नई दिल्ली: भारतीय फुटबॉल स्टार सुनील छेत्री पिता बनने वाले हैं। सोमवार को उन्होंने अपने फैंस से ये गुड न्यूज खास अंदाज में शेयर की। इंटरकॉन्टिनेंटल कप में वानुअतु पर भारत की 1-0 की जीत में गोल करने के बाद छेत्री ने बॉल को अपनी टी-शर्ट के नीचे पेट पर छुपा लिया। छेत्री बताना चाहते थे कि उनकी पत्नी प्रेग्नेंट हैं। इसके बाद उन्होंने स्टेडियम में मौजूद वाइफ की ओर स्माइल किया, जबकि वाइफ सोनम ने छेत्री के इस सेलिब्रेशन पर जमकर तालियां बजाईं। आज हम आपको सुनील छेत्री और सोनम की लव स्टोरी बताने जा रहे हैं, जो वाकई बेहद दिलचस्प है।
कोच की बेटी से हुआ प्यार
छेत्री अपनी पत्नी सोनम भट्टाचार्य से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। सोनम और छेत्री की शादी को अब छह साल हो चुके हैं, लेकिन इससे पहले उन्होंने करीब 13 साल तक डेट किया। उस समय सुनील सिर्फ 18 साल के थे जबकि सोनम महज 15 साल की थीं। छेत्री तब सुब्रत भट्टाचार्य के अंडर मोहन बागान में खेलते थे। सोनम उन्हीं की बेटी हैं। छेत्री ने एक इंटरव्यू में लव स्टोरी शेयर करते हुए कहा था- उनके पिता मेरे कोच थे और वह हमेशा उससे ‘छेत्री’ नाम के लड़के का जिक्र करते थे। वह मेरे बारे में जानने को उत्सुक थी इसलिए उसने अपने पिता के फोन से मेरा नंबर चुरा लिया। इसके बाद उसने मुझे टेक्स्ट कर लिखा-, ‘हाय! मैं सोनम हूं और मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूं। मैं आपसे मिलना चाहती हूं!’ लेकिन मुझे बिल्कुल पता नहीं था कि वह कौन थी।
‘तुम बच्ची हो, जाकर पढ़ाई करो’
उसने बहुत ईमानदारी से मुझसे पूछा इसलिए मैंने उसे वक्त देने और मिलने का फैसला किया। जब हम मिले तो मुझे एहसास हुआ कि वह सिर्फ एक बच्ची थी! मैंने उससे कहा- ‘तुम बच्ची हो, जाकर पढ़ाई करो’ और चला गया। लेकिन किसी कारण से, हमने एक-दूसरे को टेक्स्ट करना बंद नहीं किया। यह दो महीने तक चला। इसके कुछ दिन बाद मेरे कोच के फोन ने काम करना बंद कर दिया तो उन्होंने इसे ठीक करने के लिए मुझे दे दिया। जब मैं इसे ठीक कर रहा था, तब कोच की बेटी ने उस नंबर पर फोन किया। ये नंबर मुझे जाना-पहचाना लग रहा था। तभी मुझे एहसास हुआ कि यह सोनम का नंबर था! इसके बाद मैं बहुत गुस्से में था!
मैं उसे अपने दिमाग से नहीं निकाल सका
मैंने तुरंत उसे फोन किया और कहा कि अगर कोच को पता चलेगा कि मैं उसकी बेटी के साथ चैट कर रहा हूं तो वह मेरा करियर खत्म कर देंगे! मैंने उससे सभी संबंध तोड़ने की कसम खाई। उसने सच न बोलने के लिए माफ़ी मांगी, लेकिन मैंने आगे बात करना बंद कर दिया। कुछ महीने बीत गए, लेकिन मैं उसे अपने दिमाग से नहीं निकाल सका। मुझे उसके आसपास होने में बहुत मजा आया। तो मैंने उसे टेक्स्ट किया और हम फिर से बात करने लगे। जल्द ही, हम मिलने लगे।
सिनेमाघर में दो टिकट खरीदता, पहले मैं अंदर जाता, फिर सोनम
हमें सावधान रहना था कि किसी को पता नहीं चल सका। मैं बहुत टूर करता था इसलिए हम साल में दो या तीन बार ही मिलते थे। मुझे याद है कि मैं सिनेमा जाता था, दो टिकट खरीदता और एक काउंटर पर उसके नाम पर छोड़ देता था। हममें तय हुआ था- पहले मैं एंट्री लूंगा फिर वह 10 मिनट बाद अंदर आएगी। साल बीतते गए और हमारा बॉन्डिंग मजबूत होती गई।
मैं बहुत डरा हुआ था
वह हमेशा मुझे खुश करने, मेरे डर को शांत करने और मेरी रीढ़ बनने के लिए मौजूद रही। यह लगभग ऐसा था जैसे हम एक साथ बड़े हुए और इसी प्रक्रिया में प्यार हो गया। जब हम दोनों काफी बड़े हो गए तब हमने शादी करने का फैसला लिया। मुझे पता था कि यह उनके पिता से बात करने का समय था। जब मैं उसके घर में गया तो बहुत ज्यादा घबराया हुआ था। जब हम बैठे, तो कोच ने बात करना शुरू कर दिया।
आखिरकार मैंने हिम्मत जुटाई और कहा, ‘सर, मैं आपकी बेटी से प्यार करता हूं और मुझे विश्वास है कि वह भी मुझसे प्यार करती है। इसके जवाब में उन्होंने बस इतना कहा- हां, ठीक है और बाथरूम चले गए। जब वह बाहर आया, तो उन्होंने सिर हिला दिया और कुछ ही महीनों में हमारी शादी हो गई। सुनील छेत्री भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम के कप्तान हैं। वह इंडियन सुपर लीग क्लब बेंगलुरु एफसी में कप्तान हैं। वह भारत के सर्वकालिक प्रमुख गोलस्कोरर हैं और सक्रिय फुटबॉलरों में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गोलस्कोरर हैं। छेत्री ने हमेशा कहा है कि हर समय उनका साथ देने के लिए वह सोनम के बहुत आभारी हैं।