नीट परीक्षा के पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिलवाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके अब नए 'स्कूल ठीक करो' मिशन पर निकल पड़े हैं. इस मिशन के तहत दीपके ने महाराष्ट्र के लातूर जिले के औसा स्थित एक जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय का औचक निरीक्षण कर चौंकाने वाले दावे किए. दीपके ने आरोप लगाया कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र 'जानवरों से भी बदतर' परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं. स्कूल में उपस्थिति दिखाने के लिए दूसरे स्कूलों से 'किराए के बच्चे' लाकर कक्षाओं में बैठाए गए थे, जिनका नाम स्कूल के रजिस्टर में दर्ज ही नहीं था.

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एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, दीपके ने दावा किया मुंबई से 500 किलोमीटर से अधिक दूर स्थित औसा के स्कूल में पीने के पानी की कमी थी और उनके आगमन से कुछ ही समय पहले उसके शौचालयों और परिसर की सफाई कराई गई और दोपहर के मिड-डे मील के लिए नई थालियां मंगवाई गईं. उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल परिसर में शराब की खाली बोतलें पाई गईं, जिससे यह अंदेशा होता है कि यहां असामाजिक गतिविधियां चल रही थीं.

अपने फेसबुक हैंडल पर साझा किए गए वीडियो में दीपके छात्रों से बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं, तभी उन्हें बताया जाता है कि वे स्कूल के छात्र नहीं हैं. वह हैरानी से अपना सिर पकड़ लेते हैं और एक शिक्षक से बहस करने लगते हैं. उन्होंने स्कूल में पीने के पानी और शौचालय की सुविधाओं की कमी का भी आरोप लगाया.

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दीपके ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, 'एक मंत्री के कुत्ते को भी इन छात्रों से बेहतर सुविधाएं मिलती हैं! यदि सरकार दस वर्षों में टपकती छतों की मरम्मत या बेंचों की कमी को दूर नहीं कर पाई है तो उन्होंने वास्तव में क्या हासिल किया है? स्कूलों की इस बदहाली के लिए सीधे तौर पर जवाबदेही तय करते हुए दिपके ने राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भूसे के इस्तीफे की मांग की है.

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साथ ही उन्होंने ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEO) पर भी निशाना साधा. दीपके का आरोप है कि ये अधिकारी आधिकारिक दौरों का बहाना बनाकर हमेशा अनुपलब्ध रहते हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि स्कूलों की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ऐसे अधिकारियों को आठ दिनों के भीतर निलंबित किया जाए.

दूसरी तरफ, स्कूल प्रबंधन ने इन सभी दावों को बेबुनियाद करार दिया है. स्कूल के प्रधानाध्यापक बालाजी गावली ने स्पष्ट किया कि एक ही परिसर में मराठी और उर्दू माध्यम के दो स्कूल संचालित होते हैं. इसी वजह से बच्चे मौजूद थे और वे सभी उसी विद्यालय के नियमित छात्र हैं, किसी को बाहर से नहीं लाया गया था.

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उन्होंने इस आरोप का भी खंडन किया कि नई प्लेटें केवल दिखावे के लिए मंगाई गई थीं और कहा कि बच्चे स्कूल को उपलब्ध कराई गई पुरानी प्लेटों में ही खाना खा रहे थे. प्रधानाचार्य ने कहा कि दीपके को यह गलतफहमी थी कि ये व्यवस्थाएं और प्रदर्शन विशेष रूप से उनकी यात्रा के लिए आयोजित किए गए थे, जो कि सच नहीं था.

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