Royal Challengers Bengaluru: 65 दिन और 74 मैचों तक चली फटाफट क्रिकेट की वार्षिक पटकथा आईपीएल, अपने 19वें सीज़न के समापन और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की दूसरी खिताबी जीत के साथ इतिहास बना चुकी है. वैसे तो फैंस इस सीज़न को वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाज़ी के धमाकों के लिए याद रखेंगे. लेकिन आरसीबी की दूसरी खिताबी जीत भी किसी धमाके से कम नहीं. दुनिया टीम की कामयाबी के पीछे की कहानी का श्रेय विराट कोहली के 'कवर' पेज को देती है, जो सच्चाई का सिर्फ एक अधूरा पहलू है.

आरसीबी की जीत का असली सूत्रधार कौन?

करीब 17 साल तक चोकर्स के टैग के साथ टूर्नामेंट ट्रॉफी को कई मौकों पर चूकने के बाद सिर्फ निहारने वाली आरसीबी अब चैलेंजर नहीं रही. वो ऐसी चैंपियन बन चुकी है जिसने लगातार दो मौकों पर सफलता का स्वाद चखते हुए आईपीएल का टाइटल भी डिफेंड कर लिया है. उम्मीद के मुताबिक चर्चाओं के केंद्र में विराट कोहली और उनका उम्दा प्रदर्शन है, सीज़न में 1 शतक और 5 अर्धशतकों के साथ 675 रन बनाना आसान थोड़ा ही था.

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वहीं चर्चा आरसीबी के कप्तान रजत पाटीदार और देवदत्त पडिक्कल की भी हो रही है. पाटीदार के नाम भी सीज़न में 501 रन तो पडिक्कल ने बल्ले से 464 रन बनाकर अपनी टीम के लिए रन मशीन का काम किया. पाटीदार की कप्तानी को भी जीत का बड़ा श्रेय दिया जा रहा है, कोच एंडी फ्लॉवर की प्लानिंग को भी बड़ा श्रेय जाता है जो क्रिकेटर्स की ऑक्शन से लेकर क्रिकेट मैचों तक हर वक्त व्यस्त नज़र आए कुछ हद तक सही माना जाएगा.

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बल्लेबाज़ और कप्तान से बड़ा रोल किसका?

सवाल ये है कि क्या वाकई बल्लेबाज़ों या सिर्फ अच्छी कप्तानी के दम पर ही आरसीबी आईपीएल-19 में अपना खिताब बचा पाई? मुझे लगता है कि नहीं. क्रिकेट के खेल में एक कहावत कई मौकों पर सुनने को मिलती है कि बल्लेबाज़ आपको मैच जिताते हैं और गेंदबाज़ टूर्नामेंट.

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क्रिकेट को समझने वाले मेरी इस राय से यकीनन इत्तेफाक रखेंगे कि आरसीबी की जीत का तानाबाना चाहे रजत पाटीदार की कप्तानी और विराट के अनुभव के इर्द-गिर्द बुना गया हो. लेकिन बेंगलुरु वालों की कामयाबी की असल पटकथा उसके गेंदबाज़ों ने लिखी जो उसके सबसे असरदार हथियार साबित हुए. यहां मैच और मैदान की कंडीशंस को समझने वाले अनुभवी कंधे भी थे और युवा जोश भी.

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क्योंकि आंकड़े झूठ नहीं बोलते…

क्रिकेट आंकड़ों का खेल है, सरल आंकड़ों की भाषा में ही देखा जाए तो आरसीबी के 4-4 गेंदबाज़ सीज़न में अपनी सफलता की दास्तां इन्हीं आंकड़ों से पेश कर रहे हैं. तेज़ गेंदबाज़ों की तिकड़ी में पहला नाम भुवनेश्वर कुमार का आता है, जो अपने 28 विकेटों के साथ सीजन के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज़ रहे.

इसी कड़ी में दूसरा नाम 2025 सीज़न में आरसीबी से जुड़ने वाले रसिख डार का आता है, जिन्होंने सिर्फ 12 मैच में 19 विकेट लेकर उनपर जताए गए टीम के भरोसे को सही साबित किया. लिस्ट में तीसरा नाम 15 विकेट के साथ ऑस्ट्रेलियाई सूरमा जोश हेजलवुड का है. सीज़न में 14 विकेट लेकर क्रुणाल पांड्या भी एक्स फैक्टर रहे. सीधे-सीधे देखा जाए तो स्पेशलिस्ट गेंदबाज़ों की मौजूदगी में आरसीबी के खेमें में शामिल ऑलराउंडर्स का जखीरा उसका एक्स फैक्टर रहा.

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ऑलराउंडर्स की भूमिका रही गेमचेंजर!

आईपीएल जैसा टूर्नामेंट जो पहले ही टी20 फॉर्मेट में खेला जाता है, वो भी जहां इम्पैक्ट प्लेयर जैसा नियम मौजूद हो किसी भी टीम के लिए ऑलराउंडर्स की भूमिका को और अहम बना देता है. क्रुणाल पांड्या और रोमारियो शेफर्ड इसी रोल में अपनी ज़िम्मेदारी बखूबी निभा गए. यूं तो लीग स्टेज के प्वाइंट्स टेबल में ही टॉप पर रहने के बाद आरसीबी ने अपने इरादे ज़ाहिर कर दिए थे.

एक बार क्वालीफायर में टॉप पर रहने के बाद फाइनल में कदम पक्के हुए तो पीछे देखने की कोई वजह नहीं थी. 'सौ बात की एक बात...' ये है कि आरसीबी ने लीग में फ्लॉप रही सभी टीमों को वो फॉर्मूला बता दिया है जो आने वाले दिनों में किसी भी टीम की सबसे अहम ज़रूरत और कामयाबी की गारंटी हो सकता है. जिसका ताना-बाना बुने बिना चैंपियन बनना किसी के लिए भी नामुमकिन होगा.

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