Theory of Karma: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म के रहस्यों का विस्तार से वर्णन किया गया है। ऐसा माना जाता है कि इस जन्म में किए गए कर्म न केवल इसी जीवन को प्रभावित करते हैं, बल्कि अगले जन्म में भी उनका फल भोगना पड़ता है। विशेष रूप से, कुछ प्रकार के ऋण यानी कर्ज ऐसे होते हैं, जिन्हें अगर इस जन्म में नहीं चुकाया गया तो अगले जन्म में भी उसका प्रभाव बना रहता है। आपको बता दें कि भारतीय धर्म ग्रंथों में तीन प्रकार के ऋणों की बात की गई है, ये हैं: हिन्दू धर्म, पितृऋण, देवऋण और ऋषिऋण। आइए जानते हैं कि वे कौन-सी 3 चीजें हैं, जिनका बकाया रखना आपके अगले जन्म के लिए भी कष्टदायक हो सकता है।
धन संबंधी ऋण
धन का लेन-देन हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन अगर किसी से लिया हुआ धन बिना लौटाए छोड़ दिया जाए, तो यह न केवल इस जन्म में बल्कि अगले जन्म में भी कर्ज के रूप में पीछा करता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जो व्यक्ति किसी से उधार लेकर उसे लौटाने में टालमटोल करता है या जानबूझकर उसे चुका नहीं पाता, वह ऋण बंधन में फंस जाता है। यह कर्ज अगले जन्म में भी जारी रहता है, जहां व्यक्ति को आर्थिक तंगी, कर्ज से दबे रहना और धन-संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, यदि किसी से उधार लिया गया है, तो उसे समय पर लौटा देना चाहिए, ताकि अगले जन्म में इसका प्रभाव न पड़े।
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सद्कर्मों का ऋण
व्यक्ति को जीवन में सद्कर्मों का भी ऋण चुकाना होता है। अगर कोई किसी का उपकार भूलकर उसे अनदेखा कर देता है या किसी के किए गए भले कार्य का बदला नहीं चुकाता, तो यह पुण्य का बकाया बन जाता है। यदि किसी ने आपके जीवन में किसी भी प्रकार से सहायता की है, तो उसका आभार प्रकट करना और अवसर मिलने पर उसका उपकार चुकाना अत्यंत आवश्यक है। वेदों में उल्लेख मिलता है कि जो व्यक्ति सद्कर्मों का ऋण नहीं चुकाता, वह अगले जन्म में उन लोगों के प्रति कर्जदार बना रहता है और किसी न किसी रूप में उनका उधार चुकाने के लिए बाध्य होता है। इसलिए, अच्छे कार्यों और सहायता को याद रखना और उनका बदला चुकाना आवश्यक होता है।
संस्कारों और जिम्मेदारियों का ऋण
परिवार और समाज के प्रति हमारी कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। माता-पिता, गुरु, संतान और समाज के प्रति जो दायित्व होते हैं, उन्हें पूरा करना आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति इन कर्तव्यों से भागता है, तो यह ऋण बनकर अगले जन्म तक बना रहता है। माता-पिता की सेवा, गुरु का सम्मान और संतान के प्रति कर्तव्यों को निभाना जीवन का महत्वपूर्ण भाग है। यदि कोई व्यक्ति इन दायित्वों की उपेक्षा करता है, तो उसे अगले जन्म में भी इन्हीं रिश्तों में पुनः जन्म लेकर इस ऋण को उतारना पड़ता है। इसलिए, वर्तमान जन्म में ही इन जिम्मेदारियों को पूर्ण करना चाहिए, ताकि अगले जन्म में इसका भार न उठाना पड़े।
कैसे उतारें इन कर्जों का बोझ?
हिन्दू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक, यदि इन तीन प्रकार के ऋणों को समय रहते नहीं चुकाया गया, तो अगले जन्म में भी इनका प्रभाव बना रहेगा। इनसे बचने के लिए यहां बताए इन नियमों का पालन आवश्यक है:
- धन का सही लेन-देन करें: उधार लिए गए पैसे समय पर लौटाएं और किसी का धन न हड़पें।
- पुण्य कार्यों का सम्मान करें: जिन्होंने आपकी सहायता की है, उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करें और जब अवसर मिले, तो उनका उपकार चुकाएं।
- कर्तव्यों का निर्वहन करें: माता-पिता, गुरु, संतान और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियां पूरी करें।
- यदि व्यक्ति इन बातों का ध्यान रखता है, तो वह इस जन्म में ही अपने सभी प्रकार के ऋणों से मुक्त हो सकता है और अगले जन्म में सुख-समृद्धि का अनुभव कर सकता है।
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।