'पार्टियां ऑफर देती रहीं, लेकिन मेरा रास्ता अलग है', कभी राजनीति में क्यों नहीं उतरे नाना पाटेकर?

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का राजनीति से पुराना जुड़ाव रहा, लेकिन वे कभी चुनावी मैदान में नहीं उतरे. कई बड़े दलों के ऑफर्स के बावजूद उन्होंने जनता की सीधी सेवा को चुना. जानें क्यों नाना पाटेकर ने राजनीति से बनाई दूरी और कैसे बने किसानों की आवाज.

doctor revealed what happened to him NANA PATEKAR

उनका इलाज गोवा के मणिपाल हॉस्पिटल के ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट में चल रहा था और डॉक्टर शेखर सालकर द्वारा किया जा रहा था. Image Credit- ANI

बॉलीवुड के दमदार अभिनेता नाना पाटेकर अपने बेबाक अंदाज और संजीदा अभिनय के लिए जाने जाते थे. फिल्मों में एक ईमानदार पुलिस अफसर से लेकर भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ने वाले आम नागरिक तक का किरदार निभाने वाले नाना पाटेकर को लेकर अक्सर यह सवाल उठता रहा कि वे राजनीति में क्यों नहीं उतरे.
हकीकत यह है कि नाना पाटेकर का नाम कई बार सक्रिय राजनीति से जुड़ा, लेकिन उन्होंने कभी किसी राजनीतिक दल का झंडा नहीं थामा. कई मौकों पर उन्होंने खुद खुलासा किया है कि देश के लगभग हर प्रमुख राजनीतिक दल की ओर से उन्हें चुनाव लड़ने और पार्टी में शामिल होने के प्रस्ताव मिले.

विज्ञापन

नाना पाटेकर के अंतिम दर्शनों को उमड़ रहे लोग

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के पार्थिव शरीर को गोवा के बम्बोलिम स्थित गोवा मेडिकल कॉलेज (GMC) की मॉर्च्युरी में रखा गया है. समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) के अनुसार, मॉर्च्युरी के बाहर उन्हें श्रद्धांजलि देने और अंतिम दर्शन करने के लिए भारी संख्या में लोग जुट रहे हैं. स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ उनके चाहने वाले नम आंखों से अपने चहेते कलाकार को अंतिम विदाई दे रहे हैं.

विज्ञापन

महाराष्ट्र की राजनीति में नाना पाटेकर का गहरा प्रभाव

महाराष्ट्र की राजनीति में नाना पाटेकर का गहरा प्रभाव रहा. सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही खेमों के बड़े नेताओं से उनके आत्मीय संबंध रहे. बालासाहेब ठाकरे से लेकर शरद पवार तक, सभी उनका बेहद सम्मान करते रहे. इसके बावजूद नाना पाटेकर ने सत्ता की कुर्सी के बजाय जमीन से जुड़े काम को प्राथमिकता दी. उनका मानना था कि जनता की सेवा करने के लिए किसी पद, कुर्सी या राजनीतिक दल के टिकट की जरूरत नहीं होती. जब महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ में किसानों की आत्महत्या की घटनाएं बढ़ीं तो नाना पाटेकर केवल बयानों तक सीमित नहीं रहे.

‘नाम फाउंडेशन’ की स्थापना

साल 2015 में उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर ‘नाम फाउंडेशन’ की स्थापना की. इस संस्था के जरिए उन्होंने सूखा पीड़ित किसानों के परिवारों को सीधी आर्थिक मदद पहुंचाई, गांवों में जल संरक्षण और नदी जोड़ो जैसी जमीनी योजनाओं पर काम किया. जहां नेता अक्सर सिर्फ वादे करते दिखे, वहीं नाना पाटेकर ने खुद गांवों में जाकर लोगों के आंसू पोंछे. नाना पाटेकर का यह साफ रुख रहा कि राजनीति में जाने से व्यक्ति किसी एक दल या विचारधारा के दायरे में बंध जाता है, जबकि एक कलाकार और सच्चा समाजसेवी पूरी जनता का होता है. यही वजह है कि चुनावी राजनीति से दूर रहकर भी वे देश के सबसे प्रभावी और सम्मानित सामाजिक चेहरों में गिने जाते रहे.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ