Jaspal Rana: सोचा नहीं था कि अभी कुछ दिनों पहले जिस शख्स से बेहद गर्मजोशी के साथ मुलाकात हुई थी, जिनके साथ बैठकर भारत के आने वाले ओलंपिक रोडमैप और तैयारियों पर लंबी चर्चा हुई थी, आज अचानक उनके लिए मुझे ऐसा लेख लिखना पड़ रहा है. दिमाग अब भी इस हकीकत को स्वीकार करने से फौरन मना कर देता है. विश्वास ही नहीं हो रहा कि वो बेबाक आवाज़ हमेशा के लिए शांत हो गई है. लेकिन जसपाल तो हमेशा से ऐसे ही थे, अपनी शर्तों पर जीने वाले, अनप्रेडिक्टेबल और हमेशा जल्दी में. आज जब वो हमारे बीच नहीं हैं, तो यादों का एक पूरा कारवां आंखों के सामने तैर रहा है. आनंद फिल्म का वो मशहूर डायलॉग उन पर कितना सटीक बैठता है, कि ‘ज़िंदगी लंबी नहीं, बड़ी होनी चाहिए.’ जसपाल ने वाकई अपनी ज़िंदगी को इतना बड़ा और मुकम्मल जिया कि वो आने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बन गए.
करणी सिंह रेंज की वो तपती दोपहर
मेरा और जसपाल राणा का परिचय कोई दो-चार साल का नहीं था. हमारी उम्र में कुछ फासला ज़रूर रहा लेकिन जब भी उनसे मुलाकात हुई उन्होंने बड़े भाई, उस्ताद या गुरु की तरह मुझसे बात की. खेल पत्रकारिता के गलियारों में उनके साथ बिताए लम्हे मेरी यादों की अनमोल थाती हैं. बात साल 2004 की है, मैं अपने करियर के शुरुआती, संघर्षपूर्ण दिनों में था और जसपाल राणा उस वक्त भारतीय शूटिंग का वो सूरज थे, जिसकी चमक पूरी दुनिया देख रही थी. दिल्ली के डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज की एक तपती दोपहर में मैं किसी रिपोर्टिंग असाइनमेंट के सिलसिले में गया था. वहां राइफल रेंज पर उस दौर के नेशनल कोच, हमारे प्यारे और दिवंगत सनी थॉमस सर मौजूद थे.
मैंने देखा कि थोड़ी दूर पर एक कुर्सी पर जसपाल राणा बैठे हुए किसी का इंतज़ार कर रहे थे. वो भले ही पिस्टल शूटर थे, लेकिन उस वक्त राइफल रेंज की तरफ आए हुए थे. मैंने जसपाल को देखते ही सनी सर से ज़िद की, ‘सर, प्लीज एक बार उनसे मेरा इंट्रोडक्शन करवा दीजिए.’ सनी सर ने मुस्कुराते हुए मेरी पीठ थपथपाई और कहा, ‘तुम खुद जाओ, वो बहुत अच्छे इंसान हैं, खुद बात करोगे तो बेहतर होगा.’ लेकिन देश के इतने बड़े हीरो से सीधे मिलने की मेरी हिचकिचाहट और ज़िद के आगे सनी सर को झुकना पड़ा और उन्होंने ही जसपाल से मेरा परिचय करवाया.’
झिझक, ज़िद और पहली गर्मजोशी
पहली ही मुलाकात में जसपाल ने जिस गर्मजोशी और सादगी से हाथ मिलाया, मैं समझ गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम चमकाने वाला यह खिलाड़ी अंदर से कितना ज़मीन से जुड़ा हुआ है. वो एक ऐसा दौर था जब भारतीय शूटर्स आज की तरह सुख-सुविधाओं में नहीं रहते थे. विदेशी राइफलों की आसमान छूती कीमतें, कस्टम क्लीयरेंस के झंझट और अलग-अलग इक्विपमेंट इंपोर्ट करने की तमाम परेशानियां खिलाड़ियों का दम तोड़ देती थीं. ऐसे दौर में जसपाल राणा इकलौते ऐसे खिलाड़ी थे जो खेल मंत्रालय और शूटिंग की पेरेंट बॉडी, NRAI की कमियों और राजनीति के खिलाफ खुलकर, बिना किसी डर के बोलते थे. उनकी यही बेबाकी मुझे उनके करीब ले आई और कुछ ही सालों में यह औपचारिक परिचय एक बेहद आत्मीय और अपनत्व भरे रिश्ते में बदल गया.
ये भी पढ़ें:- नहीं रहे शूटिंग के OG धुरंधर जसपाल राणा, ओलंपिक डबल मेडलिस्ट मनु भाकर के गुरू का 49 साल की उम्र में निधन
राजनीति का गलियारा और रेंज का मोह
जसपाल का ताल्लुक एक राजनीतिक परिवार से था, उनके पिता नारायण सिंह राणा भी उत्तराखंड की राजनीति का बड़ा नाम रहे हैं. लेकिन जसपाल का शूटिंग के लिए लगाव पूरी तरह से रूहानी था. खेल, खिलाड़ियों की जरूरतें और खेल संघों के भीतर चलने वाली अंदरूनी राजनीति पर उनकी पकड़ और जानकारी इतनी सटीक होती थी कि हम पत्रकार भी उनसे बहुत कुछ सीखते थे. शायद आज की पीढ़ी को कम ही याद होगा कि खेल की इसी बेबाकी को सिस्टम में बदलने के लिए जसपाल ने साल 2009 में बीजेपी के टिकट पर टिहरी गढ़वाल से लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, हालांकि वहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
मुझे व्यक्तिगत तौर पर उनसे हुई दर्जनों मुलाकातों में से एक बेहद दिलचस्प किस्सा याद है. साल 2012 के लंदन ओलंपिक्स से ठीक पहले दिल्ली के एक इवेंट में हमारी मुलाकात हुई थी. उन दिनों चर्चा थी कि वो कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करने जा रहे हैं. कुछ पत्रकारों के अनौपचारिक समूह में बैठे हुए जसपाल ने अचानक हंसते हुए कहा था, ‘यार, जो मज़ा शूटिंग की रेंज पर है, वो राजनीति में कहां! राजनीति में हो सकता है कि यह मेरी आखिरी पारी हो.’
‘खिलाड़ी’ जब ‘गुरु’ की भूमिका में आया
और देखिए, उनकी वो बात कितनी सच साबित हुई. जसपाल कुछ ही समय बाद राजनीति के बंद कमरों से निकलकर वापस अपनी उसी रेंज पर लौट आए, जिसे वो अपनी आत्मा कहते थे. लेकिन इस बार भूमिका बदल चुकी थी. वे अब ‘खिलाड़ी’ नहीं, ‘गुरु’ थे. साल 2012 के आस-पास उन्होंने नेशनल जूनियर पिस्टल प्रोग्राम के मुख्य कोच के तौर पर जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद उन्होंने भारतीय शूटिंग को जो दिया, उसने इतिहास बदल दिया. मनु भाकर, सौरभ चौधरी और अनीश भानवाला जैसे न जाने कितने ही नगीनों को उन्होंने अपने हाथों से तराशा. वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में भारत की झोली में दमके कई मेडल्स की चमक उन्हीं की मेहनत की इनाम हैं.
ये भी पढ़ें:- क्या रद्द हो जाएगी टीम इंडिया की अगली T20I सीरीज? आयरलैंड क्रिकेट के बयान से मची खलबली!
मनु की सफलता और उस्ताद की ‘आखिरी’ ख्वाहिश
वैसे ये बात सिर्फ मैं नहीं बल्कि भारत का हर खेल प्रेमी भी मानेगा कि जसपाल राणा की कोचिंग का सबसे मुकम्मल ‘शाहकार’ रहीं मनु भाकर. मनु के करियर को संवारने, उनकी प्रतिभा को अनुशासन में ढालने और उनके भीतर एक चैंपियन की मानसिक दृढ़ता पैदा करने का पूरा श्रेय जसपाल राणा की सख्त, लेकिन ममतामयी कोचिंग को ही जाता है. साल 2024 के पेरिस ओलंपिक्स में जब मनु भाकर ने इतिहास रचते हुए भारत को दो-दो मेडल जिताए, तो पोडियम के पीछे खड़े जसपाल राणा की आंखों में जो संतोष था, वो देश के लिए उनके 600 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मेडल्स, अर्जुन अवॉर्ड और द्रोणाचार्य अवॉर्ड से कहीं बड़ा था. पेरिस की उस ऐतिहासिक सफलता के बाद जब मेरी उनसे आखिरी बार मुलाकात हुई, तो मैंने उन्हें बधाई दी. उन्होंने हमेशा की तरह अपनी रौबदार आवाज़ में मुस्कुराते हुए कहा था, ‘अभी तो बस शुरुआत है, देखना 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक्स में मनु इस कमी को पूरा करेंगी और भारत को गोल्ड दिलाएगी.’
अधूरा ख्वाब और कभी न भरने वाला शून्य
जसपाल भाई, आपका वो सपना अभी अधूरा है, और उसे पूरा करने के लिए रेंज पर आपकी वो डांट, वो पारखी नजर और वो हौसला बढ़ाने वाली थपकी अब कभी नजर नहीं आएगी. भारत का पहला ‘गोल्डन बॉय’, जिसने देश में शूटिंग को एक कल्ट बनाया, आज खुद एक अमर कहानी बन गया है. भारतीय शूटिंग के लिए आपका जाना सिर्फ एक शून्य पैदा होना नहीं है, बल्कि एक ऐसा गहरा आघात है जिसकी भरपाई मुमकिन नहीं. लॉस एंजिल्स में जब हमारे शूटर्स पोडियम पर खड़े होंगे, तो कैमरे भले ही उन पर हों, लेकिन हर आंख रेंज के उस कोने को ढूंढेगी जहां आप खड़े होकर मुस्कुराया करते थे. अलविदा जसपाल सर… आपकी कमी हमेशा खलेगी!
ये भी पढ़ें:- ‘दुख पहुंचा है…’, दिग्गज शूटर जसपाल राणा के निधन पर पीएम मोदी ने जताया शोक, सोशल मीडिया पर दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि
संबंधित खबरें
वैभव सूर्यवंशी को मौका नहीं देने से नाराज हो गए कृष्णमाचारी श्रीकांत
54 mins agoभारत की T20 में बादशाहत, ICC रैंकिंग के टॉप-10 में 4 खिलाड़ी शामिल
54 mins agoअभिषेक शर्मा T20I में सूर्यकुमार का रिकॉर्ड तोड़कर बने नए ‘सिक्सर किंग'
1 hr agoअर्शदीप सिंह हुए बाहर तो इन 3 तेज गेंदबाजों की खुल सकती है किस्मत
2 hrs agoचौथे T20I में हार के बाद भारत की प्लेइंग-11 से बाहर हो सकते हैं ये 4 खिलाड़ी
2 hrs agoIND vs WI: तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह की इंजरी पर आया बड़ा अपडेट
3 hrs agoIND vs WI: चौथे टी-20 में टीम इंडिया की हार के ये 5 खिलाड़ी रहे जिम्मेदार
5 hrs agoIND vs WI: चौथे टी-20 में हार के बाद श्रेयस अय्यर ने दिया बड़ा बयान
13 hrs agoवेस्टइंडीज ने जीता चौथा टी-20 मैच, शाई होप बने जीत के असली हीरो
13 hrs agoIND vs WI: संजू सैमसन के तूफानी अर्धशतक से भारत ने रचा इतिहास
14 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines