Nirmal Pareek
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जयपुर: राजस्थान में जारी राजनीतिक संकट के बीच गहलोत सरकार ने मंगलवार को भाजपा की मेयर सौम्या गुर्जर को पद से बर्खास्त कर दिया। इसके बाद आज निगम में दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। बर्खास्ती के आदेश के बाद मेयर का चैंबर लॉक कर दिया गया और नाम पट्टिका भी हटा दी गयी। बता दें कि मंगलवार को स्वायत्त शासन विभाग ने यह आदेश जारी किया था। वहीं विभाग ने गुर्जर को छह साल की अवधि के लिए फिर से चुनाव लड़ने से भी रोक दिया है।
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राज्य सरकार ने प्रथमदृष्टया दोषी पाये जाने पर राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 39 के अन्तर्गत प्रकरण की न्यायिक जांच करवाई। न्यायिक जांच अधिकारी की ओर से सौम्या गुर्जर को अधिनियम-2009 की धारा 39 (1) (घ) (ii) (ii) (vi) के अन्तर्गत दोषी पाया गया।
ऐसे में सरकार ने धारा 39 (4), 41 एवं 43 के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सौम्या गुर्जर को महापौर और वार्ड 87 पार्षद पद से हटाते हुए आगामी 6 वर्ष की कालावधि तक पुर्ननिवार्चन के लिए भी निर्योग्य घोषित किया है।
उल्लेखनीय है कि जयपुर ग्रेटर नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त यज्ञ मित्र सिंह देव के साथ कथित तौर पर हाथापाई के मामले में भाजपा के दो पार्षद पारस जैन व अजय सिंह तथा एक निर्दलीय वार्ड पार्षद शंकर शर्मा की सदस्यता 22 अगस्त को समाप्त कर दी गई थी। इन पार्षदों को छह साल की अवधि के लिए फिर से चुनाव के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। इस मामले में गुर्जर के खिलाफ जांच चल रही थी।
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