हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Gyanesh KumarsirBigg Boss 20

फ्रांसिस हैल्जेन ने जीता फिजिक्स का नोबेल प्राइज 2026, एस्ट्रोफिजिकल न्यूट्रिनो को किया था डिस्कवर

Francis Halzen: बेल्जियम में जन्मे फ्रांसिस हैल्जेन को आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में उनका अहम रोल और हाई-एनर्जी एस्ट्रोफिजिकल न्यूट्रिनो की खोज के लिए भौतिकी में 2026 का नोबेल पुरस्कार मिला है.

विज्ञापन
फ्रांसिस हैल्जेन (Photo-X/@NobelPrize)

Nobel Prize in Physics 2026: फ्रांसिस हैल्जेन को आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में उनके अहम योगदान और एस्ट्रोफिजिकल सोर्सेज से निकलने वाले हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो की खोज के लिए 2026 का फिजिक्स का नोबेल प्राइज दिया गया है. नोबेल कमेटी ने कहा कि हैल्जेन ने न्यूट्रिनो जैसे मुश्किल से पकड़ में आने वाले कणों के लिए अंटार्कटिक की बर्फ को एक विशाल डिटेक्टर के तौर पर इस्तेमाल करने की संभावना को पहचाना था. उनके काम ने साउथ पोल पर आइसक्यूब प्रोजेक्ट के लिए साइंटिफिक फाउंडेशन तैयार करने में मदद की.

IceCube और साउथ पोल

न्यूट्रिनो बिजली के लिहाज से न्यूट्रल सब-एटॉमिक कण होते हैं जो आम पदार्थ से बहुत कम इंटरैक्शन के साथ गुजर सकते हैं. हालांकि, जब कोई न्यूट्रिनो परमाणु के न्यूक्लियस से टकराता है, तो उस इंटरैक्शन से रोशनी की एक हल्की चमक पैदा हो सकती है. IceCube के सेंसर इन चमक को तब पकड़ते हैं जब कण साफ अंटार्कटिक बर्फ से गुजरते हैं.

हैल्जेन ने सबसे पहले 1988 में अपना तरीका डेवलप किया था, जिसमें उन्होंने सुझाव दिया था कि साउथ पोल की बर्फ की विशाल मात्रा का इस्तेमाल इन दुर्लभ घटनाओं को देखने के लिए किया जा सकता है. बर्फ में सेंसर के साथ शुरुआती एक्सपेरिमेंट ने बाद में इस कॉन्सेप्ट की फिजिबिलिटी को साबित करने में मदद की.

यह भी पढ़ें- ‘ऑप्टोजेनेटिक्स’ पर काम करने वाले 3 साइंटिस्ट्स को मेडिसिन में 2026 का नोबेल प्राइज

विज्ञापन

ब्रह्मांड के लिए एक नए विंडो खोलना

IceCube Neutrino Observatory आखिरकार एक ऐसे डिटेक्टर के तौर पर डेवलप हुआ जो अंटार्कटिक की तकरीबन एक क्यूबिक किलोमीटर बर्फ को कवर करता है. इसका विशाल आकार जरूरी है क्योंकि कॉस्मिक सोर्सेज से आने वाले हाई-एनर्जी न्यूट्रिनो बहुत कम मिलते हैं.

IceCube की तरफ से इकट्ठा किए गए डेटा ने साइंटिस्ट्स को यूनिवर्स के कुछ सबसे हिंसक वातावरणों की जांच करने और हाई-एनर्जी कॉस्मिक कणों के ऑरिजिन को स्टडी करने में मदद की है. इन ऑब्जर्वेशंस से रिसर्चर्स को पहले से अज्ञात खगोलीय घटनाओं की पहचान करने में भी मदद मिल सकती है.

विज्ञापन

यह भी पढ़ें- किन्हें दिया जाता है नोबेल पुरस्कार, अब तक कितने भारतीयों को मिला ये अवॉर्ड, विजेताओं को क्या मिलता है?

फिजिक्स के लिए नोबेल कमेटी के अध्यक्ष मार्क पियर्स ने हैल्जेन की लगन और वैज्ञानिक सोच की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी लीडरशिप ने एक ऐसा उपकरण बनाने में मदद की जिसने खगोल विज्ञान के लिए एक नया रास्ता खोल दिया है. गौरतलब है कि हैल्जेन अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन में प्रोफेसर हैं.

विज्ञापन

कितनी प्राइज मनी मिलेगी?

फिजिक्स का नोबेल प्राइज रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की तरफ से दिया जाता है. नोबेल पुरस्कार के साथ 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर की नकद रकम मिलती है, और एक से ज्यादा विनर्स होने पर ये राशि आपस में बांट दी जाती है. ये अवार्ड स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में 10 दिसंबर को दिए जाएंगे.

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola