Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

Religion

Mahabharata Lakshagrih: 5000 साल बाद पांडवों का राज आया सामने, मिल गया लाक्षागृह की सुरंग का अंत

Mahabharata Lakshagrih: क्या आप जानते हैं महाभारत के लाक्षागृह की रहस्यमयी सुरंग आज भी सही सलामत मौजूद है? जी हां, लगभग 5000 साल बाद इतिहासकारों ने इसका दूसरा छोर खोज निकाला है. आइए जानते हैं, इस खोज ने कैसे पांडवों के अज्ञातवास और बचाव की असली कहानी उजागर किया है? पढ़िए दिल्ली से वरुण सिन्हा की रिपोर्ट...

Author
Edited By : Shyamnandan Updated: Jan 5, 2026 08:00
Mahabharata-Lakshagrih

Mahabharata Lakshagrih: कहते हैं इतिहास कई बार अपनी कहानी खुद कहता है. ऐसे में जब भी इतिहास को समझने का प्रयास आप करेंगे, तो हजारों किस्से आपके सामने आ जाएंगे. इस बार रहस्य की खोज आपको लेकर जाती है, दिल्ली से करीब 90 किमी की दूरी पर, वो शहर जहां से पांडवों का नाता है. कहा जाता है कि आज से लगभग 5000 साल पहले महाभारत के युद्ध से पहले पड़ावों के अज्ञातवास में ये जगह एक विशेष पड़ाव के तौर पर थी. इस जगह का नाम है बागपत, जो उत्तर प्रदेश का पश्चिमी छोर है.

दुर्योधन ने बनवाया था लाक्षागृह

कहते हैं, जब दुर्योधन ने अपने बड़े भाई युधिष्ठिर के लिए एक महल बनवाया, तो उसने महल को हर तरह से सुशोभित करवाया. लेकिन, असल में इसके पीछे एक बड़ी साजिश थी. हालांकि समय रहते, उस साजिश के पता विदुर जी को चल गया कि यह महल ज्वलनशील लाख से बनी है. उन्होंने भगवान कृष्ण को ये बात बताई. भगवान कृष्ण ने विदुर जी को बोल कर एक गुप्त सुरंग का निर्माण करवाया.

---विज्ञापन---

आज भी मौजूद है सुरंग

ये सुरंग आज भी बागपत के बरनावा में मौजूद है. ये कहानी आज भी उतनी ही प्रचलित है, जितनी 5000 साल पहले यह एक साकार तस्वीर थी कि किस तरह से दुर्योधन ने लाख से बने महल में आग लगवा दिया था और तब एक गुफा रास्ते पांडव बच निकले थे. कहते हैं, उस समय बरनावा की आबादी 32 लाख थी. ये कहानी आप सब सुन चुके हैं, देख चुके हैं. न्यूज24 आज आपको इस सुरंग के अंत तक ले जा रहा है.

यह भी पढ़ें: Dining Table Mistakes: डाइनिंग टेबल पर रखी ये 7 चीजें रोकती हैं बरकत, बढ़ता है तनाव और धन हानि

---विज्ञापन---

40 किमी दूर मिला गुफा का छोर

करीब 5000 साल बाद इस स्थान से करीब 40 किमी दूर एक स्ट्रक्चर मिला है, जो गुफा की तरह जंगलों के बीचोबीच बना है. ये जगह इस गुफा की दूसरी छोर बताई जा रही हैं. न्यूज24 की टीम इस सफर में इतिहासकार अमित राय जैन और उनके सहयोगी भी मौजूद थे.

ऊबड़-खाबड़ रास्ते में न्यूज24 की टीम को मानव सभ्यता के वो अवशेष भी दिखे, जो हजारों साल से बिखरे पड़े हैं. थोड़ी दूर चलने के बाद वो जगह नजर आने लगी, जिसको देखने लिए टीम ने लगभग 150 km का सफर तय किया था. यह स्ट्रक्चर लगभग 25 फीट ऊंचा और 5 फीट चौड़ा है, जो एक दरवाजे जैसा नजर आता है.

गेट की तरह दिखती है यह आकृति

आप जब इसकी आकृति को देखेंगे, तो इसकी बनावट से लगता हैं, जैसे ये किसी एक बड़े गेट की तरह है. ये जगह लगातार हो रही खनन की वजह से बर्बाद हो रही है. ग्रामीणों के सामने भी यह तब सामने आई जब खनन किया जा रहा था. तभी इस जगह ये आकृति सामने निकल कर आई और गांव के लोग चौंक गए. असल में हजारों साल से ये मान्यता भी थी खंडवारी वन में ही पाण्डवों की ये गुफा का रास्ता खुला था. वहीं से निकलकर वे सभी यमुना को पार करके भागने में सफल हुए थे.

यह भी पढ़ें: Guru Wisdom Teachings: गुरु चुनने की गलती बन सकती है जिंदगी भर का पछतावा, जानिए सच्चे गुरु की पहचान

First published on: Jan 03, 2026 03:54 PM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.