने फूलन देवी को भेजा था संसद

एक छोटे से गांव से निकलकर डकैत तक सफर पूरा करने वाली फूलन देवी पर साल 1994 में एक फिल्मी बनी थी। शेखर कपूर ने बैंडिट क्वीन के नाम पर फिल्म बनाई, जिससे फूलन देवी को काफी प्रसिद्धि मिली। सपा के संस्थापक मुलायम सिंह ने साल 1996 और 1999 में दो बार भदोही से चुनाव लड़ाया और फूलन देवी को संसद भेजा। ऐसे में अखिलेश यादव अब फूलन देवी के सहारे निषाद वोटरों को अपने पाले में करने की कोशिश कर रहे हैं।

एक बार योगी के गढ़ में हार गई थी बीजेपी

निषाद समुदाय के वर्चस्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक बार योगी के गढ़ में ही भारतीय जनता पार्टी को मुंह की खानी पड़ी थी। साल 2017 में जब योगी आदित्यनाथ पहली बार मुख्यमंत्री बने, तब उन्हें गोरखपुर लोकसभा सीट से इस्तीफा देना पड़ा था। गोरखपुर उपचुनाव में सपा ने निषाद पार्टी और डॉ. अयूब की पार्टी के साथ मिलकर संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद को मैदान में उतारा और उन्होंने योगी के गढ़ में जीत हासिल की। हालांकि, बाद में गठबंधन टूट गया और निषाद पार्टी का बीजेपी के साथ अलायंस हो गया। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव फूलन देवी की विरासत को भुनाने में जुट गए हैं।

यह भी पढ़ें : योगी सरकार का बड़ा फैसला- बिना वेरिफिकेशन इतने क्विंटल गेहूं बेच सकेंगे किसान

First published on: Apr 12, 2025 05:22 PM

संबंधित खबरें